गोपालगंज के बैकुंठपुर में रिंग बांध टूटने के बाद जल संसाधन विभाग ने की कार्रवाई, कार्यपालक अभियंता मुख्यालय अटैच; तटबंध टूटने के कारणों की हाई लेवल जांच शुरू
गोपालगंज: Shitalpur Embankment Breach: बैकुंठपुर प्रखंड के शीतलपुर में रिंग तटबंध टूटने के मामले में जल संसाधन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने कार्यपालक अभियंता मोहम्मद साजिद इकबाल, सहायक अभियंता जावेद और कनीय अभियंता विकास कुमार को उनके वर्तमान कार्यस्थल से हटा दिया है। तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
विभागीय कार्रवाई के तहत कार्यपालक अभियंता को मुख्यालय अटैच किया गया है, जबकि सहायक अभियंता को भी मुख्यालय बुलाया गया है। वहीं, कनीय अभियंता विकास कुमार को भोरे सिंचाई विभाग में प्रतिनियुक्त किया गया है।
30 सितंबर की सुबह टूटा था रिंग बांध
शीतलपुर में रिंग तटबंध 30 सितंबर की सुबह करीब 6:30 बजे टूट गया था। तटबंध टूटते ही बाढ़ का पानी तेजी से आसपास के इलाकों में फैलने लगा और कई गांव इसकी चपेट में आ गए।

घटना के बाद तटबंध की निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और उसकी स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने संबंधित अभियंताओं की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
विभागीय कार्रवाई को तटबंध टूटने की घटना के बाद उठाया गया अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, अभियंताओं की जिम्मेदारी और तटबंध टूटने के वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
तटबंध की स्थिति से लेकर निगरानी रिपोर्ट तक होगी जांच
जल संसाधन विभाग ने मामले की जांच के लिए हाई लेवल जांच के आदेश दिए हैं। जांच टीम तटबंध टूटने के पीछे की परिस्थितियों को कई स्तरों पर खंगालेगी।
जांच के दौरान मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा—
- तटबंध की वास्तविक स्थिति क्या थी?
- उसकी सुरक्षा और निगरानी किस तरह की जा रही थी?
- संबंधित अभियंताओं ने समय-समय पर क्या निरीक्षण किया?
- तटबंध की स्थिति को लेकर पहले कौन-कौन सी रिपोर्ट भेजी गई थीं?
- क्या किसी संभावित खतरे की जानकारी पहले से विभाग को दी गई थी?
जांच में पूर्व में तैयार की गई सुरक्षा रिपोर्ट को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गंडक नदी के बढ़े दबाव के बाद बिगड़ी स्थिति
बताया गया कि 28 सितंबर को गंडक नदी में करीब 5.43 लाख क्यूसेक का सर्वाधिक डिस्चार्ज दर्ज किया गया था। इसके बाद नदी के जलस्तर और पानी के दबाव का असर कई इलाकों में दिखाई देने लगा।
इसी दौरान 30 सितंबर की सुबह शीतलपुर का रिंग तटबंध टूट गया। तटबंध टूटने के बाद पानी तेजी से आसपास के क्षेत्रों में फैल गया।
जुलाई-अगस्त की रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
तटबंध टूटने के बाद स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और पूर्व में की गई निगरानी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि जुलाई-अगस्त में जल संसाधन विभाग को भेजी गई रिपोर्ट में तटबंध को सुरक्षित बताया गया था। अब हाई लेवल जांच में यह भी देखा जाएगा कि उस समय तटबंध की वास्तविक स्थिति क्या थी और सुरक्षा रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की गई थी।
यही बिंदु जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि रिपोर्ट में तटबंध को सुरक्षित बताए जाने के बाद कुछ ही समय में उसके टूटने से संबंधित सवाल खड़े हुए हैं।
करीब 10 गांवों तक पहुंचा था बाढ़ का पानी
रिंग तटबंध टूटने के बाद शीतलपुर समेत आसपास के करीब 10 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया था। अचानक पानी फैलने से स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
घटना के बाद ग्रामीणों में भी नाराजगी देखी गई और तटबंध की निगरानी तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए।
अब जल संसाधन विभाग की कार्रवाई के बाद हाई लेवल जांच रिपोर्ट का इंतजार है। जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि तटबंध टूटने की वजह क्या थी, उसकी सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी थी या नहीं और जिम्मेदारी किन स्तरों पर तय होती है।