नालंदा से अविनाश पांडेय: अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल राजगीर विभिन्न धर्म का आध्यात्मिक केंद्र रहा है। मानवता से वशीभूत राजगीर की यह पावन धरती आज भी विश्व पटल पर सबसे पवित्र और ऐतिहासिक भूमियों में से एक है। राजगीर में मानवीय संस्कार का एक जीवंत उदाहरण देखने को मिला। राजगीर बस स्टैंड के समीप स्थित एक चाय की दुकान जहां के मलिक पिछले करीब 36 वर्षों से जरूरतमंद नवजात शिशुओं को मुफ्त में दूध उपलब्ध कराते हैं। नाम है श्रवण कुमार। हालांकि श्रवण जी अब नहीं रहे इस दुनिया में लेकिन, उनके भाई रंजीत कुमार उर्फ तुना बाबा इस परंपरा को आज भी कायम कर रखें हैं।
यहां चाय के साथ इंसानियत, करुणा और ममता की अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है। दुकान पर आने वाले जरूरतमंद परिवारों के नवजात और छोटे बच्चों को मुफ्त दूध उपलब्ध कराया जाता है। खास बात यह है कि यह सेवा बिना किसी प्रचार-प्रसार के लगातार जारी है।
इस मानवीय पहल की शुरुआत वर्ष 1990 में श्रवण कुमार ने की थी। बस स्टैंड पर आने वाली ऐसी माताओं को देखकर उन्होंने यह निर्णय लिया, जो आर्थिक तंगी के कारण अपने छोटे बच्चों के लिए दूध खरीदने में सक्षम नहीं थीं। उन्होंने तय किया कि उनकी दुकान पर यदि कोई जरूरतमंद मां अपने बच्चे के लिए दूध मांगने आएगी, तो उससे पैसे नहीं लिए जाएंगे।
समय बीतने के साथ श्रवण कुमार का निधन हो गया, लेकिन उनके द्वारा शुरू की गई सेवा बंद नहीं हुई। उनके भाई रंजीत कुमार उर्फ टुन्ना बाबा ने इस परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। आज यहां जन्म से 18 माह तक के बच्चों को मुफ्त दूध दिया जाता है।
टुन्ना बाबा के अनुसार प्रतिदिन करीब तीन से चार लीटर दूध जरूरतमंद बच्चों में बांटा जाता है। जिन्हें इस सेवा की जानकारी है, वे स्वयं दुकान पर पहुंचते हैं। कई बार जरूरतमंद परिवारों को देखकर टुन्ना बाबा खुद उन्हें बच्चे के लिए दूध लेने के लिए कहते हैं। उनका कहना है कि भाई की शुरू की गई सेवा को जारी रखना ही उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि है।
पुरुषोत्तम मास के दौरान राजगीर में लगने वाले मेले में इस सेवा का दायरा और बढ़ जाता है। अलग स्टॉल लगाकर प्रतिदिन करीब 10 लीटर दूध जरूरतमंद बच्चों को उपलब्ध कराया जाता है। नालंदा के अलावा देश के विभिन्न राज्यों और पड़ोसी नेपाल से आने वाले परिवार भी इस सेवा का लाभ उठा चुके हैं।
टुन्ना बाबा दूध लेने वाली माताओं से कहते हैं—“पहले इस नन्हे दोस्त को दूध पिलाइए, पैसे किसी जरूरी चीज के लिए रखिए।”
राजगीर की यह छोटी-सी चाय दुकान आज हजारों लोगों के लिए मानवता की बड़ी मिसाल बन चुकी है। यह कहानी बताती है कि सेवा के लिए बड़े संसाधन नहीं, बल्कि बड़ा दिल चाहिए।