मुंगेर: मुंगेर-भागलपुर एनएच-80 पर शुक्रवार रात से शुरू हुआ यातायात संकट शनिवार सुबह तक जारी रहा। तेलिया तालाब से बरियारपुर के बीच करीब 10 किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लग गई। रात करीब 10 बजे से जाम में फंसे वाहन 11 घंटे बाद भी सामान्य रफ्तार से नहीं चल सके। ट्रक, बस और निजी वाहनों की बड़ी संख्या के कारण यात्रियों को काफी देर तक सड़क पर ही इंतजार करना पड़ा।
जाम की सूचना मिलने के बाद यातायात पुलिस और बरियारपुर थाना की टीम देर रात से ही मौके पर पहुंचकर वाहनों को आगे बढ़ाने में जुटी है। पुलिसकर्मी अलग-अलग स्थानों पर यातायात नियंत्रित कर फंसे वाहनों को निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
रेलवे पुल पर वन-वे परिचालन बना बड़ी वजह
यातायात पुलिस के अनुसार, रेलवे पुल पर फिलहाल वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू है। एक साथ दोनों दिशाओं से वाहनों का परिचालन नहीं होने के कारण पुल के दोनों तरफ वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी वजह से जाम का असर दूर तक दिखाई दे रहा है।

विशेष रूप से भारी वाहनों की संख्या अधिक होने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। पुलिस के अनुसार, ट्रकों को व्यवस्थित तरीके से निकालने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन लगातार वाहनों के पहुंचने के कारण जाम पूरी तरह टूट नहीं पा रहा है।
नया फोरलेन खुला, फिर भी पुराने रास्ते पर पहुंच रहे ट्रक
मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन का नया मार्ग चालू होने के बावजूद कई ट्रक चालक अब भी पुराने रास्ते से रेलवे पुल की ओर पहुंच रहे हैं। इससे मुंगेर-भागलपुर मार्ग पर वाहनों का दबाव कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है।
बरियारपुर पुलिस ने भागलपुर की ओर से मुंगेर आने वाले ट्रकों को नए फोरलेन मार्ग पर डायवर्ट करने के लिए जवानों की तैनाती की है। पुलिसकर्मी वाहन चालकों को नए रूट की जानकारी देकर उन्हें फोरलेन की ओर भेज रहे हैं।
हालांकि, इसके बावजूद कुछ भारी वाहन चालक पुराने मार्ग पर पहुंच जा रहे हैं। इसका सीधा असर रेलवे पुल के आसपास यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है और जाम लगातार लंबा होता जा रहा है।
यात्रियों को हो रही परेशानी
करीब 10 किलोमीटर तक फैले इस जाम के कारण बस और निजी वाहन से यात्रा करने वाले लोगों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई वाहन लंबे समय तक एक ही स्थान पर खड़े रहे, जबकि कुछ वाहन बेहद धीमी गति से आगे बढ़ सके।
फिलहाल पुलिस की टीमें यातायात को सामान्य करने और वाहनों का दबाव कम करने में जुटी हैं। प्रशासन की कोशिश है कि भारी वाहनों को वैकल्पिक फोरलेन मार्ग पर भेजकर रेलवे पुल और पुराने एनएच-80 पर दबाव कम किया जाए।