मानसून में कटाव से रेल परिचालन को खतरा रोकने की तैयारी, फरक्का में ट्रैक धंसने के बाद रेलवे ने बढ़ाई सतर्कता
भागलपुर। मानसून के दौरान गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे रेलवे ट्रैक, पुल और तटबंधों की सुरक्षा को लेकर रेलवे ने नई रणनीति तैयार की है। इन संवेदनशील स्थानों का अध्ययन अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) से कराने की योजना है। इसके साथ ही संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
रेलवे का मुख्य उद्देश्य बारिश और मानसून के बाद होने वाले मिट्टी के कटाव की सटीक पहचान और निगरानी करना है, ताकि समय रहते कमजोर स्थानों का पता लगाकर जरूरी कदम उठाए जा सकें। इससे ट्रैक, पुल और तटबंध को नुकसान से बचाने के साथ-साथ ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
फरक्का में ट्रैक धंसने से मची थी हलचल
बुधवार देर रात लगातार बारिश के बीच फरक्का बैराज के पास रेलवे तटबंध के अप और डाउन लाइनों के बीच पानी का रिसाव हुआ। इसके साथ ही पास के तालाब के प्रभाव से मिट्टी का भारी कटाव होने लगा, जिसके कारण अप रेलवे ट्रैक धंस गया।
हालांकि, मौके पर मानसून गश्त कर रहे रेलकर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। घटना की जानकारी मिलते ही यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया।
इसके बाद सुबह से ही क्षतिग्रस्त ट्रैक को दोबारा बहाल करने का काम शुरू कर दिया गया। पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडेय, प्रधान मुख्य इंजीनियर विक्रम गुप्ता और मालदा डीआरएम पूरे मामले पर लगातार निगरानी बनाए रहे।
400 कर्मचारी राहत कार्य में लगाए गए
पूर्व रेलवे के सीपीआरओ शिबराम माझी ने बताया कि ट्रैक को सुरक्षित तरीके से बहाल करने के लिए रेल पाइलिंग और स्टोन डस्ट पैकिंग का काम कराया जा रहा है। इसके लिए छह पाइलिंग रिग लगाए गए हैं और करीब 400 कर्मचारियों को काम में लगाया गया है।
काम में किसी तरह की बाधा या देरी न हो, इसके लिए भागलपुर और जमालपुर से मानसून के दौरान सुरक्षित रखे जाने वाले स्टोन डस्ट को मालगाड़ी के माध्यम से राहत कार्य के लिए भेजा गया।
AI से संवेदनशील इलाकों पर रखी जाएगी नजर
रेलवे अब सिर्फ मौजूदा नुकसान की मरम्मत तक सीमित नहीं रहना चाहता। गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे स्थित संवेदनशील रेल ट्रैक, पुल और तटबंधों की अतिरिक्त निगरानी के लिए AI आधारित तकनीक तैनात करने की योजना बनाई जा रही है।
इस तकनीक के जरिए मानसून के बाद मिट्टी के कटाव और संभावित कमजोर हिस्सों की पहचान में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे रेलवे को खतरे वाले स्थानों पर पहले से निगरानी और जरूरी सुरक्षा उपाय करने में सहायता मिलेगी।