Gaya: पितृपक्ष मेले के दौरान गया जी में शुक्रवार को आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। रूस, यूक्रेन और जर्मनी से आए 22 विदेशी श्रद्धालुओं ने पवित्र फल्गु नदी के तट स्थित देवघाट पर अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान किया। सनातन परंपराओं में आस्था रखने वाले इन विदेशी मेहमानों ने विधि-विधान के साथ पितृकर्म पूरा किया।
विदेशी श्रद्धालुओं का यह समूह अगले तीन दिनों तक गया जी की विभिन्न पिंडवेदियों पर जाकर पिंडदान से जुड़े कर्मकांड पूरे करेगा। इनके गया पहुंचने से पितृपक्ष मेले में देश के साथ-साथ विदेशों में भी सनातन परंपराओं के प्रति बढ़ती रुचि की तस्वीर सामने आई है।
देवघाट पर किया पितरों का तर्पण
शुक्रवार को रूस, यूक्रेन और जर्मनी से आए इन श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के देवघाट पर पहुंचकर अपने पितरों को तर्पण अर्पित किया और पिंडदान का कर्मकांड पूरा किया। इस दौरान धार्मिक विधियों का पालन करते हुए श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
गयाजी में पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना से पिंडदान करने पहुंचते हैं। इस वर्ष भी फल्गु तट और विभिन्न पिंडवेदियों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है।
तीन दिनों तक अलग-अलग पिंडवेदियों पर करेंगे कर्मकांड
जानकारी के अनुसार, 22 विदेशी श्रद्धालु तीन दिनों तक गया जी में रहकर विभिन्न पिंडवेदियों पर पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इनके गया आगमन और कर्मकांड की व्यवस्था बनारस के पंडित लोकनाथ गौड़ के नेतृत्व में की जा रही है।
गया जी में पितृपक्ष के दौरान फल्गु नदी, देवघाट और अन्य प्रमुख पिंडदान स्थलों पर लगातार धार्मिक अनुष्ठान चल रहे हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण इस दौरान शहर में आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं।
पितृपक्ष मेले में दिखी अंतरराष्ट्रीय आस्था
गयाजी में विदेशी श्रद्धालुओं का पिंडदान करना नया नहीं है। पिछले वर्षों में भी रूस, यूक्रेन और अन्य देशों से आए विदेशी श्रद्धालु यहां पितृकर्म करते रहे हैं। इससे यह भी सामने आता है कि गयाजी का पितृपक्ष मेला देश की सीमाओं से बाहर तक श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
इस बार रूस, यूक्रेन और जर्मनी के 22 श्रद्धालुओं का एक साथ देवघाट पहुंचना पितृपक्ष मेले के दौरान खास आकर्षण का केंद्र रहा। आने वाले दिनों में ये श्रद्धालु गया जी की अन्य पिंडवेदियों पर भी कर्मकांड पूरा करेंगे।