नालंदा में दिव्यांगजनों को सहायक उपकरणों के इस्तेमाल में आने वाली तकनीकी परेशानियों से राहत दिलाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से विशेष पहल की गई। मुख्यमंत्री दिव्यांगजन सशक्तिकरण छत्र योजना (SAMBAL) के अंतर्गत जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण कोषांग में मंगलवार को विशेष तकनीकी मरम्मती शिविर लगाया गया। शिविर में बिहारशरीफ अनुमंडल के विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे लाभुकों की बैट्री चालित ट्राईसाईकिल और अन्य सहायक उपकरणों की तकनीकी जांच की गई। इस दौरान कुल 13 दिव्यांगजनों की बैट्री चालित ट्राईसाईकिल की आवश्यक तकनीकी मरम्मत की गई।
प्रशासन की इस पहल का सीधा उद्देश्य दिव्यांग लाभुकों को उनके रोजमर्रा के आवागमन में आने वाली तकनीकी बाधाओं से राहत देना है। बैट्री चालित ट्राईसाईकिल जैसे उपकरण दिव्यांगजनों के लिए केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, बाजार, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक गतिविधियों तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। ऐसे में उपकरण खराब होने पर उसका समय पर ठीक होना उनकी दैनिक जिंदगी को सामान्य बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हो जाता है।
हर तीन महीने में आयोजित किया जाता है तकनीकी मरम्मती शिविर
जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण कोषांग की वरीय उप समाहर्ता-सह-सहायक निदेशक सुश्री प्राची रिया ने बताया कि दिव्यांगजनों को बैट्री चालित तीन पहिया साइकिल और अन्य सहायक उपकरणों के इस्तेमाल में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए हर तीन महीने पर तकनीकी मरम्मती शिविर आयोजित किया जाता है।
इस व्यवस्था का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि बैट्री चालित ट्राईसाईकिल लगातार इस्तेमाल होने वाला उपकरण है। बैट्री, मोटर, वायरिंग, चार्जिंग सिस्टम, ब्रेक और अन्य तकनीकी हिस्सों में खराबी आने पर लाभुक के लिए उसे सामान्य तरीके से इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है। कई बार आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण लाभुक निजी स्तर पर इसकी मरम्मत कराने में भी सक्षम नहीं होते।

ऐसे में जिला स्तर पर आयोजित तकनीकी शिविर उन्हें निर्धारित अंतराल पर मरम्मत और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने का माध्यम बनता है।
13 ट्राईसाईकिल की हुई तकनीकी मरम्मत
06 अक्टूबर को आयोजित विशेष शिविर में बिहारशरीफ अनुमंडल के विभिन्न प्रखंडों से आए दिव्यांग लाभुकों की बैट्री चालित ट्राईसाईकिल और सहायक उपकरणों की तकनीकी जांच की गई।
शिविर में कुल 13 बैट्री चालित ट्राईसाईकिल की तकनीकी मरम्मत की गई। आवश्यक तकनीकी जांच के बाद उपकरणों में मौजूद खराबियों को दूर किया गया, जिससे लाभुक दोबारा अपने ट्राईसाईकिल का इस्तेमाल सुचारू रूप से कर सकेंगे।
मरम्मत के बाद इन लाभुकों के लिए सबसे बड़ा फायदा आवागमन में दिखाई देगा। घर से बाहर निकलने, जरूरी सामान खरीदने, सरकारी या निजी संस्थानों तक पहुंचने, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए आने-जाने और दूसरे दैनिक कार्यों में उन्हें अधिक सुविधा मिलेगी।

ट्राईसाईकिल दिव्यांगजनों के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
बैट्री चालित ट्राईसाईकिल दिव्यांगजनों की गतिशीलता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण सहायक उपकरण है। खासकर ऐसे लोग जो शारीरिक कारणों से सामान्य साइकिल या पैदल चलने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए यह उपकरण स्वतंत्र रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने का साधन बन सकता है।
आवागमन की सुविधा सीधे तौर पर दिव्यांग व्यक्ति की आत्मनिर्भरता से जुड़ी होती है। यदि किसी व्यक्ति को हर छोटे काम के लिए परिवार के सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति पर निर्भर रहना पड़े तो उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित होती है। इसके विपरीत, यदि उसके पास काम करने योग्य बैट्री चालित ट्राईसाईकिल है तो वह कई जरूरी कार्य स्वयं कर सकता है।
इसलिए ट्राईसाईकिल उपलब्ध कराने के साथ-साथ उसकी नियमित तकनीकी मरम्मत की व्यवस्था भी दिव्यांगजन सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मुख्यमंत्री दिव्यांगजन सशक्तिकरण छत्र योजना ‘SAMBAL’ क्या है?
मुख्यमंत्री दिव्यांगजन सशक्तिकरण छत्र योजना (SAMBAL) का व्यापक उद्देश्य दिव्यांगजनों को सहायता उपलब्ध कराकर उनके जीवन को अधिक सुगम और आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत दिव्यांगजनों की जरूरतों के अनुरूप विभिन्न प्रकार की सहायता और सुविधाओं को उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है।

दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना इस तरह की योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि सही उपकरण उनकी गतिशीलता, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि किसी सहायक उपकरण को लाभुक तक पहुंचा देना ही पूरी प्रक्रिया का अंत नहीं है। उसके लंबे समय तक उपयोग के लिए रखरखाव और तकनीकी मरम्मत भी उतनी ही जरूरी है। नालंदा में आयोजित यह तकनीकी मरम्मती शिविर इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।
सिर्फ उपकरण देना नहीं, उसे उपयोगी बनाए रखना भी जरूरी
दिव्यांगजन कल्याण की योजनाओं पर अक्सर चर्चा उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित रहती है। लेकिन किसी लाभुक को ट्राईसाईकिल मिलने के बाद यदि कुछ समय में उसमें तकनीकी खराबी आ जाए और उसकी मरम्मत न हो पाए तो वह सरकारी सहायता व्यवहार में निष्प्रभावी हो सकती है।
इसीलिए नालंदा जिला प्रशासन द्वारा प्रत्येक तीन महीने पर तकनीकी मरम्मती शिविर आयोजित करने की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। इससे लाभुकों को अपने उपकरण की स्थिति की जांच कराने और आवश्यकता पड़ने पर मरम्मत कराने का अवसर मिलता है।

यह मॉडल ‘उपकरण वितरण से आगे बढ़कर उपकरण की उपयोगिता बनाए रखने’ की सोच को दर्शाता है।
आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में कदम
शिविर में ट्राईसाईकिल की मरम्मत से तत्काल लाभ तो 13 दिव्यांगजनों को मिला, लेकिन इसका व्यापक उद्देश्य दिव्यांगजनों की रोजमर्रा की जिंदगी को अधिक सुगम बनाना है।
एक काम करने योग्य बैट्री चालित ट्राईसाईकिल किसी लाभुक को घर की चारदीवारी से बाहर निकलने, अपने जरूरी कार्य स्वयं करने और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर देती है। इससे परिवार पर उसकी निर्भरता कम हो सकती है और आत्मविश्वास बढ़ सकता है।
विशेषकर ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में जहां सार्वजनिक परिवहन की सुविधा हर जगह समान रूप से उपलब्ध नहीं है, वहां व्यक्तिगत सहायक गतिशीलता उपकरण का महत्व और बढ़ जाता है।

जिला प्रशासन का दिव्यांगजन कल्याण पर फोकस
नालंदा जिला प्रशासन की ओर से दिव्यांगजनों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने का प्रयास जारी रखने की बात कही गई है।
प्रशासन के अनुसार ऐसे विशेष शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों को उनके उपयोग में आने वाले सहायक उपकरणों की मरम्मत और आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
06 अक्टूबर का शिविर इसी कड़ी का हिस्सा रहा, जिसमें 13 बैट्री चालित ट्राईसाईकिल की तकनीकी मरम्मत की गई।
योजना का जमीनी असर क्या है?
किसी भी कल्याणकारी योजना की सफलता का आकलन केवल लाभुकों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि उससे उनके जीवन में कितना वास्तविक बदलाव आया। दिव्यांगजनों के मामले में यह कसौटी और महत्वपूर्ण हो जाती है।

ट्राईसाईकिल उपलब्ध कराने के बाद उसकी नियमित मरम्मत सुनिश्चित करना यह बताता है कि सहायता को केवल एक बार की सुविधा के रूप में नहीं देखा जा रहा है। अगर ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित होते रहें और लाभुकों को समय पर तकनीकी सहायता मिलती रहे, तो सहायक उपकरण लंबे समय तक उपयोगी बने रह सकते हैं।
नालंदा में आयोजित विशेष तकनीकी मरम्मती शिविर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 13 दिव्यांगजनों की ट्राईसाईकिल की मरम्मत से उन्हें तत्काल आवागमन की सुविधा मिली है। इससे उनके दैनिक जीवन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और जरूरी कामों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि सरकारी सहायता केवल कागज पर दर्ज लाभ न रह जाए, बल्कि वह लाभुक के रोजमर्रा के जीवन में लगातार काम आए। नालंदा का यह तकनीकी मरम्मती शिविर इसी सोच को जमीन पर लागू करने का प्रयास दिखाई देता है।
