PMCH : सांस की नली से फेफड़ों तक जाने वाले रास्ते में फंस गई थी सीटी, पल्मोनरी, ईएनटी और एनेस्थीसिया टीम ने मिलकर किया सफल इलाज
पटना, 11 सितंबर 2026।
बच्चों की मासूम शरारत कब गंभीर मुसीबत में बदल जाए, इसका अंदाजा शायद ही किसी को होता है। पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में सामने आया एक मामला इसी का गंभीर उदाहरण है। सीटी बजाते समय एक 12 वर्षीय बच्चा गलती से सीटी को सांस के साथ अंदर खींच बैठा।
सीटी सांस की नली से होते हुए फेफड़ों तक जाने वाली सांस की एक नली में जाकर फंस गई। अचानक पैदा हुई इस स्थिति ने बच्चे और उसके परिवार की चिंता बढ़ा दी। लेकिन संकट की इस घड़ी में पीएमसीएच के चिकित्सकों ने जिस तत्परता, विशेषज्ञता और टीमवर्क का परिचय दिया, उसने बच्चे की जिंदगी बचा ली।
सीटी का सांस के रास्ते अंदर चले जाना सामान्य घटना नहीं थी। बाहरी वस्तु के सांस की नली में फंस जाने से सांस लेने में गंभीर परेशानी पैदा हो सकती थी और समय पर उपचार नहीं मिलने पर स्थिति जानलेवा भी हो सकती थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीएमसीएच की मेडिकल टीम ने बिना समय गंवाए बच्चे की जांच शुरू की और सीटी को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने के लिए ब्रोंकोस्कोपी करने का निर्णय लिया।
पल्मोनरी विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. साइमा एजाज के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया को अंजाम दिया। बच्चे की उम्र और सांस की नली में फंसी सीटी की स्थिति को देखते हुए पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी के साथ करनी थी। चिकित्सकों ने आधुनिक चिकित्सा तकनीक और अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए ब्रोंकोस्कोपी के माध्यम से सीटी को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।
ईएनटी ऑपरेशन थिएटर में चला जटिल इलाज
बच्चे की ब्रोंकोस्कोपी की प्रक्रिया पीएमसीएच के ईएनटी ऑपरेशन थिएटर नंबर-2 में की गई। इस दौरान पल्मोनरी विभाग की टीम के साथ जूनियर रेजिडेंट डॉ. आदित्य और डॉ. रोशन ने महत्वपूर्ण सहयोग किया। पूरी प्रक्रिया एचओडी प्रो. बीके चौधरी और वरिष्ठ शिक्षक डॉ. समरेंद्र झा के मार्गदर्शन में पूरी की गई।
चिकित्सकों के लिए चुनौती सिर्फ सीटी को बाहर निकालना नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी था कि सीटी निकालने के दौरान बच्चे की सांस और उसकी स्थिति सुरक्षित बनी रहे। ऐसे में पूरी टीम ने आपसी तालमेल के साथ काम किया और बेहद सावधानी से प्रक्रिया को सफल बनाया।
ईएनटी और एनेस्थीसिया टीम का भी रहा अहम योगदान
इस जटिल चिकित्सा प्रक्रिया में ईएनटी विभाग का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। ईएनटी विभाग की एचओडी प्रो. प्रीति शर्मा और उनकी पूरी टीम ने प्रक्रिया के दौरान आवश्यक सहयोग प्रदान किया। विभिन्न विशेषज्ञताओं के चिकित्सकों का एक साथ काम करना इस मामले में सफलता की अहम वजह बना।
वहीं, बच्चे को प्रक्रिया के दौरान सुरक्षित रखने में एनेस्थीसिया टीम की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। टीम ने बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी। एनेस्थीसिया टीम को प्रो. सुदामा का मार्गदर्शन मिला। पल्मोनरी, ईएनटी और एनेस्थीसिया विभाग के चिकित्सकों के बीच बेहतर समन्वय के कारण जटिल प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से पूरा किया जा सका।
समय पर इलाज ने टाली बड़ी अनहोनी
बच्चों में खेलते या किसी वस्तु का इस्तेमाल करते समय उसे गलती से सांस के रास्ते अंदर खींच लेने की घटनाएं गंभीर हो सकती हैं। यदि कोई वस्तु सांस की नली या फेफड़ों तक जाने वाली नली में फंस जाए तो सांस लेने में परेशानी के साथ-साथ फेफड़ों में संक्रमण और अन्य गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे मामलों में समय पर चिकित्सकीय सहायता बेहद जरूरी होती है।
इस मामले में भी समय पर बच्चे को अस्पताल पहुंचाया गया और विशेषज्ञ डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाया। ब्रोंकोस्कोपी के माध्यम से सीटी को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया। इससे बच्चे को बड़ी राहत मिली और उसके परिवार ने भी राहत की सांस ली।
डॉक्टरों की सूझबूझ और टीमवर्क बना बच्चे के लिए जीवनरक्षक
इस पूरे मामले में पीएमसीएच के चिकित्सकों की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ सीटी को निकालना नहीं, बल्कि संकट में फंसे एक बच्चे को सुरक्षित जीवन की ओर वापस लाना रही। डॉक्टरों की तत्परता, अनुभव और संवेदनशीलता ने परिवार की उम्मीद को टूटने नहीं दिया।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव ने इस सफल उपचार के लिए पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि गंभीर मामलों में अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पीएमसीएच में पल्मोनरी, ईएनटी और एनेस्थीसिया विभाग की संयुक्त टीम ने जिस तरह एकजुट होकर काम किया, वह अस्पताल की चिकित्सा क्षमता और टीम भावना को दर्शाता है।
यह घटना अभिभावकों के लिए भी सतर्क रहने का संदेश है। बच्चों को सीटी, खिलौने या ऐसी छोटी वस्तुओं से खेलते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, जिन्हें वे गलती से मुंह या सांस के रास्ते अंदर खींच सकते हैं।
वहीं, पीएमसीएच की इस पूरी टीम ने यह भी दिखाया कि मुश्किल वक्त में डॉक्टरों की तत्परता, अनुभव और आपसी सहयोग किसी परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद बन सकता है।
डॉ. साइमा एजाज के नेतृत्व में पल्मोनरी टीम, प्रो. बीके चौधरी और डॉ. समरेंद्र झा के मार्गदर्शन, प्रो. प्रीति शर्मा एवं ईएनटी टीम के सहयोग और प्रो. सुदामा के मार्गदर्शन में एनेस्थीसिया टीम की भूमिका ने इस जटिल मामले को सफल उपचार में बदल दिया।
12 वर्षीय बच्चे के लिए यह सिर्फ एक सफल इलाज नहीं, बल्कि उसके परिवार के लिए बड़ी राहत और पीएमसीएच के डॉक्टरों के समर्पण की एक मिसाल है।