वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की आलोचना करते हुए कहा है कि अब यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए। ट्रंप का कहना है कि जेलेंस्की रूस के साथ युद्ध खत्म करने के लिए समझौता करने में सफल नहीं रहे हैं।
उनका यह बयान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल आपूर्ति समझौते की घोषणा के एक दिन बाद आया है। इस समझौते को लेकर यूक्रेन और कई यूरोपीय सहयोगियों ने चिंता जताई है। उनका तर्क है कि रूसी ईंधन से होने वाली अतिरिक्त कमाई मॉस्को की युद्ध जारी रखने की क्षमता को मजबूत कर सकती है।
वॉशिंगटन पोस्ट और एसोसिएटेड प्रेस की 10 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने शनिवार को कहा कि जेलेंस्की कई बार युद्ध समाप्त करने का समझौता कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। ट्रंप ने यूक्रेन की ओर से रूस की तेल रिफाइनरियों पर किए जा रहे हमलों की भी आलोचना की। उनका दावा है कि इन हमलों से वैश्विक डीजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है और अमेरिका में किसानों, पशुपालकों तथा परिवहन क्षेत्र पर दबाव बढ़ रहा है।
पुतिन के साथ डीजल आपूर्ति समझौते के बाद बयान
ट्रंप ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर समझौते की घोषणा की थी। अमेरिकी प्रशासन का घोषित उद्देश्य ईंधन की बढ़ती कीमतों पर दबाव कम करना है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका में अगले महीने मध्यावधि चुनाव होने हैं और महंगाई तथा जीवन-यापन की लागत मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।

ट्रंप के अनुसार, रूस तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन अतिरिक्त आपूर्ति की योजना बताई गई। उन्होंने आगे कम समय में 30 लाख टन की अतिरिक्त आपूर्ति का भी जिक्र किया। हालांकि, समझौते की पूरी व्यावसायिक शर्तें, भुगतान की व्यवस्था और सभी खेपों की समय-सीमा सार्वजनिक रूप से पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वित्त विभाग ने रूसी डीजल की आपूर्ति से संबंधित प्रतिबंधों में अस्थायी छूट देने के लिए लाइसेंस जारी करने की बात कही। रिपोर्ट में कहा गया कि इस छूट के तहत शुक्रवार तक टैंकरों में लोड किए गए रूसी डीजल की कुछ आपूर्ति पर अप्रैल 2027 तक अमेरिकी प्रतिबंध लागू नहीं होंगे।
यह कदम रूस पर दबाव बनाने की अमेरिका की पहले की नीति से अलग दिखाई देता है। पिछले महीने ट्रंप ने रूस से संबंधित प्रतिबंधों वाला कानून भी हस्ताक्षरित किया था, जिसका उद्देश्य रूसी तेल और गैस से होने वाली आय पर दबाव बढ़ाना था।
जेलेंस्की ने समझौते पर जताई नाराजगी
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका और रूस के बीच हुए समझौते की आलोचना की है। उनके अनुसार, रूस को ऊर्जा निर्यात से होने वाली अतिरिक्त आय युद्ध में इस्तेमाल होने वाले हथियारों, ड्रोन और मिसाइलों के उत्पादन को समर्थन दे सकती है।

जेलेंस्की ने इस घटनाक्रम पर नाराजगी जताते हुए कहा कि रूस को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलने से यूक्रेन के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई जारी रखने की क्षमता बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन अपनी सुरक्षा और हवाई रक्षा मजबूत करने के लिए सहयोगियों के साथ बातचीत कर रहा है।
इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि समझौते की घोषणा उस समय हुई, जब अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर मियामी में यूक्रेनी अधिकारियों के साथ युद्ध समाप्त करने के प्रस्ताव पर बातचीत कर रहे थे। एसोसिएटेड प्रेस से बातचीत करने वाले एक वरिष्ठ यूक्रेनी अधिकारी ने कहा कि यूक्रेनी पक्ष को समझौते की घोषणा से पहले इसकी जानकारी नहीं थी। अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बात की थी।
यूक्रेन के विदेश मंत्री ने अपने राष्ट्रपति का बचाव किया
ट्रंप की टिप्पणी के बाद यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने सोशल मीडिया पर जेलेंस्की का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जेलेंस्की युद्ध के समय देश का नेतृत्व कर रहे हैं और यूक्रेन की जनता को अपने नेता के बारे में निर्णय लेने का अधिकार है।
इस बयान ने अमेरिका और यूक्रेन के बीच मतभेद को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया है। अमेरिका यूक्रेन के युद्ध को समाप्त करने के लिए समझौते पर जोर दे रहा है, जबकि यूक्रेन का कहना है कि किसी भी समाधान में उसकी संप्रभुता और सुरक्षा को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

ट्रंप ने यूक्रेन के रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले जारी रखने को भी अपनी आलोचना का आधार बनाया। उनका कहना है कि ऐसे हमलों से ईंधन बाजार पर असर पड़ता है। दूसरी ओर, यूक्रेन रूस की ऊर्जा और सैन्य संरचनाओं पर हमलों को अपने युद्ध प्रयासों का हिस्सा मानता है। दोनों पक्षों के इन रुखों के बीच युद्ध समाप्त करने की बातचीत और जटिल हो सकती है।
यूरोपीय सहयोगियों ने भी उठाए सवाल
रूस से डीजल आपूर्ति के समझौते पर अमेरिका के कुछ राजनीतिक सहयोगियों और यूरोपीय देशों ने भी आपत्ति जताई है। उनकी चिंता यह है कि रूस के ऊर्जा निर्यात को राहत देने से उसकी आर्थिक स्थिति को फायदा मिल सकता है, जबकि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी है।
स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने समझौते पर खेद जताया। जर्मन सरकार ने कहा कि वह रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों और यूरोपीय सहयोगियों के साथ आगे की कार्रवाई के प्रति प्रतिबद्ध है। पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने यह सवाल भी उठाया कि रूस अपने घरेलू ईंधन संकट के बीच अतिरिक्त डीजल निर्यात कैसे कर पाएगा।
अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने भी इस कदम की आलोचना की और इसे यूक्रेन के साथ विश्वासघात बताया। वहीं, अमेरिकी डेमोक्रेटिक नेताओं ने कहा कि रूस को ऊर्जा से अतिरिक्त आय मिलने से यूक्रेन के खिलाफ उसकी युद्ध क्षमता को मदद मिल सकती है।

डीजल की कीमतों पर कितना असर पड़ेगा?
समझौते का एक प्रमुख घोषित उद्देश्य अमेरिका में डीजल की कीमतों पर दबाव कम करना है। डीजल की लागत ट्रक परिवहन, कृषि और माल ढुलाई जैसे क्षेत्रों को सीधे प्रभावित करती है। ईंधन महंगा होने पर वस्तुओं के परिवहन और उत्पादन की लागत भी बढ़ सकती है।
हालांकि, केवल रूस से अतिरिक्त आपूर्ति की घोषणा के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अमेरिकी या वैश्विक बाजार में डीजल की कीमतें निश्चित रूप से घट जाएंगी। कीमतों पर कच्चे तेल की उपलब्धता, रिफाइनिंग क्षमता, समुद्री परिवहन, भू-राजनीतिक तनाव और अन्य देशों की आपूर्ति का भी असर पड़ता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों ने भी इस समझौते से कीमतों पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव को लेकर अनिश्चितता जताई है। रूस से अमेरिका को आने वाला डीजल दूसरे बाजारों में उपलब्ध आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। इसलिए अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी मात्रा में ईंधन वास्तव में पहुंचता है और वैश्विक बाजार किस तरह प्रतिक्रिया देता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल इस घटनाक्रम के तीन प्रमुख पहलू हैं—रूस से डीजल की वास्तविक आपूर्ति, अमेरिका की प्रतिबंध नीति में बदलाव और यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए चल रही कूटनीतिक बातचीत। यदि समझौते के तहत आपूर्ति शुरू होती है, तो ऊर्जा बाजार पर उसके प्रभाव का आकलन करना संभव होगा। साथ ही, यह भी देखना होगा कि अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच रूस को लेकर नीतिगत तालमेल किस दिशा में आगे बढ़ता है।

ट्रंप की ओर से यूक्रेन में नया राष्ट्रपति चुनने की टिप्पणी ने विवाद को और राजनीतिक रूप दे दिया है। हालांकि, किसी अन्य देश के राष्ट्रपति को बदलने की मांग अपने आप वहां नेतृत्व परिवर्तन का संकेत नहीं है। यूक्रेन के राजनीतिक नेतृत्व का भविष्य वहां की संवैधानिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं तथा यूक्रेनी जनता के निर्णय से जुड़ा है।
भारत के पाठकों के लिए भी यह घटनाक्रम ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। रूस, अमेरिका और यूक्रेन के बीच संबंधों में बदलाव का वैश्विक ईंधन आपूर्ति, व्यापार और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर प्रभाव पड़ सकता है।
लेकिन इस समझौते से भारत में डीजल की कीमतों पर क्या असर होगा, इस बारे में किसी ठोस निष्कर्ष के लिए अलग से भारतीय बाजार के आंकड़ों और सरकारी नीतियों का विश्लेषण आवश्यक होगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि रूस से डीजल आपूर्ति को लेकर ट्रंप का फैसला यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका की नीति और उसके सहयोगियों के साथ संबंधों को लेकर नई बहस पैदा कर रहा है। आने वाले दिनों में समझौते की शर्तों, ईंधन की वास्तविक आपूर्ति और युद्ध समाप्त करने की बातचीत से इस विवाद की दिशा अधिक स्पष्ट होगी।

