कुर्सी पर बैठे थे अनिल यादव, बाइक से आए 3 शूटर; 14 राउंड फायरिंग के बाद भागे, CCTV ने खोला राज
पटना: राजधानी पटना के बुद्धा कॉलोनी इलाके में पूर्व वार्ड पार्षद और जन सुराज से जुड़े नेता अनिल कुमार यादव पर हुए जानलेवा हमले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वारदात की तस्वीर भी साफ होती जा रही है। बुधवार शाम चकारम इलाके में हुए इस हमले का CCTV फुटेज सामने आने के बाद पुलिस को हमलावरों के आने और भागने के तरीके की अहम जानकारी मिली है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, एक बाइक पर तीन शूटर पहुंचे थे। दो हमलावर बेसमेंट में गए, जबकि तीसरा बाहर रहा। इसके बाद अनिल यादव को बेहद करीब से निशाना बनाकर फायरिंग की गई।
14 राउंड फायरिंग, मौके से 8 खोखे
पुलिस जांच में घटनास्थल से 8 खोखे बरामद होने की जानकारी सामने आई है। वहीं कुछ रिपोर्टों में वारदात के दौरान करीब 14 राउंड फायरिंग की बात कही गई है। पुलिस और FSL टीम घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों की जांच कर रही है।
CCTV फुटेज में बाइक सवार तीन संदिग्ध दिखाई देते हैं। बाइक रुकने के बाद दो लोग बेसमेंट की ओर जाते हैं और कुछ ही देर में गोलीबारी शुरू हो जाती है। इसके बाद हमलावर हथियार लहराते हुए मौके से निकल जाते हैं। आसपास लगे दूसरे कैमरों की फुटेज से उनके भागने का रूट पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
अनिल यादव को लगीं 5 गोलियां
हमले में अनिल यादव गंभीर रूप से घायल हुए। ताजा रिपोर्टों में बताया गया है कि उन्हें पांच गोलियां लगीं—हाथ, पैर और कमर में चोटें आई हैं। पहले उन्हें बोरिंग रोड स्थित उदयन अस्पताल ले जाया गया, जहां से बाद में मेदांता अस्पताल रेफर किया गया। उपलब्ध ताजा रिपोर्ट के अनुसार उनकी स्थिति स्थिर बताई गई है और इलाज जारी है।
अनिल यादव वार्ड नंबर 24 की वर्तमान पार्षद ज्ञानवती देवी के पति हैं और खुद भी पूर्व पार्षद रह चुके हैं। वे जन सुराज से भी जुड़े हुए हैं।
गार्ड ने शूटरों पर फेंकी कुर्सी
वारदात के दौरान अनिल यादव के निजी सुरक्षा गार्ड भी वहां मौजूद थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, गार्ड ने हमलावरों को रोकने की कोशिश में उनकी तरफ कुर्सी फेंकी। इसके बावजूद हमलावर भागने में सफल रहे। रिपोर्ट के अनुसार, दो शूटरों ने चेहरे ढक रखे थे, जबकि तीसरे ने टोपी पहन रखी थी।
यह जानकारी पुलिस के लिए अहम हो सकती है, क्योंकि CCTV फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान को मिलाकर संदिग्धों की पहचान की कोशिश की जा रही है।
जमीन विवाद और वर्चस्व का एंगल भी जांच में
फिलहाल गोलीबारी के पीछे की वजह आधिकारिक तौर पर तय नहीं हुई है। पुलिस पुरानी दुश्मनी समेत कई संभावित कारणों की जांच कर रही है। ताजा रिपोर्टों में जमीन विवाद और आपसी वर्चस्व से जुड़े एंगल की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले इसे हमले की अंतिम वजह मानना सही नहीं होगा।
बेटे की हत्या के बाद अब पिता पर हमला
इस वारदात ने इसलिए भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं क्योंकि अनिल यादव के बेटे की भी कुछ समय पहले गोली मारकर हत्या किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। अब पुलिस यह भी देख रही है कि दोनों घटनाओं के बीच कोई आपसी संबंध है या नहीं। फिलहाल किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
FSL ने जुटाए साक्ष्य, पुलिस की कई टीमें जांच में
घटना की सूचना मिलते ही बुद्धा कॉलोनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल की जांच के साथ आसपास के CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगालना शुरू किया। FSL टीम ने भी घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कार्रवाई जारी है।
पुलिस के सामने अब तीन अहम सवाल हैं—हमलावर कौन थे, उन्हें अनिल यादव की मौजूदगी की जानकारी कैसे मिली और हमले के पीछे वास्तविक वजह क्या थी?
अस्पताल पहुंचे प्रशांत किशोर और तेजस्वी यादव
घटना की जानकारी मिलने के बाद जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर अस्पताल पहुंचे और अनिल यादव का हाल जाना। उन्होंने बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री सम्राट चौधरी से इस घटना को लेकर जवाब मांगते हुए तीखी राजनीतिक टिप्पणी की।
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी मेदांता अस्पताल पहुंचे और अनिल यादव के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनके बयान राजनीतिक आरोप हैं, जिनका स्वतंत्र सत्यापन अलग विषय है।
अब CCTV और तकनीकी जांच पर टिकी निगाहें
पटना के रिहायशी इलाके में हुई इस गोलीबारी के बाद पुलिस की जांच का सबसे अहम आधार CCTV फुटेज और घटनास्थल से मिले तकनीकी साक्ष्य हैं। तीन संदिग्धों की गतिविधियां कैमरे में कैद होने की बात सामने आई है। पुलिस उनके आने-जाने के पूरे रूट को ट्रेस करने में जुटी है।
फिलहाल हमलावर पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। ऐसे में जांच का अगला बड़ा पड़ाव संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी होगा। साथ ही यह भी साफ होना बाकी है कि आखिर अनिल यादव को निशाना बनाने के पीछे कौन-सी वजह थी।