पटना सिटी: शरद पूर्णिमा के अवसर पर पटना सिटी के कंगन घाट पर श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। इस पर्व पर गंगा स्नान, दान-पुण्य, चंद्रमा की पूजा और चांदनी में खीर रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी चांदनी विशेष महत्व रखती है।
पटना साहिब क्षेत्र में स्थित कंगन घाट धार्मिक आस्था के साथ सिख इतिहास से भी जुड़ा है। बिहार पर्यटन विभाग के अनुसार, इसका संबंध सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के बाल्यकाल से जुड़ी परंपरा से है। यहां गोबिंद घाट गुरुद्वारा भी स्थित है।
25 अक्टूबर को चंद्र पूजा, 26 अक्टूबर को स्नान-दान
पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा की तिथि 25 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी। चंद्रमा की पूजा और चांदनी में खीर रखने की परंपरा के कारण पर्व 25 अक्टूबर की रात मनाया जा रहा है।
स्नान-दान का शुभ मुहूर्त: दैनिक जागरण में प्रकाशित पंचांग संबंधी जानकारी के अनुसार, 26 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:53 से 5:43 बजे तक है। इस दौरान स्नान और दान-पुण्य करना शुभ माना गया है। पटना में 25 अक्टूबर को चंद्रोदय का अनुमानित समय शाम 4:31 बजे बताया गया है। हालांकि, चंद्रमा दिखाई देने का वास्तविक समय मौसम और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

कंगन घाट का क्या है ऐतिहासिक महत्व?
स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार, बालक गोबिंद राय से जुड़ी एक कथा में स्वर्ण कंगन गंगा में फेंकने का प्रसंग आता है। इसी कथा से घाट का नाम कंगन घाट पड़ने की मान्यता जुड़ी है। यह स्थान पटना साहिब की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। बिहार पर्यटन विभाग के विवरण के मुताबिक, गंगा की धारा अब पुराने स्थल के ठीक पास से नहीं बहती।
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा और लक्ष्मी पूजा क्यों?
शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा, कौमुदी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान होती हैं। इसी विश्वास के चलते दूध और चावल से बनी खीर को चांदनी में रखने और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है। हालांकि, चांदनी से खीर में औषधीय गुण आने का कोई प्रमाणित वैज्ञानिक आधार नहीं है।
इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। मान्यता है कि कोजागरी पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी जागरण करने वाले भक्तों पर कृपा करती हैं। वैष्णव परंपरा में इस पूर्णिमा को भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला से भी जोड़ा जाता है।
चंद्रमा की पूजा कैसे करें?
शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद जल से अर्घ्य दें और पुष्प-अक्षत अर्पित कर सुख-शांति की कामना करें। घर में माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा कर फल, मिठाई और खीर का भोग लगाया जा सकता है। खीर को चांदनी में रखते समय धूल और कीड़ों से बचाने के लिए साफ जाली या सुरक्षित ढक्कन का इस्तेमाल करें। दूध से बनी खीर को लंबे समय तक असुरक्षित तापमान पर रखने से बचें।

शरद पूर्णिमा पर विशेष योग
दैनिक जागरण में प्रकाशित पंचांग के अनुसार, सर्वार्थ सिद्धि योग 25 अक्टूबर की शाम 7:22 बजे से 26 अक्टूबर की सुबह 6:34 बजे तक बताया गया है। हर्षण योग 25 अक्टूबर को शाम 5:22 बजे तक रहने का उल्लेख है। मुहूर्त की गणना में स्थान और पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है।
शरद पूर्णिमा पर गंगा स्नान, दान-पुण्य, चंद्र दर्शन और लक्ष्मी पूजन की परंपराएं निभाई जाती हैं। कंगन घाट पर श्रद्धालुओं के लिए यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ पटना की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ने का अवसर भी है।
सावधानी: गंगा में स्नान करते समय पानी की गहराई और बहाव का ध्यान रखें। निर्धारित सुरक्षित स्थान पर ही उतरें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
