Bihar Health News: 19 सितंबर 2026: बिहार के सरकारी अस्पतालों में इलाज और जांच व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) की अनुशंसा के आधार पर राज्य के अलग-अलग सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 792 ड्रेसर, 644 एक्स-रे टेक्निशियन और 24 फार्मासिस्टों की पदस्थापना की गई है।
नई पदस्थापनाओं से अस्पतालों में तकनीकी कर्मचारी की कमी दूर होने और मरीजों को जांच एवं उपचार संबंधी सेवाएं अधिक सुगमता से मिलने की उम्मीद है।
1460 तकनीकी कर्मियों की पदस्थापना
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कुल 1,460 नए तकनीकी कर्मियों को विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पदस्थापित किया गया है। इनमें 792 ड्रेसर, 644 एक्स-रे टेक्निशियन और 24 फार्मासिस्ट शामिल हैं।
ड्रेसर के 792 पदों पर नियुक्ति
792 ड्रेसर के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों में:
- 657 पुरुष
- 135 महिला
अभ्यर्थी शामिल हैं।
अस्पतालों में ड्रेसर की भूमिका मरीजों के उपचार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सेवाओं में होती है। नई पदस्थापना से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में ड्रेसिंग और संबंधित सेवाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलने की संभावना है।
644 एक्स-रे टेक्निशियन की पदस्थापना
स्वास्थ्य विभाग ने 644 एक्स-रे टेक्निशियन को भी अलग-अलग सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पदस्थापित किया है। इनमें:
- 511 पुरुष
- 135 महिला
अभ्यर्थी शामिल हैं।
एक्स-रे जांच अस्पतालों में बीमारी की पहचान और उपचार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। टेक्निशियनों की उपलब्धता बढ़ने से मरीजों को जांच की सुविधा उपलब्ध कराने में अस्पतालों की क्षमता बढ़ेगी।
फार्मासिस्टों की संख्या भी बढ़ी
इसके अलावा 24 फार्मासिस्टों की पदस्थापना की गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इससे पहले 846 फार्मासिस्टों की पदस्थापना की जा चुकी थी। इस प्रकार अब तक कुल 870 फार्मासिस्टों की पदस्थापना पूरी हो चुकी है।
मेडिकल कॉलेज से CHC तक मजबूत होगा तकनीकी स्टाफ
नई पदस्थापनाओं का असर राज्य के अलग-अलग स्तर के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर पड़ने की उम्मीद है। ड्रेसर और एक्स-रे टेक्निशियन की तैनाती मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों, जिला अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), रेफरल अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में की गई है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता बढ़ने से अस्पतालों में सेवाओं की गुणवत्ता और कार्यक्षमता में सुधार आएगा। खासतौर पर एक्स-रे जैसी जांच सुविधाओं को अधिक सुचारु तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।
पारदर्शी प्रक्रिया से तय हुई तैनाती, मेरिट का भी रखा गया ध्यान
स्वास्थ्य विभाग ने पदस्थापना प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सॉफ्टवेयर के माध्यम से रैंडमाइजेशन की प्रक्रिया अपनाई।
विभाग के अनुसार, दिव्यांग अभ्यर्थियों को यथासंभव उनके गृह जिले में पदस्थापित करने का प्रयास किया गया। वहीं महिला और पुरुष अभ्यर्थियों को उनकी मेरिट के अनुरूप निकटवर्ती जिलों के आसपास पदस्थापना देने का प्रयास किया गया है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य पदस्थापना में पारदर्शिता बनाए रखने के साथ-साथ अभ्यर्थियों को यथासंभव व्यावहारिक स्थान उपलब्ध कराना है।
एक महीने के भीतर करना होगा योगदान
नवपदस्थापित सभी ड्रेसर, एक्स-रे टेक्निशियन और फार्मासिस्टों को एक माह के भीतर संबंधित संस्थान में योगदान देने का निर्देश दिया गया है।
योगदान के समय उन्हें अपने सभी शैक्षणिक और अन्य आवश्यक मूल प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने होंगे। संबंधित संस्थान के अधीक्षक अथवा अधीक्षक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा मूल प्रमाण-पत्रों का अभिलेखों से मिलान कर सत्यापन किया जाएगा।
विभाग के निर्देश के अनुसार, प्रमाण-पत्रों की संबंधित निर्गत संस्थानों से जांच एवं सत्यापन की प्रक्रिया तीन माह के भीतर पूरी कर विभाग को रिपोर्ट करनी होगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने दी नवपदस्थापित कर्मियों को बधाई
स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने सभी नवपदस्थापित ड्रेसर, एक्स-रे टेक्निशियन और फार्मासिस्टों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में इन तकनीकी कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराकर आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि नवपदस्थापित सभी कर्मी पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
Bihar – मरीजों के लिए क्या बदलेगा?
सरकार की इस पहल का सीधा उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में मानव संसाधन की कमी को कम करना और जांच एवं उपचार से जुड़ी सेवाओं को मजबूत करना है। ड्रेसर, एक्स-रे टेक्निशियन और फार्मासिस्ट जैसे तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता बढ़ने से अस्पतालों की दैनिक कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित होने और मरीजों को समय पर जरूरी सेवाएं मिलने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, 1,460 तकनीकी कर्मियों की नई पदस्थापना बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में मानवबल बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है।