नेशनल अवार्ड की गूंज और गुजरात में मेगास्टार का ग्रैंड वेलकम
मनोरंजन डेस्क, नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम:
मलयालम सिनेमा के मेगास्टार और देश के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में से एक, ममूटी इस समय एक बड़े सोशल मीडिया विवाद के केंद्र में हैं। अपनी हालिया मनोवैज्ञानिक हॉरर फिल्म ‘भ्रमयुगम’ (Bramayugam) के लिए 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (Best Actor) का प्रतिष्ठित खिताब जीतने के बाद ममूटी के साथ घटी एक घटना को लेकर इंटरनेट दो धड़ों में बंट गया है।
सांस्कृतिक स्वागत के दौरान उनके माथे पर तिलक लगाने को लेकर छिड़ी इस बहस पर अब फिल्म जगत की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
‘अतिथि देवो भव:’ की परंपरा: जब ममूटी ने मुस्कान के साथ लगवाया तिलक
यह पूरा घटनाक्रम 22 सितंबर को आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के ठीक बाद शुरू हुआ। ममूटी सरकारी अतिथि के रूप में अपनी पत्नी सुल्फात और करीबी दोस्तों के साथ दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा, ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ (एकता नगर, गुजरात) का दीदार करने पहुंचे थे।
जैसे ही मलयालम सिनेमा के इस दिग्गज ने परिसर में कदम रखा, वहां मौजूद अधिकारियों और स्थानीय टीम ने उनका बेहद भव्य और पारंपरिक भारतीय शैली में स्वागत किया।
क्या हुआ था वहां? (विवाद की मुख्य वजह)
परिसर में एंट्री के दौरान वहां मौजूद एक महिला अधिकारी ने ‘अतिथि देवो भव:’ की भारतीय परंपरा के अनुसार ममूटी का सत्कार किया।
उन्होंने अभिनेता के माथे पर सम्मानपूर्वक ‘तिलक’ (कुमकुम) लगाया और उन्हें एक तिरंगा अंगवस्त्र (शॉल) पहनाया। ममूटी ने बेहद शालीनता, सहजता और चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान के साथ इस सांस्कृतिक स्वागत को स्वीकार किया। इस पल का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही वायरल हो गया और विवाद की वजह बन गया।
सोशल मीडिया पर नफरत की बाढ़; कट्टरपंथियों ने ममूटी की आस्था पर उठाए सवाल
वीडियो वायरल होते ही फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कुछ कट्टरपंथी और रूढ़िवादी यूजर्स ने ममूटी को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
- विरोध की वजह: सैकड़ों की संख्या में मुख्य रूप से मलयालम भाषी ट्रोलर्स ने कमेंट्स की बाढ़ ला दी। अब्बास नाम के एक यूजर समेत कई इंटरनेट ट्रोल्स का दावा था कि एक मुस्लिम होने के नाते ममूटी का तिलक लगवाना ‘इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ’ है और इससे धर्म का अपमान हुआ है।
- आस्था पर हमला: इन डिजिटल कट्टरपंथियों ने ममूटी की धार्मिक पहचान पर सवाल उठाए और उन पर अपनी आस्था से समझौता करने का आरोप लगाया।
ट्रोलर्स को फिल्म इंडस्ट्री का करारा जवाब; हरिश्री यूसुफ बोले- ‘यह तालिबानी सोच भारत में नहीं चलेगी’
जैसे ही सोशल मीडिया पर नफरत बढ़ी, ममूटी के करोड़ों फैंस और भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम अभिनेता के बचाव में ढाल बनकर खड़े हो गए।
इस विवाद पर सबसे तीखा और करारा कटाक्ष मशहूर मलयालम फिल्ममेकर और अभिनेता हरिश्री यूसुफ (Harisree Yousuf) ने किया। उन्होंने ममूटी का खुलकर समर्थन करते हुए एक वीडियो के जरिए ट्रोलर्स की संकीर्ण सोच पर कड़ा प्रहार किया:
- ‘कुएं के मेंढक’: यूसुफ ने ममूटी की आलोचना करने वाले ट्रोल्स को सीधे तौर पर ‘कुएं का मेंढक’ करार दिया, जिनकी सोच बेहद संकीर्ण है।
- विविधता का सम्मान: उन्होंने कहा कि भारत जैसे महान देश में ईश्वर के प्रति सम्मान जताने और अतिथियों का स्वागत करने के कई तरीके हैं—कोई क्रॉस बनाता है, कोई तिलक लगाता है, तो कोई सिर झुकाता है। ममूटी ने केवल देश की अनूठी संस्कृति का सम्मान किया है।
- तालिबानी मानसिकता: फिल्ममेकर ने मुख्य ट्रोलर (अब्बास) पर निशाना साधते हुए कहा, “तुम्हारी यह संकीर्ण सोच ‘तालिबान’ जैसे देशों के लिए उपयुक्त है, भारत के लिए नहीं।
- धर्म इंसानों को आपस में लड़ाने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर इंसान बनाने के लिए होता है। देश में सांप्रदायिकता ऐसी ही सोच से फैलती है।
यह विवाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता की बानगी पेश करता है, जहां किसी कलाकार की कला और देश के प्रति उसके दशकों लंबे योगदान से ऊपर उसकी धार्मिक पहचान को रख दिया जाता है। हालांकि, बहुसंख्यक जनता और फिल्म उद्योग ने इस ट्रोलिंग को सिरे से खारिज कर दिया है।
निष्कर्ष यही निकलता है कि ममूटी ने तिलक लगवाकर अपनी आस्था से समझौता नहीं किया, बल्कि ‘विविधता में ए