42 ट्रैफिक कॉरिडोर में तीन चरणों में लागू होगा ITMS; ट्रैफिक के हिसाब से बदलेंगे सिग्नल, एंबुलेंस को मिलेगी प्राथमिकता और नियम तोड़ने वालों पर होगी ऑटोमैटिक निगरानी
नई दिल्ली/AI Traffic System/ दिल्ली की सड़कों पर रोज लगने वाले जाम से निपटने के लिए अब तकनीक का सहारा लिया जाएगा। केंद्र सरकार ने राजधानी के ट्रैफिक सिस्टम को स्मार्ट बनाने के लिए 1,789.52 करोड़ रुपए के Intelligent Traffic Management System (ITMS) को मंजूरी दी है।
इस सिस्टम में AI आधारित तकनीक, रियल-टाइम ट्रैफिक डेटा, स्मार्ट सिग्नल और ऑटोमैटिक ट्रैफिक नियमों की निगरानी शामिल होगी। यानी आने वाले समय में सड़क पर ट्रैफिक कितना है, कहां जाम लगा है और किस रास्ते पर दबाव बढ़ रहा है, इन चीजों के आधार पर सिस्टम ट्रैफिक मैनेजमेंट में मदद करेगा।
42 कॉरिडोर में होगा पूरा सिस्टम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने 30 सितंबर 2026 को इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। इसे दिल्ली पुलिस लागू करेगी। ITMS को दिल्ली के 42 चिन्हित ट्रैफिक कॉरिडोर में तीन चरणों में लागू किया जाएगा।
प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 24 महीने की समयसीमा तय की गई है। इसके बाद सिस्टम के संचालन और रखरखाव के लिए पांच साल की अवधि होगी।
सरकार का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का मकसद केवल नई सड़कें बनाना नहीं, बल्कि दिल्ली में मौजूद सड़क नेटवर्क का ज्यादा बेहतर इस्तेमाल करना है। इसके लिए ट्रैफिक सिग्नल, निगरानी, नियमों का पालन और ट्रैफिक से जुड़ी जानकारी को एक ही तकनीकी सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
ट्रैफिक बढ़ेगा तो सिग्नल की टाइमिंग भी बदलेगी
ITMS की सबसे अहम खासियत Adaptive Traffic Control System होगी। आसान भाषा में कहें तो ट्रैफिक सिग्नल केवल पहले से तय टाइमर के हिसाब से नहीं चलेंगे, बल्कि सड़क पर मौजूद ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार उनकी टाइमिंग बदली जा सकेगी।
मान लीजिए किसी चौराहे पर एक दिशा में वाहनों की लंबी लाइन लगी है, जबकि दूसरी दिशा में ट्रैफिक काफी कम है। ऐसे में सिस्टम ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार सिग्नल टाइमिंग को एडजस्ट करने में मदद करेगा।
अलग-अलग चौराहों के सिग्नलों को भी एक कॉरिडोर के स्तर पर आपस में जोड़ा जाएगा, ताकि बेवजह बार-बार रुकने की समस्या कम की जा सके।
प्रोजेक्ट के तहत 1,092 Adaptive Traffic Control System locations विकसित किए जाएंगे।
सिर्फ जाम नहीं, चालान और नियमों पर भी नजर
नया सिस्टम ट्रैफिक मैनेजमेंट के साथ-साथ ऑटोमेटेड enforcement पर भी काम करेगा। इसके तहत 1,029 enforcement locations निर्धारित किए गए हैं।
तकनीक की मदद से रेड लाइट और स्टॉप लाइन तोड़ने, ओवरस्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाने, हेलमेट या सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करने, अवैध पार्किंग और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करने जैसे ट्रैफिक उल्लंघनों की पहचान की जा सकेगी।
AI आधारित सिस्टम चोरी हुए, हॉट-लिस्टेड या ब्लैकलिस्टेड वाहनों और बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान में भी मदद करेगा। हिट एंड रन से जुड़े वाहनों की पहचान में भी यह तकनीक उपयोगी होगी।
एंबुलेंस को रास्ता दिलाने में भी मदद करेगा सिस्टम
ITMS का इस्तेमाल सिर्फ आम ट्रैफिक के लिए नहीं होगा। सिस्टम एंबुलेंस और दूसरे आपातकालीन वाहनों की प्राथमिक आवाजाही में भी मदद करेगा।
सरकार के मुताबिक, इसके जरिए जरूरत पड़ने पर ग्रीन कॉरिडोर की सुविधा को सपोर्ट किया जा सकेगा। यानी किसी गंभीर मरीज को लेकर जा रही एंबुलेंस को भीड़ वाले रास्ते से जल्दी निकालने के लिए ट्रैफिक सिग्नलों और सड़क की स्थिति को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा।
जाम और सड़क हादसे की जानकारी तुरंत मिलेगी
ITMS में रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग की व्यवस्था होगी। इसका मतलब है कि सिस्टम ट्रैफिक की स्थिति में अचानक आए बदलाव, जाम, धीमी गति से चल रहे ट्रैफिक और सड़क पर हुई घटनाओं की जानकारी तेजी से उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
अगर किसी सड़क पर अचानक जाम लग जाता है या कोई घटना होने से रास्ता प्रभावित होता है, तो ट्रैफिक पुलिस उसके आधार पर डायवर्जन या दूसरे जरूरी कदम उठा सकेगी। इससे किसी घटना पर प्रतिक्रिया देने में लगने वाला समय कम करने का लक्ष्य है।
लोगों को मोबाइल और डिजिटल बोर्ड पर मिलेगी जानकारी
नई व्यवस्था में आम लोगों को भी रियल-टाइम ट्रैफिक जानकारी देने की योजना है। Variable Message Signs (VMS) यानी सड़कों पर लगे डिजिटल सूचना बोर्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जाम, डायवर्जन, पार्किंग की उपलब्धता और सड़क की मौजूदा स्थिति जैसी जानकारी दी जा सकेगी।
जरूरत के मुताबिक यह ट्रैफिक डेटा नेविगेशन सर्विस देने वाले प्लेटफॉर्म के साथ भी साझा किया जा सकता है, ताकि लोग रास्ता चुनते समय मौजूदा ट्रैफिक स्थिति को ध्यान में रख सकें।
पूरा सिस्टम कमांड सेंटर से होगा कंट्रोल
ITMS के तहत ट्रैफिक रेगुलेशन, ट्रैफिक नियमों के enforcement और लोगों तक सूचना पहुंचाने वाली व्यवस्थाओं को Traffic Command and Control Centres से जोड़ा जाएगा। इसके लिए सुरक्षित Data Centre और Disaster Recovery infrastructure भी तैयार किया जाएगा।
सिस्टम में open standards और APIs का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे भविष्य में दूसरी तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी इससे जोड़ा जा सके।
दिल्ली में 71 लाख एक्टिव वाहन, इसलिए जरूरत बड़ी
सरकार के मुताबिक दिल्ली में करीब 71 लाख एक्टिव रजिस्टर्ड वाहन हैं। वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ मौजूदा सड़क नेटवर्क पर दबाव भी बढ़ा है। ऐसे में ITMS का उद्देश्य उपलब्ध सड़क क्षमता का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल करना है,
ताकि ट्रैफिक को केवल मैनुअल तरीके से संभालने के बजाय रियल-टाइम डेटा और तकनीक के आधार पर मैनेज किया जा सके।
दिल्ली पुलिस लागू करेगी, C-DAC देगा तकनीकी मदद
प्रोजेक्ट को लागू करने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की होगी। इसके लिए दिल्ली पुलिस प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए Master System Integrator का चयन करेगी।
वहीं Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC) को Project Management Consultant की भूमिका दी गई है। C-DAC तकनीकी जांच, निगरानी, सिस्टम की वैलिडेशन और स्वीकृति से जुड़े कामों में सहायता करेगा।
कुल मिलाकर, दिल्ली का यह नया ITMS ट्रैफिक सिग्नल से लेकर चालान, जाम की निगरानी, एंबुलेंस की आवाजाही और यात्रियों को मिलने वाली ट्रैफिक जानकारी तक कई व्यवस्थाओं को एक ही तकनीकी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश है।
अगले 24 महीनों में तीन चरणों में लागू होने वाला यह सिस्टम राजधानी की मौजूदा सड़कों को ही ज्यादा स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल करने पर केंद्रित है।