बांकीपुर उपचुनाव में मिली हार के बाद राजद ( RJD) ने अपने संगठन को नए सिरे से मजबूत करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव से विचार-विमर्श करने के बाद तत्काल प्रभाव से राजद बिहार की प्रदेश से लेकर पंचायत स्तर की सभी सांगठनिक इकाइयों को भंग कर दिया है। इस संबंध में पार्टी की ओर से आधिकारिक आदेश भी जारी किया गया है। संगठन में बड़े बदलाव के तहत, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने यह फैसला लिया है। इसकी जानकारी एक चिट्ठी जारी करते हुए दी गई है।

बताया जा रहा है कि राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव नई टीम बनाएंगे और नए सिरे से आरजेडी को खड़ा करेंगे। राजद नेतृत्व का मानना है कि चुनावी हार के बाद संगठन में व्यापक बदलाव की जरूरत है। पार्टी अब प्रदेश से लेकर बूथ स्तर तक संगठन को नए सिरे से तैयार करना चाहती है, ताकि कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सके और आने वाले चुनावों में मजबूत रणनीति के साथ मैदान में उतरा जा सके।
बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों का हो सकता है असर
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों पर राजद विधायक भाई वीरेंद्र और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव के बीच जुबानी जंग से सियासत गरमाई हुई है। हाल ही में पटना शहर की बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में राजद की कैंडिडेट रेखा गुप्ता की जमानत जब्त हो गई थी, उन्हें महज 14 हजार वोट ही मिले थे। यह चुनाव जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने जीत लिया था और भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी।
RJD के भीतर देखने को मिला कलह
बता दें कि हाल के दिनों में पार्टी के भीतर मतभेद और बयानबाजी की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। बांकीपुर उपचुनाव में हार के बाद कई नेताओं ने संगठन और नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे आने के बाद आरजेडी में घमासान मच गया था। पार्टी के दो बड़े नेता भाई वीरेंद्र और शक्ति सिंह यादव आमने-सामने हो गए। दोनों के बीच तीखी तकरार देखने को मिली। मनेर विधायक भाई वीरेंद्र ने हार की वजह राजद की संगठनात्मक कमजोरी को बताया और तेजस्वी यादव के चंद करीबी नेताओं को आड़े हाथों ले लिया।
इसके जवाब में राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने भाई वीरेंद्र से पूछ लिया कि आपने किया ही क्या है। फिर भाई वीरेंद्र तमतमागए और शक्ति सिंह यादव को चुप रहने की नसीहत दे दी। उन्होंने शक्ति यादव से कहा कि ज्यादा बोलेंगे तो वह उनकी पूरी पोल भी खोल देंगे। यह बातें पार्टी के अंदर के मनमुटाव को दर्शा गया।
आगामी चुनावों की तैयारियों के लिए अहम फैसला
तेजस्वी यादव के इस फैसले को राजद के अंदर बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। पार्टी अब बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन को मजबूत करने की कोशिश करेगी। नई कमेटियों के बनने के बाद कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। हालांकि किसी भी पार्टी के लिए चुनावी हार के बाद संगठन में बदलाव करना असामान्य नहीं है। कई बार नेतृत्व नई ऊर्जा और नए चेहरों के साथ संगठन को मजबूत करने की कोशिश करता है। ऐसे में राजद का यह फैसला भी आगामी चुनावों की तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
फिलहाल राजद ने नई समितियों के गठन की तारीख या उसमें शामिल होने वाले नेताओं के नाम का ऐलान नहीं किया है। आने वाले दिनों में पार्टी नए संगठन की तस्वीर साफ कर सकती है। माना जा रहा है कि इस बार संगठन में युवाओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को अधिक जिम्मेदारी मिल सकती है।