पटना रेफर किए गए छात्र को एंबुलेंस में नहीं मिल पाई पर्याप्त ऑक्सीजन, परिजनों ने कर्मियों पर लगाया लापरवाही का आरोप
Jamui News: जमुई सदर अस्पताल में इलाज के बाद पटना रेफर किए गए 17 वर्षीय छात्र महेंद्र कुमार रजक की 102 एंबुलेंस में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस में पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं थी और इसी वजह से छात्र की हालत बिगड़ती चली गई।
घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने सदर अस्पताल में हंगामा किया और एंबुलेंस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मृतक की पहचान झाझा थाना क्षेत्र के फतेहपुर कानन गांव निवासी महावीर रजक के पुत्र महेंद्र कुमार रजक के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार महेंद्र को सांस लेने में परेशानी के बाद पहले झाझा स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था। वहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जमुई सदर अस्पताल लाया गया।
ऑक्सीजन लेवल 72, डॉक्टर ने किया था पटना रेफर
रिपोर्ट के मुताबिक सदर अस्पताल में जांच के दौरान छात्र का ऑक्सीजन लेवल 72 बताया गया। चिकित्सकों ने उसका उपचार शुरू किया, लेकिन हालत में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर उसे बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया गया।
इसके बाद परिजनों ने 102 एंबुलेंस को फोन किया। एंबुलेंस पहुंचने के बाद छात्र को उसमें बैठाया गया। परिजनों का कहना है कि इसी दौरान एंबुलेंस कर्मी ने वाहन में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने की बात कही और सिलेंडर लाने चला गया।
सिलेंडर लाने गया कर्मी, बिगड़ती गई छात्र की हालत
परिजनों के अनुसार एंबुलेंस में बची ऑक्सीजन से छात्र को किसी तरह ऑक्सीजन दी जा रही थी। उनका आरोप है कि ऑक्सीजन की जरूरत बढ़ने के बावजूद पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल सकी। इसी दौरान छात्र की सांस लेने में परेशानी बढ़ गई और उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी।
स्थिति गंभीर होने पर स्वजन उसे एंबुलेंस से उतारकर दोबारा सदर अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद छात्र को मृत घोषित कर दिया।
तीन महीने पहले सड़क हादसे में हुआ था घायल
परिजनों ने बताया कि करीब तीन महीने पहले झाझा थाना क्षेत्र के एकडारा चौक के पास सड़क दुर्घटना में महेंद्र गंभीर रूप से घायल हुआ था। उसके सिर में चोट लगी थी और पटना में उसका इलाज भी कराया गया था। बाद में उसकी स्थिति सामान्य होने पर वह घर लौट आया था।
रविवार की शाम अचानक सांस लेने में परेशानी होने के बाद परिजन उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे थे।
परिजनों ने एंबुलेंस कर्मियों पर लगाया लापरवाही का आरोप
छात्र की मौत के बाद परिजन काफी आक्रोशित हो गए और अस्पताल परिसर में एंबुलेंस कर्मियों के खिलाफ हंगामा किया। उनका आरोप है कि समय पर पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने के कारण महेंद्र की हालत बिगड़ी।
हालांकि, इस आरोप की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अस्पताल प्रशासन ने भी फिलहाल इसे जांच का विषय बताया है।
अस्पताल प्रशासन ने कहा- जांच जारी, दोषियों पर होगी कार्रवाई
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक मनीष कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में एंबुलेंस कर्मियों की लापरवाही सामने आती है तो दोषी कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल मृतक के परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है।
घटना के बाद सामने आए वीडियो और परिजनों के आरोपों ने जमुई सदर अस्पताल की रेफरल एवं एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि छात्र की मौत के पीछे वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था और एंबुलेंस सेवा में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं।