भरतपुर में खनन, रास्ते और क्रशर दोबारा शुरू करने को लेकर लंबे समय से चल रहा था विवाद; लाठी-डंडों और पत्थरों से हमले में पूर्व विधायक और उनके सहयोगी घायल, जयपुर के SMS अस्पताल में इलाज के दौरान भड़ाना की मौत; कांग्रेस ने भजनलाल सरकार की कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
राजस्थान के भरतपुर जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की एक हिंसक हमले के बाद मौत हो गई। रविवार, 11 अक्टूबर की शाम भौंडा गांव में स्थित क्रशर प्लांट को लेकर चल रहा विवाद अचानक हिंसक हो गया। खबरों के मुताबिक, करीब 70 से 80 लोगों की भीड़ ने प्लांट पर हमला किया।
इस दौरान भड़ाना और उनके सहयोगी गगन शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया। भड़ाना को बेहतर इलाज के लिए जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
इस घटना ने भरतपुर क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। विवाद की पृष्ठभूमि में क्रशर प्लांट को दोबारा शुरू करने, खनन से जुड़े अधिकारों और रास्ते के इस्तेमाल को लेकर स्थानीय ग्रामीणों तथा भड़ाना के बीच लंबे समय से चल रहा टकराव बताया जा रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। हमले में शामिल लोगों और घटना के पूरे घटनाक्रम की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

70-80 लोगों ने किया हमला, लाठी-डंडों और पत्थरों का इस्तेमाल
घटना भरतपुर जिले के वैर थाना क्षेत्र के भौंडा गांव में हुई। रिपोर्टों के अनुसार, रविवार देर शाम अतर सिंह भड़ाना अपने क्रशर प्लांट पर पहुंचे थे। इसी दौरान वहां मौजूद लोगों के साथ उनका टकराव हो गया। देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।
आरोप है कि हमलावरों ने भड़ाना और उनके सहयोगी गगन शर्मा पर लाठी-डंडों तथा ईंट-पत्थरों से हमला किया। दोनों को गंभीर चोटें आईं। उन्हें पहले वैर के अस्पताल ले जाया गया। बाद में भड़ाना को जयपुर के SMS अस्पताल भेजा गया, जबकि गगन शर्मा को भरतपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया।
SMS अस्पताल में इलाज के दौरान भड़ाना की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई और मामले की जांच शुरू की। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने और अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी किए जाने की भी खबरें सामने आई हैं।
रास्ते और क्रशर प्लांट को लेकर क्या था विवाद?
इस घटना की पृष्ठभूमि में खनन पट्टे और क्रशर प्लांट के संचालन को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद है। भड़ाना और स्थानीय ग्रामीणों के बीच प्लांट को दोबारा शुरू करने तथा वहां तक पहुंचने के रास्ते को लेकर तनाव बना हुआ था।

रिपोर्टों के मुताबिक, ग्रामीण पिछले कई दिनों से प्लांट के दोबारा संचालन के विरोध में धरने पर बैठे थे। ग्रामीणों ने जमीन पर अतिक्रमण और अवैध खनन के आरोप भी लगाए थे। दूसरी ओर, भड़ाना से जुड़े पक्ष और ग्रामीणों के बीच विवाद बढ़ता गया। बताया गया है कि रविवार को भड़ाना अपनी पत्नी और सहयोगियों के साथ क्रशर प्लांट पहुंचे थे, जहां स्थिति बिगड़ गई।
कुछ रिपोर्टों में विवाद को करीब दो साल से चला आ रहा बताया गया है। हालांकि, जमीन, खनन और रास्ते से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।
पत्नी ने गोली मारे जाने और पुलिस की देरी का लगाया आरोप
भड़ाना की पत्नी ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान उनके पति को गोली भी मारी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना की सूचना दिए जाने के बावजूद पुलिस मौके पर देर से पहुंची।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। उपलब्ध शुरुआती रिपोर्टों में भड़ाना की मौत का कारण गंभीर चोटों के बाद अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मृत्यु बताया गया है। गोली लगने के दावे को चिकित्सकीय या आधिकारिक पुष्टि के बिना स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

पुलिस इस मामले में हमले की परिस्थितियों, इसमें शामिल लोगों और घटना से पहले हुए विवाद की जांच कर रही है।
कौन थे अतर सिंह भड़ाना?
अतर सिंह भड़ाना मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले थे। वह राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी के नेता रहे और भरतपुर क्षेत्र की बयाना विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। उन्होंने वर्ष 2003 में विधानसभा चुनाव जीता था और वर्ष 2008 तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया।
भड़ाना BJP किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके थे। उनकी राजनीतिक पहचान के कारण इस घटना ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी ध्यान खींचा है।
कांग्रेस ने भजनलाल सरकार को घेरा
पूर्व विधायक की मौत के बाद राजस्थान कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने घटना को गंभीर बताते हुए कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले में भाजपा के पूर्व विधायक की हत्या होना चिंताजनक है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार का कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण कमजोर पड़ गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा के पूर्व विधायक को सुरक्षा और समय पर पुलिस सहायता नहीं मिल पा रही है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या हाल होगा।
ये कांग्रेस नेताओं की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हैं। घटना में पुलिस की भूमिका, सूचना मिलने के बाद उसकी कार्रवाई और सुरक्षा संबंधी किसी चूक का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि खनन और रास्ते को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद हिंसक हमले तक कैसे पहुंचा। अब पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटना के समय वास्तव में क्या हुआ, हमले में कौन-कौन शामिल था और पहले से चल रहे विवाद को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए थे।
