लेबल पर दूसरे प्रतिष्ठान का पता और लाइसेंस नंबर मिलने का खुलासा, मनोहरपुर में 2,400 लीटर पानी नष्ट, बरी पहाड़ी, बेउर और संपतचक में भी खाद्य विभाग की कार्रवाई
पटना। Patna Fake Bisleri Water का मामला सामने आने के बाद बोतलबंद पानी की गुणवत्ता और उसकी पहचान को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। पटना में खाद्य संरक्षा विभाग की जांच में एक प्रतिष्ठान पर बिसलेरी के नाम से डुप्लीकेट पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर मिला। जांच के दौरान बोतलों पर किसी दूसरे प्रतिष्ठान का पता और दूसरे फर्म का लाइसेंस नंबर अंकित पाया गया। इस खुलासे के बाद खाद्य विभाग ने पटना के चार प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करते हुए विभिन्न ब्रांडों के हजारों बोतल पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर जब्त कर नष्ट किए। मनोहरपुर-कचुआरा में 2,400 लीटर पानी नष्ट किया गया, जबकि बरी पहाड़ी में बिसलेरी की 15,168 बोतलों पर कार्रवाई हुई। बेउर और संपतचक में भी बड़ी मात्रा में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर जब्त किया गया। इस कार्रवाई ने बाजार में बिकने वाले बोतलबंद पानी की लेबलिंग, लाइसेंस और गुणवत्ता की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
खाद्य संरक्षा, स्वास्थ्य विभाग बिहार सरकार की ओर से 2 नवंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पटना में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के उत्पादन, भंडारण और बिक्री से जुड़े प्रतिष्ठानों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत एस. हाइड्रेला, मां एंटरप्राइजेज, आदित्य एंटरप्राइजेज और कृष्णा एंटरप्राइजेज का निरीक्षण किया गया। कार्रवाई के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों से पानी के नमूने भी जांच के लिए संग्रहित किए गए।
Patna Fake Bisleri Water Case: मनोहरपुर में 2,400 लीटर पानी जब्त कर नष्ट
पटना के मनोहरपुर-कचुआरा स्थित एस. हाइड्रेला में जांच के दौरान बिसलेरी के नाम से डुप्लीकेट पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर पाया गया। खाद्य विभाग के अनुसार, उत्पादों की लेबलिंग में गंभीर अनियमितताएं थीं। बोतलों पर अंकित पता किसी दूसरे प्रतिष्ठान का था और लाइसेंस नंबर भी दूसरी फर्म का मिला।

कार्रवाई के दौरान 1 लीटर की 1,500 लीटर और 500 मिलीलीटर की 900 लीटर सामग्री जब्त कर नष्ट की गई। इस तरह कुल 2,400 लीटर पानी पर कार्रवाई हुई। निरीक्षण में प्रतिष्ठान की साफ-सफाई में कमी, कर्मचारियों के मेडिकल सर्टिफिकेट का अभाव और उत्पादन क्षेत्र में कर्मचारियों के लिए निर्धारित यूनिफॉर्म की व्यवस्था नहीं होने जैसी कमियां भी मिलीं।
इन अनियमितताओं के आधार पर खाद्य संरक्षा विभाग ने एस. हाइड्रेला का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया। प्रतिष्ठान से पानी का नमूना भी जांच के लिए लिया गया।
मां एंटरप्राइजेज से बिसलेरी की 15,168 बोतलों पर कार्रवाई
पटना के बरी पहाड़ी स्थित मां एंटरप्राइजेज में खाद्य विभाग की टीम ने बिसलेरी पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की बड़ी खेप जब्त कर नष्ट की। विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार, यहां 1 लीटर की 4,800 बोतलें और 500 मिलीलीटर की 10,368 बोतलें कार्रवाई के दायरे में आईं। इस प्रकार कुल 15,168 बोतलों पर कार्रवाई की गई।
इसके अलावा जांच के लिए 1 लीटर की 905 बोतलें और 500 मिलीलीटर की 9,216 बोतलों के नमूने संग्रहित किए गए। विभाग की इस कार्रवाई में जब्ती और नमूना संग्रह दोनों प्रक्रियाएं शामिल रहीं।

बेउर में विभिन्न ब्रांडों के पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर पर कार्रवाई
पटना के बेउर थाना क्षेत्र स्थित आदित्य एंटरप्राइजेज में भी खाद्य संरक्षा विभाग ने कार्रवाई की। यहां बिसलेरी 500 मिलीलीटर की 22,200 रुपये मूल्य की सामग्री, सुहर बिसलेरी 500 मिलीलीटर की 42,000 रुपये मूल्य की सामग्री, आदित्य बिसलेरी 1 लीटर की 34,560 रुपये मूल्य की सामग्री और न्यूट्रीएंट्रल की 60,900 रुपये मूल्य की सामग्री जब्त कर नष्ट की गई।
प्रतिष्ठान से पानी का नमूना भी लिया गया। इसके अलावा विभाग ने पाई गई अनियमितताओं को दूर करने के लिए 14 दिनों का सुधार नोटिस जारी किया।
संपतचक में 1.05 लाख रुपये का पैकेज्ड वाटर जब्त
पटना के संपतचक स्थित सोनागोपालपुर में कृष्णा एंटरप्राइजेज के निरीक्षण के दौरान भी खाद्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की। यहां बिसलेरी, संजीवनी और न्यूट्री ड्रॉप ब्रांड के पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की खेप जब्त कर नष्ट की गई।
विभाग के अनुसार, बिसलेरी 1 लीटर की 2,338 बोतलों का मूल्य 46,760 रुपये, संजीवनी 250 मिलीलीटर की 9,240 बोतलों का मूल्य 55,440 रुपये और न्यूट्री ड्रॉप 950 मिलीलीटर की 500 बोतलों का मूल्य 3,000 रुपये था। इस प्रकार कुल 1,05,200 रुपये मूल्य की सामग्री जब्त कर नष्ट की गई।

नकली बिसलेरी और पैकेज्ड वाटर पर कार्रवाई से उपभोक्ताओं के सामने बड़ा सवाल
पटना में नकली बिसलेरी और विभिन्न ब्रांडों के पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर पर हुई कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उत्पादों की पहचान और लेबलिंग है। उपभोक्ता आमतौर पर बोतल पर लिखे ब्रांड के नाम को देखकर पानी खरीदते हैं, लेकिन उत्पाद पर निर्माता या पैकर का पता और लाइसेंस संबंधी जानकारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
खासकर यात्रा, अस्पताल, स्कूल, दफ्तर और सार्वजनिक स्थानों पर बोतलबंद पानी का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए यह मामला चिंता का विषय है। उपभोक्ताओं को पानी की बोतल खरीदते समय उसकी सील, निर्माता या पैकर का नाम-पता, FSSAI लाइसेंस नंबर और बैच संबंधी जानकारी जरूर देखनी चाहिए। हालांकि, केवल लेबल देखकर पानी की वास्तविक गुणवत्ता की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए निर्धारित मानकों के अनुसार जांच जरूरी है।
खाद्य संरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि पेयजल की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत अनियमितता करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
अब इस अभियान की अगली महत्वपूर्ण कड़ी जब्त पानी के नमूनों की जांच और उसके नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। साथ ही बाजार में बिकने वाले पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की नियमित निगरानी भी जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं को ब्रांड के नाम पर संदिग्ध उत्पाद न बेचे जा सकें।

