20 सितंबर को एजेंटों के जरिए निकले थे अमेरिका के लिए; 22 सितंबर के बाद संपर्क टूट गया, परिवार का आरोप- इथियोपिया में बंधक बनाए गए, पुलिस ने दर्ज की मिसिंग रिपोर्ट
अहमदाबाद/मेहसाणा। अमेरिका पहुंचने का सपना गुजरात के एक परिवार के लिए चिंता में बदल गया है। अमेरिका जाने के लिए 20 सितंबर को गुजरात से निकले तीन रिश्तेदार इथियोपिया पहुंचने के बाद लापता हो गए। परिवार का दावा है कि उन्हें वहां बंधक बनाया गया है और उनकी रिहाई के बदले ₹1 करोड़ की फिरौती मांगी गई है।
लापता लोगों की पहचान ऋत्विक जनसारी, ममता चावड़ा और मयूरी के रूप में हुई है। तीनों गुजरात के रहने वाले हैं और आपस में रिश्तेदार हैं। पुलिस के मुताबिक, 22 सितंबर के बाद से तीनों का पता नहीं चल पाया है। परिवार की शिकायत के बाद मेहसाणा के लंघनज पुलिस थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की गई है।
हालांकि, तीनों के अपहरण की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस फिलहाल उनके लापता होने, यात्रा की व्यवस्था करने वाले एजेंटों और कथित फिरौती कॉल की जांच कर रही है।
20 सितंबर को घर से निकले, दो दिन बाद आखिरी बार बात हुई
पुलिस के मुताबिक, तीनों 20 सितंबर को गुजरात से अमेरिका जाने के लिए निकले थे। परिवार ने यह यात्रा एजेंटों के जरिए तय कराई थी। अलग-अलग रिपोर्टों में यात्रा की कुल कीमत करीब ₹60 लाख से ₹75 लाख प्रति व्यक्ति बताई गई है। ममता के पिता किरीटभाई चौहान ने मीडिया से कहा कि परिवार ने प्रत्येक व्यक्ति के लिए करीब ₹70 लाख एजेंट को दिए थे।
परिवार के अनुसार, 22 सितंबर को ममता की अपने पिता से बात हुई थी। इसके बाद तीनों से संपर्क टूट गया। फोन पर बात होने के बाद उनके मोबाइल बंद हो गए और परिवार उनसे दोबारा संपर्क नहीं कर सका।
यही वह बिंदु है जहां से परिवार की चिंता बढ़ती गई। जब लगातार संपर्क नहीं हुआ तो पुलिस से शिकायत की गई।
कौन हैं ये तीनों?
- ऋत्विक जनसारी — मेहसाणा जिले के वडसमा गांव के रहने वाले बताए गए हैं।
- ममता चावड़ा — मूल रूप से मेहसाणा की रहने वाली हैं और फिलहाल अहमदाबाद में रहती हैं।
- मयूरी — गांधीनगर की रहने वाली हैं।
कुछ रिपोर्टों में ममता की उम्र करीब 30 वर्ष, ऋत्विक की 23 वर्ष और मयूरी की 27 वर्ष बताई गई है।
अमेरिका जाने का रास्ता एजेंटों ने तय कराया
पुलिस के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, ममता के पति करीब छह महीने पहले स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका गए थे। ममता ने अमेरिका जाने के लिए कई बार वीजा लेने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
इसके बाद परिवार ने कथित तौर पर ऐसे intermediaries यानी बिचौलियों से संपर्क किया, जिन्होंने कानूनी वीजा प्रक्रिया के बजाय दूसरे रास्ते से अमेरिका पहुंचाने का दावा किया।
पुलिस के अनुसार, मेहसाणा जिले के एक एजेंट ने कथित तौर पर परिवार को दूसरे एजेंट से जोड़ा था। यात्रा की रकम करीब ₹75 लाख प्रति व्यक्ति तय होने की बात पुलिस को दी गई शिकायत में सामने आई है।
रिपोर्टों में सामने आया यात्रा का रूट
कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तीनों को गुजरात से राजस्थान के रास्ते जयपुर ले जाया गया। वहां से उन्होंने अबूधाबी के लिए उड़ान ली और फिर इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा पहुंचे।
NDTV की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तीनों इथियोपिया में एक जगह पर रुके थे और उनके पास एक महीने के ई-वीजा थे। हालांकि, इस यात्रा के बाद वे वास्तव में किस जगह गए और अमेरिका पहुंचने की कोशिश में आगे क्या हुआ, इसकी आधिकारिक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
फिर आया ₹1 करोड़ की फिरौती का दावा
परिवार का कहना है कि संपर्क टूटने के कुछ दिन बाद उन्हें एक व्यक्ति का फोन आया। परिवार के मुताबिक, फोन करने वाले ने खुद को ‘खान’ बताया और दावा किया कि तीनों उसके कब्जे में हैं।
परिवार का आरोप है कि उनकी रिहाई के बदले ₹1 करोड़ मांगे गए।
ऋत्विक के दादा कनुभाई जनसारी ने भी मीडिया से दावा किया कि अपहरणकर्ताओं ने ₹1 करोड़ की मांग की थी। उन्होंने यह भी कहा कि करीब ₹60 लाख पहले ही दिए जा चुके हैं। हालांकि, उन्होंने इस भुगतान के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी। स्थानीय एजेंट अल्पेश पंचाल ने भी ₹1 करोड़ की कथित मांग की बात कही है।
लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ₹1 करोड़ की फिरौती और अपहरण की जानकारी फिलहाल परिवार और एजेंट के दावों पर आधारित है। पुलिस की आधिकारिक पुष्टि अभी तीनों के लापता होने तक है।
परिवार पहले ही लाखों रुपये दे चुका
ममता के पिता किरीटभाई चौहान ने मीडिया से कहा कि अमेरिका भेजने के लिए परिवार ने पहले ही बड़ी रकम खर्च कर दी है। उन्होंने सरकार से तीनों को सुरक्षित वापस लाने में मदद की अपील की है।
परिवार का कहना है कि इतनी बड़ी रकम देने के बाद अब उनके पास दोबारा फिरौती देने की क्षमता नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने प्रशासन से तत्काल मदद मांगी है।
पुलिस अब किन बिंदुओं की जांच कर रही है?
मेहसाणा पुलिस के अनुसार, फिलहाल तीनों का पता नहीं चल पाया है। जांच में यात्रा की पूरी कड़ी, एजेंटों की भूमिका और कथित फिरौती कॉल महत्वपूर्ण हैं।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तीनों आखिरी बार कहां थे, उनकी यात्रा किन लोगों ने कराई और संपर्क टूटने के बाद उनके साथ वास्तव में क्या हुआ। कथित फिरौती कॉल की भी जांच की जा रही है।
विदेश जाने के लालच में जोखिम का बड़ा सवाल
यह मामला सिर्फ तीन लोगों के लापता होने तक सीमित नहीं है। इसमें विदेश पहुंचाने के नाम पर एजेंटों को दसियों लाख रुपये देने और गैर-कानूनी रास्ते का सहारा लेने का जोखिम भी सामने आता है।
मामले में अभी यह जांच का विषय है कि एजेंटों ने तीनों को वास्तव में किस रास्ते से भेजा, उनकी मंजिल क्या थी और इथियोपिया में उनके साथ क्या हुआ। इसलिए फिलहाल सबसे जरूरी तथ्य यही है कि तीनों 22 सितंबर के बाद से परिवार के संपर्क में नहीं हैं और पुलिस उनकी तलाश तथा पूरे मामले की जांच कर रही है।
एक नजर में
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| लापता लोग | ऋत्विक जनसारी, ममता चावड़ा, मयूरी |
| संबंध | आपस में रिश्तेदार |
| गुजरात से रवाना | 20 सितंबर 2026 |
| आखिरी संपर्क | 22 सितंबर 2026 |
| यात्रा का उद्देश्य | अमेरिका पहुंचना |
| कथित खर्च | करीब ₹60–75 लाख प्रति व्यक्ति |
| कथित फिरौती | ₹1 करोड़ |
| पुलिस कार्रवाई | मेहसाणा के लंघनज थाने में मिसिंग रिपोर्ट |
| अभी पुष्टि | तीनों लापता; अपहरण की स्वतंत्र पुष्टि बाकी |
स्थिति: 30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर तीनों के लापता होने की पुलिस पुष्टि है। इथियोपिया में अपहरण और ₹1 करोड़ की फिरौती की बात परिवार/एजेंट के दावे के रूप में सामने आई है; इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। हालिया रिपोर्टों में भी पुलिस द्वारा तीनों के लापता होने और परिवार की ओर से अपहरण व फिरौती के दावे की बात कही गई है।