कुछ घंटों के अंतराल में टूटी जिंदगी की डोर, एक साथ उठी अर्थियां तो रो पड़ा नगरी गांव; लोगों ने कहा- पेरू और मुद्रिका का प्रेम आखिरी सफर तक साथ रहा
जमुई
किसी ने सच ही कहा है— “प्रेम में देह नहीं, साथ मायने रखता है।” बिहार के जमुई जिले के चकाई प्रखंड का नगरी गांव इन दिनों इसी भाव को अपनी आंखों से देख रहा है। यहां 67 वर्षीय पेरू राणा और उनकी 57 वर्षीय पत्नी मुद्रिका देवी की जिंदगी का सफर जिस तरह शुरू हुआ था, उसका अंतिम पड़ाव भी साथ ही आया।
बुधवार को मधुमक्खियों के हमले में घायल हुए पति-पत्नी की कुछ घंटों के अंतराल में मौत हो गई। पहले पत्नी मुद्रिका देवी ने दम तोड़ा और गंभीर रूप से घायल पति पेरू राणा को इलाज के लिए देवघर ले जाया गया। वहां रात में इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई। गुरुवार को जब दोनों की अर्थियां एक साथ घर से निकलीं तो पूरा गांव गम में डूब गया।
जहां जाते, साथ जाते थे पेरू और मुद्रिका
नगरी गांव निवासी पेरू राणा और मुद्रिका देवी के बारे में ग्रामीण बताते हैं कि दोनों के बीच गहरा लगाव था। उम्र के इस पड़ाव पर भी दोनों अक्सर साथ ही नजर आते थे। बुधवार को भी दोनों घर के पास बहियार में मवेशियों को बांधने के लिए गए थे।
इसी दौरान अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने दोनों पर हमला कर दिया। देखते ही देखते दोनों मधुमक्खियों के डंक से गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की और इलाज के लिए ले जाया गया।
लेकिन हादसा परिवार के लिए ऐसी त्रासदी लेकर आया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। मुद्रिका देवी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल पेरू राणा को बेहतर इलाज के लिए देवघर रेफर किया गया। वहां इलाज के दौरान रात में उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
एक ही हादसे ने कुछ घंटों के भीतर परिवार से पति और पत्नी दोनों को छीन लिया।
एक साथ उठीं अर्थियां तो भर आईं पूरे गांव की आंखें
गुरुवार सुबह जब पेरू राणा और मुद्रिका देवी की अर्थियां उनके घर से एक साथ निकलीं तो माहौल बेहद भावुक हो गया। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था और ग्रामीण भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे।
बेंगलुरु में रह रहे उनके पुत्र प्रकाश शर्मा, मुकेश शर्मा और पवन शर्मा सूचना मिलने के बाद फ्लाइट से गुरुवार सुबह गांव पहुंचे। वहीं बड़े पुत्र फुलदेव शर्मा पहले से घर पर मौजूद थे।
परिवार और ग्रामीणों की मौजूदगी में दोनों की अर्थियां अंतिम यात्रा के लिए निकलीं। आगे पति की अर्थी और उसके पीछे पत्नी की अर्थी देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ दो लोगों की अंतिम यात्रा नहीं थी, बल्कि उस रिश्ते की आखिरी तस्वीर थी जिसे उन्होंने वर्षों तक साथ जीते देखा था।
एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार
दोनों का अंतिम संस्कार अजय नदी घाट पर पूरे विधि-विधान के साथ किया गया। पति-पत्नी को एक ही चिता पर अंतिम विदाई दी गई।
घाट तक पहुंचने के दौरान भी गांव में इसी बात की चर्चा रही कि पेरू और मुद्रिका ने जिंदगी के हर पड़ाव पर एक-दूसरे का साथ निभाया और संयोग देखिए कि अंतिम सफर भी साथ हुआ।
ग्रामीण दीपक शर्मा के मुताबिक, पेरू राणा और मुद्रिका देवी के बीच प्रेम और आपसी लगाव की चर्चा गांव में अक्सर होती थी। दोनों को लंबे समय से एक-दूसरे के साथ देखा जाता रहा था।
चार बेटों और तीन बेटियों के सिर से उठा माता-पिता का साया
पेरू राणा और मुद्रिका देवी के चार पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। माता-पिता की एक साथ मौत से पूरा परिवार सदमे में है। बच्चों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
नगरी गांव में भी मातम पसरा है। बुधवार तक जिस घर में परिवार और रोजमर्रा की जिंदगी की चहल-पहल थी, वहां गुरुवार को दो अर्थियां उठीं।
कविता की वह पंक्ति याद आती है— “मृत्यु से जीवन का अंत नहीं होता, प्रेम की स्मृति में इंसान जीवित रहता है।” पेरू राणा और मुद्रिका देवी की कहानी भी अब नगरी गांव की स्मृतियों का हिस्सा बन गई है—एक ऐसे दंपति की कहानी, जिन्होंने जिंदगी साथ बिताई और अंतिम सफर भी साथ तय किया।