राम मंदिर चढ़ावा मामले में बड़ा खुलासा: चंपत राय और अनिल मिश्र आरोपी नहीं, चार्जशीट में अभियोजन पक्ष के गवाह
59 पन्नों के कवर पार्ट में 133 गवाहों का जिक्र; चढ़ावा गिनने वाले छह एजेंट समेत कुल आठ लोगों को बनाया गया आरोपी, जांच में सीसीटीवी से नकदी हटाने के 105 मामले सामने आने का दावा
अयोध्या। राम मंदिर में श्रद्धालुओं से प्राप्त चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित तौर पर हुई अनियमितताओं के मामले में दाखिल चार्जशीट से जांच की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है। दोनों को अभियोजन पक्ष का गवाह बनाया गया है। यानी जांच एजेंसी ने उनके बयानों और उनके कार्यकाल से जुड़ी जानकारी को मामले की जांच में साक्ष्य के तौर पर शामिल किया है।
विशेष न्यायाधीश, एंटी करप्शन कोर्ट, अयोध्या के समक्ष 23 सितंबर को दाखिल चार्जशीट के 59 पन्नों वाले कवर पार्ट में कुल 133 गवाहों का उल्लेख है। इनमें चंपत राय और अनिल मिश्र के अलावा ट्रस्ट के तत्कालीन अंतरिम महासचिव और शिकायतकर्ता कृष्ण मोहन तथा ट्रस्ट के पूर्व विशेष आमंत्रित सदस्य और विहिप पदाधिकारी गोपाल एम. नागकट्टे उर्फ गोपाल राव का नाम भी अभियोजन गवाहों में शामिल है।
छह काउंटिंग एजेंट समेत आठ आरोपी
जांच एजेंसी ने मामले में चढ़ावे की नकदी की गिनती से जुड़े छह लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें अविनाश शुक्ला उर्फ शनि, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र शामिल हैं। इनके अलावा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव को भी सह-आरोपी बनाया गया है।
जांच के मुताबिक, काउंटिंग एजेंटों की जिम्मेदारी श्रद्धालुओं से प्राप्त नकदी को छांटने और उसकी गिनती करने की थी। अभियोजन का आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान आरोपियों ने नकदी तक मिली पहुंच का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया और कुछ रकम को हटाने या छिपाने की कोशिश की। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में कुछ अन्य लोगों की भूमिका रही।
आखिर गवाह क्यों बने चंपत राय और अनिल मिश्र?
इस मामले में चंपत राय और अनिल मिश्र का नाम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि जांच के दौरान दोनों ट्रस्ट के अहम पदों पर थे और चढ़ावे के संग्रह, गिनती तथा बैंक में जमा होने की व्यवस्था से जुड़े सवालों पर उनसे पूछताछ हुई थी।
अनिल मिश्र से चढ़ावे को संभालने वाले कर्मचारियों और अन्य लोगों की भूमिका तथा जिम्मेदारियों के बारे में पूछताछ की गई थी। शुरुआती जांच के दौरान गठित पहली एसआईटी, जिसकी अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने की थी, की पड़ताल में भी उनका नाम सामने आया था।
वहीं, चंपत राय उस अवधि में ट्रस्ट के महासचिव थे, इसलिए जांचकर्ताओं ने उनसे भी चढ़ावा गिनने और उसके आगे बैंकिंग प्रक्रिया तक पहुंचने वाली व्यवस्था को लेकर जानकारी ली। दोनों से पूछताछ के बाद उनके बयान जांच का हिस्सा बनाए गए। बाद में दोनों ने ट्रस्ट में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। ट्रस्ट ने उनके इस्तीफे की घोषणा 27 जून को की थी।
जांचकर्ताओं के अनुसार, इन ट्रस्ट पदाधिकारियों के बयानों से यह समझने में मदद मिली कि श्रद्धालुओं से प्राप्त नकदी किस व्यवस्था के तहत जमा होती थी, उसकी गिनती कैसे की जाती थी और गिनती के बाद रकम बैंक तक किस प्रक्रिया से पहुंचती थी।
सीसीटीवी में दिखीं नकदी हटाने की 105 घटनाएं
मामले की जांच में सीसीटीवी फुटेज और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों को अहम आधार बनाया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, काउंटिंग रूम से नकदी को कथित तौर पर हटाने या छिपाने के 105 मामले सीसीटीवी विश्लेषण में सामने आए। इसके साथ ही जांच में बैंक खातों, संपत्ति लेन-देन, मोबाइल फोन डाटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी पड़ताल की गई।
जांच का फोकस केवल काउंटिंग रूम में नकदी की कथित हेराफेरी तक सीमित नहीं रहा। एजेंसी ने कथित रकम के आगे के इस्तेमाल और उसके वित्तीय लेन-देन से जुड़े सुरागों की भी जांच की। बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों के जरिए कथित धन के प्रवाह को समझने की कोशिश की गई।
किन धाराओं में दाखिल हुई चार्जशीट?
चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) के तहत आपराधिक विश्वासघात से जुड़ा आरोप लगाया गया है। इसके अलावा धारा 317(2) और 317(5) के तहत कथित अपराध से प्राप्त संपत्ति और उसे छिपाने से संबंधित प्रावधान लगाए गए हैं। धारा 61(2) के तहत आपराधिक साजिश का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
जांच रिकॉर्ड के मुताबिक, छह काउंटिंग एजेंटों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन की मंजूरी भी प्राप्त की गई है।
25 जून को एफआईआर, अगले दिन आठों गिरफ्तार
यह मामला ट्रस्ट से जुड़े कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ था। एफआईआर 25 जून को दर्ज की गई और इसके अगले दिन यानी 26 जून को सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल डाटा, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों को खंगाला गया।
जांच एजेंसी ने निर्धारित 90 दिनों की वैधानिक अवधि पूरी होने से पहले 23 सितंबर को चार्जशीट दाखिल कर दी। चार्जशीट में चंपत राय और अनिल मिश्र समेत कुल 133 गवाहों को शामिल किया गया है।
हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी अभियोजन पक्ष का मामला हैं। अदालत में इन आरोपों की सुनवाई और साक्ष्यों की न्यायिक जांच होनी बाकी है। किसी भी आरोपी को दोषी ठहराया नहीं गया है और मुकदमे के अंतिम निर्णय तक सभी आरोपियों को कानून के तहत निर्दोष माना जाता है।