Patna News: बिहार में ग्राम पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्थानीय स्तर पर राजस्व जुटाने पर जोर दिया है। सोमवार को पटना में आयोजित ‘ग्राम संसद, बिहार चैप्टर’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गरीबों पर नया कर नहीं लगाया जाएगा, लेकिन गांवों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों से पंचायतों को राजस्व प्राप्त करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने जिन गतिविधियों से टैक्स वसूली की बात कही, उनमें ईंट-भट्ठे, निजी स्कूल, अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान और मोबाइल टावर शामिल हैं। उनके अनुसार, पंचायतों की आय बढ़ने से स्थानीय स्तर पर कचरा प्रबंधन, पेयजल और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।
पंचायतों की कमाई बढ़ाने पर सरकार का फोकस
सम्राट चौधरी ने पंचायतों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर राजस्व के नए स्रोत विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि गांवों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों से मिलने वाला राजस्व पंचायतों के विकास कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसका उद्देश्य गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद व्यावसायिक गतिविधियों से पंचायतों की अपनी आय बढ़ाना बताया गया है।
मुखिया को पंचायत की ‘GDP’ का रिपोर्ट कार्ड देना चाहिए
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुखिया, प्रखंड प्रमुख और जिला परिषद को अपनी पंचायत के विकास और आर्थिक स्थिति का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए।
उन्होंने पंचायत स्तर पर मुखिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर विकास योजनाओं और प्रशासनिक कामकाज में पंचायत प्रतिनिधियों की बड़ी जिम्मेदारी होती है।
अगले पांच साल में एक लाख करोड़ से ज्यादा खर्च की बात
मुख्यमंत्री ने पंचायतों के विकास के लिए उपलब्ध होने वाली राशि का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, 16वें वित्त आयोग के तहत अगले पांच वर्षों में बिहार की पंचायतों को करीब 52 हजार करोड़ रुपये मिलने की बात है।
इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के तहत करीब 47 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध होने की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री के बताए आंकड़ों के मुताबिक, इन स्रोतों को मिलाकर अगले पांच वर्षों में पंचायतों के माध्यम से विकास कार्यों पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने की योजना है।
नए परिसीमन के आधार पर होंगे पंचायत चुनाव
मुख्यमंत्री ने पंचायतों के परिसीमन को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में पंचायतों की आबादी निर्धारित मानक से काफी अधिक है। उनके अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग ने परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर दी है और आगामी पंचायत चुनाव नए परिसीमन के आधार पर कराए जाएंगे।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों को बार-बार नगर निकायों में शामिल किए जाने की व्यवस्था पर भी रोक लगाने की बात कही, ताकि पंचायत स्तर पर चल रहे विकास कार्य प्रभावित न हों।
पंचायतों में बनेगा अलग इंजीनियरिंग सेल
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए मुख्यमंत्री ने पंचायती राज विभाग में अलग इंजीनियरिंग सेल बनाने का निर्देश देने की बात कही।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपनी-अपनी पंचायत में कम से कम 10 प्रमुख योजनाओं को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। इनमें स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र और लंबे समय से उपेक्षित सामुदायिक भवनों के जीर्णोद्धार जैसे काम शामिल करने की बात कही गई।
पंचायतों के लिए क्या मायने रखता है यह प्रस्ताव?
मुख्यमंत्री के बयान के मुताबिक, प्रस्तावित दिशा का मुख्य फोकस पंचायतों की अपनी आय बढ़ाना और स्थानीय विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना है। हालांकि, किसी भी कर या शुल्क की वास्तविक वसूली के लिए संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रावधान लागू होना जरूरी होगा।