अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने 2028 में अंतरिक्ष यात्रियों को फिर से चंद्रमा की सतह पर उतारने का लक्ष्य दोहराया है। एजेंसी के ताजा कार्यक्रम के अनुसार, यह ऐतिहासिक प्रयास Artemis IV मिशन के तहत किया जाएगा। NASA चंद्र लैंडर के विकास में तेजी ला रही है और इसके लिए SpaceX तथा Blue Origin, दोनों कंपनियों के साथ काम कर रही है। हालांकि, अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-सा लैंडर सुरक्षा और तकनीकी परीक्षणों के लिए पहले तैयार होता है।
2028 में चंद्रमा पर वापसी की योजना
NASA प्रशासक Jared Isaacman ने कहा है कि एजेंसी चंद्रमा पर अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी के लिए तकनीकी आवश्यकताओं और कार्ययोजना को तेज कर रही है। लक्ष्य केवल सतह पर पहुंचना नहीं, बल्कि भविष्य में चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानवीय मौजूदगी की नींव तैयार करना भी है। शुरुआती मिशनों में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के आसपास अन्वेषण पर जोर रहेगा।
NASA की योजना में Space Launch System (SLS) रॉकेट अंतरिक्ष यात्रियों को Orion अंतरिक्षयान में पृथ्वी से रवाना करेगा। चंद्रमा की यात्रा के दौरान Orion का वाणिज्यिक मानव-लैंडर से मिलन और डॉकिंग होगी। इसके बाद दो अंतरिक्ष यात्री लैंडर से चंद्र सतह पर उतरेंगे, जबकि दो अन्य Orion में रहेंगे। सतह पर अभियान पूरा होने के बाद चालक दल Orion में लौटेगा और पृथ्वी की ओर वापसी करेगा।
Artemis III पहले करेगा जरूरी परीक्षण
2028 के लक्ष्य से पहले Artemis III मिशन को 2027 में पृथ्वी की निचली कक्षा में परीक्षण मिशन के रूप में आयोजित करने की योजना है। इसमें Orion और वाणिज्यिक लैंडर प्रणालियों के बीच मिलन, डॉकिंग तथा संचालन संबंधी प्रक्रियाओं का परीक्षण किया जाएगा। इस चरण का उद्देश्य वास्तविक चंद्र अवतरण से पहले तकनीकी जोखिम कम करना है।

NASA ने कहा है कि चालक दल को चंद्रमा पर भेजने से पहले दोनों कंपनियों को अपने लैंडर का बिना चालक दल वाला प्रदर्शन मिशन पूरा करना होगा। एजेंसी सुरक्षा और मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए प्रणालियों का प्रमाणीकरण भी करेगी। इसलिए 2028 की तारीख एक आधिकारिक लक्ष्य है, इसकी गारंटी नहीं; परीक्षणों और हार्डवेयर की तैयारी के अनुसार कार्यक्रम में बदलाव संभव है।
SpaceX और Blue Origin के अलग-अलग रास्ते
SpaceX अपने Starship मानव-लैंडर के लिए पृथ्वी की निचली कक्षा में ईंधन जुटाने और स्थानांतरित करने की योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित प्रक्रिया में कई Starship उड़ानों के जरिए ईंधन को कक्षा में एक डिपो तक पहुंचाया जाएगा। फिर लैंडर Orion से जुड़ेगा और चंद्र कक्षा तक यात्रा करेगा। इस व्यवस्था की सफलता के लिए ईंधन हस्तांतरण और कई अन्य जटिल प्रणालियों का प्रदर्शन जरूरी होगा।
Blue Origin अपने Blue Moon Mark 2 लैंडर के लिए अलग वास्तुकला विकसित कर रही है। NASA के अद्यतन विवरण के मुताबिक, 2028 के लक्षित मिशन के लिए कंपनी कई स्थानांतरण चरणों का उपयोग करेगी, ताकि लैंडर को चंद्रमा तक पहुंचाया जा सके। दोनों कंपनियों के डिजाइन और संचालन की योजना अलग है, लेकिन दोनों का लक्ष्य चालक दल को सुरक्षित रूप से चंद्र सतह तक ले जाना और वापस लाना है।
NASA ने अभी यह अंतिम निर्णय नहीं किया है कि 2028 में पहला चालक दल किस कंपनी के लैंडर से उतरेगा। चयन विकास की प्रगति, प्रदर्शन परीक्षणों और सुरक्षा मानकों को पूरा करने पर निर्भर करेगा। एजेंसी दोनों विकल्पों पर काम जारी रखकर समय-सारिणी के जोखिम को कम करना चाहती है।

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर क्यों है ध्यान?
Artemis कार्यक्रम चंद्रमा के उन क्षेत्रों का अध्ययन करना चाहता है जिन्हें पहले मानव अभियानों ने विस्तार से नहीं खोजा। दक्षिणी ध्रुव वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहां स्थायी छाया वाले क्षेत्रों में पानी की बर्फ मौजूद होने की संभावना है। ऐसी बर्फ भविष्य में जीवन-समर्थन प्रणालियों और संसाधन उपयोग से जुड़े शोध के लिए उपयोगी हो सकती है, हालांकि उसकी उपलब्धता, मात्रा और इस्तेमाल की व्यवहार्यता को लेकर अध्ययन जारी रहेंगे।
शुरुआती सतह अभियानों में अंतरिक्ष यात्री चंद्र नमूने एकत्र करेंगे, भूविज्ञान का अध्ययन करेंगे और स्पेससूट सहित सतह पर काम करने वाली प्रणालियों का परीक्षण करेंगे। NASA की दीर्घकालिक योजना में नियमित चंद्र अभियानों और वहां टिकाऊ मानवीय उपस्थिति की दिशा में आगे बढ़ना शामिल है।
क्या 2028 का लक्ष्य हासिल हो पाएगा?
लक्ष्य की सफलता कई कठिन तकनीकी चरणों पर निर्भर करती है—लैंडर का विकास, प्रणोदन और ईंधन प्रबंधन, Orion के साथ डॉकिंग, जीवन-समर्थन प्रणालियां, स्पेससूट और चालक दल की सुरक्षा। किसी एक प्रमुख प्रणाली में देरी पूरी समय-सारिणी को प्रभावित कर सकती है। इसीलिए 2027 का परीक्षण मिशन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
NASA का नया रोडमैप चंद्रमा पर वापसी की तैयारी में तेजी का संकेत देता है, लेकिन वास्तविक उपलब्धि तभी मानी जाएगी जब लैंडर सभी परीक्षणों में सफल हो और अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से सतह पर उतारकर वापस लाए। 2028 का लक्ष्य अंतरिक्ष अन्वेषण में एक बड़ा पड़ाव हो सकता है; फिलहाल यह एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसकी प्रगति आने वाले परीक्षणों से स्पष्ट होगी।

