रांची: झारखंड सरकार ने राज्य में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगाने का बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री Hemant Soren ने शुक्रवार को झारखंड मंत्रालय में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध शराब का कारोबार केवल सरकारी राजस्व को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि आम लोगों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनता है।
बैठक में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान विभाग की वित्तीय प्रगति, राजस्व संग्रह, भर्ती प्रक्रिया और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
राजस्व संग्रह में लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन
समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने निर्धारित 3,885.11 करोड़ रुपये के लक्ष्य से अधिक 4,013.53 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4,500 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया गया है। अधिकारियों के अनुसार जुलाई 2026 के मध्य तक विभाग 1,376 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह कर चुका है, जो वार्षिक लक्ष्य का 30.57 प्रतिशत है।
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ अवैध गतिविधियों पर भी समान रूप से सख्ती बरती जाए, ताकि राज्य को आर्थिक नुकसान न हो।
अवैध शराब निर्माण और तस्करी पर होगी कड़ी कार्रवाई
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में कहीं भी अवैध शराब का निर्माण, भंडारण, परिवहन या बिक्री बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की जाए और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि अवैध शराब से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं और कई बार जान-माल का नुकसान भी होता है। इसलिए इस समस्या को पूरी गंभीरता से लेना आवश्यक है।
583 उत्पाद सिपाहियों की नियुक्ति अंतिम चरण में
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग में रिक्त पदों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभाग की सभी रिक्तियों को जल्द से जल्द भरा जाए ताकि कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए। अधिकारियों ने जानकारी दी कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के माध्यम से चयनित 583 उत्पाद सिपाहियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होने से निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी, कानून का प्रभावी पालन होगा और विभागीय योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता बनाए रखने के निर्देश भी दिए।
मदिरा परिवहन में जीपीएस ट्रैकिंग और डिजिटल लॉक की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने विभाग को आधुनिक तकनीक अपनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य में मदिरा परिवहन करने वाले सभी वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और डिजिटल (डीजी) लॉक लगाए जाएं। इससे वाहनों की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी और उनके मार्ग, ठहराव तथा गंतव्य की सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध शराब की तस्करी तथा अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
नई मदिरा विनिर्माण नीति तैयार करने के निर्देश
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य के लिए नई मदिरा विनिर्माण नीति तैयार करने का निर्देश भी दिया। इसके साथ ही औद्योगिक अल्कोहल के विनियमन के लिए अलग नीति बनाने और लेबल पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी जोर दिया गया, ताकि लोकप्रिय ब्रांड्स की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके और उद्योगों को आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।
गोदाम निर्माण में स्थानीय आदिवासी समुदाय को मिलेगी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि राज्य के विभिन्न जिलों में उत्पाद विभाग के गोदाम निर्माण कार्यों में स्थानीय आदिवासी समुदाय को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही विभागीय गतिविधियों को जनहित और विकासोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने पर भी बल दिया गया।
स्पिरिट की मांग और उपयोग का होगा व्यापक अध्ययन
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य में मदिरा के अलावा स्पिरिट की खपत का व्यापक अध्ययन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान और भविष्य की मांग, औद्योगिक उपयोग तथा राजस्व वृद्धि की संभावनाओं का आकलन कर एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि राज्य को आर्थिक रूप से और अधिक लाभ मिल सके।
झारखंड सरकार की इस समीक्षा बैठक से स्पष्ट है कि राज्य सरकार अवैध शराब के कारोबार पर सख्त नियंत्रण, उत्पाद विभाग को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने, रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति, नई मदिरा नीति लागू करने और राजस्व संग्रह बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। यदि इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है, तो इससे न केवल अवैध शराब के नेटवर्क पर लगाम लगेगी बल्कि विभाग की कार्यक्षमता, पारदर्शिता और राज्य के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।