चेक बाउंस के 7 मामलों में दोषी हैं अभिनेता, दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाई 3 महीने की सजा; सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शिकायतकर्ता को पैसा मिलना जरूरी, 7 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर को उन्हें कड़ी फटकार लगाई।
अदालत ने पाया कि अभिनेता ने पहले दिए गए निर्देश के मुताबिक रकम जमा नहीं की है। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “अहंकार को सही जगह रखना होगा” और यह भी कहा कि उनकी जगह जेल में है।
हालांकि, अदालत ने तत्काल उनकी याचिका खारिज नहीं की। कोर्ट ने कहा कि उसका उद्देश्य शिकायतकर्ता को उसकी रकम दिलाना भी है। इसी वजह से राजपाल यादव को एक और मौका दिया गया है। उन्हें 6 अक्टूबर तक ₹2 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी और इसे प्राथमिकता के साथ सूचीबद्ध किया गया है।

डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से भुगतान से जुड़े दस्तावेज पेश किए गए। अदालत के सामने ₹50-50 लाख के चार डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी का जिक्र हुआ। उनके वकील ने बताया कि ड्राफ्ट महाराष्ट्र में जारी हुए हैं और उन्हें दिल्ली लाया जा रहा है।
अदालत इस बात से नाराज थी कि पहले दिए गए आदेश के बावजूद भुगतान पूरा नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि अगर अभिनेता को अतिरिक्त समय चाहिए था तो उन्हें पहले अदालत से इसकी अनुमति मांगनी चाहिए थी। शिकायतकर्ता की ओर से भी अभिनेता के रवैये पर आपत्ति जताई गई। इसी दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि “आपको पता होना चाहिए कि कब बोलना है।”
₹5 करोड़ और ₹2 करोड़ का क्या है मामला?
इस केस में दो रकमों का जिक्र इसलिए हो रहा है क्योंकि अदालत ने अलग-अलग चरणों में अलग निर्देश दिए हैं। सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को तत्काल जेल जाने से राहत देते हुए ₹5 करोड़ जमा करने की शर्त रखी थी। इसके बाद 15 सितंबर की सुनवाई में उन्हें भुगतान के लिए समय दिया गया और तत्काल तौर पर ₹2 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया गया।
5 अक्टूबर तक यह रकम जमा नहीं हुई। इसी पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई और अब 6 अक्टूबर तक ₹2 करोड़ जमा करने का अंतिम मौका दिया है।

2010 में ‘अता पता लापता’ से जुड़ा था विवाद
पूरा मामला करीब 16 साल पुराना है। न्यायिक रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2010 में राजपाल यादव से जुड़ी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए M/s Murli Projects Pvt. Ltd. से ₹5 करोड़ की वित्तीय मदद ली गई थी। फिल्म के प्रदर्शन के बाद रकम लौटाने को लेकर विवाद हुआ।
बाद में भुगतान के लिए चेक जारी किए गए, लेकिन वे बाउंस हो गए। रिकॉर्ड के अनुसार 2013 में सात चेक जारी किए गए थे और प्रत्येक की रकम ₹1.05 करोड़ थी। इन चेक के बाउंस होने के बाद कंपनी ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत सात मामले दर्ज कराए।
समझौते के बाद भी जारी रहा विवाद
मामले को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के बीच समझौता भी हुआ। दिल्ली हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार 21 अप्रैल 2013 को ₹10.40 करोड़ के भुगतान को लेकर सहमति बनी थी। इसके बाद 27 जनवरी 2016 को सहमति के आधार पर मनी डिक्री भी पारित हुई। लेकिन भुगतान को लेकर विवाद खत्म नहीं हुआ और मामला अदालतों तक चलता रहा।
सात मामलों में दोषी, 3 महीने की सजा
राजपाल यादव को इन सातों चेक बाउंस मामलों में निचली अदालत ने दोषी ठहराया था। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 को उनकी दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सातों मामलों में तीन-तीन महीने की साधारण जेल की सजा को कायम रखा। इसके बाद अभिनेता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उन्हें राहत का मौका दिया है, लेकिन यह भुगतान की शर्तों से जुड़ा है। अब अदालत की नजर इस बात पर है कि 6 अक्टूबर तक ₹2 करोड़ जमा किए जाते हैं या नहीं। इसके बाद 7 अक्टूबर की सुनवाई में कोर्ट आगे का फैसला लेगा।
