सारण के दिघवारा के अकिलपुर में दूधिया गांव की घटना, ग्रामीणों ने घेरकर सूअर को मार डाला
दिघवारा (सारण): बाढ़ के पानी से घिरे सारण के दिघवारा के अकिलपुर पंचायत के दूधिया गांव में सोमवार की सुबह उस समय अफरातफरी मच गई, जब एक जंगली सूअर ने ग्रामीण प्रहलाद महतो पर हमला कर दिया। सूअर ने उन्हें काटकर घायल कर दिया।
बाढ़ के कारण पहले से घरों में दुबके ग्रामीणों के बीच जंगली जानवर के हमले से दहशत फैल गई। घायल प्रहलाद का उत्क्रमित मध्य विद्यालय परिसर में ग्रामीण चिकित्सक द्वारा उपचार किया जा रहा है।
खेत-खलिहान से गांव तक पहुंचा जंगली सूअर
ग्रामीणों के अनुसार, बाढ़ के कारण आसपास के खेत और निचले इलाकों में पानी भर गया है। ऐसे में जंगली जानवर सुरक्षित स्थान की तलाश में आबादी की ओर पहुंच रहे हैं। सोमवार की सुबह जंगली सूअर दूधिया गांव में पहुंच गया। इसी दौरान उसने प्रहलाद महतो पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से वह संभल नहीं सके और सूअर ने उन्हें काटकर घायल कर दिया।
घटना के बाद गांव में लोगों के बीच डर का माहौल बन गया। बाढ़ के पानी से घिरे इलाके में जंगली जानवर के पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने घेरकर सूअर को मार डाला
हमले की जानकारी मिलने के बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए। इसके बाद लोगों ने जंगली सूअर को घेर लिया। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने उसे मार डाला।
घटना के बाद गांव में लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर चिंता है कि बाढ़ के कारण आने वाले दिनों में दूसरे जंगली जानवर भी आबादी वाले इलाकों की तरफ आ सकते हैं।
बाढ़ के कारण बढ़ा जंगली जानवरों का खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि अकिलपुर पंचायत के कई इलाके इस समय बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। खेत और निचले हिस्सों में पानी भर जाने के कारण जंगली जानवरों के सुरक्षित जगह की तलाश में गांवों की ओर आने की आशंका बढ़ गई है।
बिहार के दूसरे बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी हाल के दिनों में जंगली सूअरों के आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने और लोगों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं। पटना के दानापुर दियारा क्षेत्र में भी बाढ़ के बीच जंगली सूअरों के हमलों की कई घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से सतर्कता बढ़ाने की मांग की
दूधिया गांव में हुई घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बाढ़ के बीच पहले ही आवागमन और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित है। ऐसे में जंगली जानवरों के आबादी में आने से खतरा और बढ़ गया है।