कर्नाटक हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय समिति करेगी व्यवहार्यता की जांच, दक्षिण कन्नड़ के उपायुक्त की अगुवाई में बनेगी अधिकारियों की टीम; लंबे समय से लंबित मुकदमों और दूर से अदालत पहुंचने की परेशानी का मुद्दा उठा,
कर्नाटक के तटीय क्षेत्र में हाई कोर्ट की सर्किट या स्थायी पीठ स्थापित करने की मांग के बीच मंगलुरु में प्रशासनिक स्तर पर तैयारी शुरू हो रही है। दक्षिण कन्नड़ जिले के प्रभारी मंत्री यूटी खादर ने कहा है कि उपायुक्त (डीसी) की अगुवाई में अधिकारियों की एक समिति बनाई जाएगी।
यह समिति उन बुनियादी ढांचागत सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं की सूची तैयार करेगी, जिनकी जरूरत हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय समिति को पीठ स्थापित करने की व्यवहार्यता जांचने के दौरान पड़ सकती है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि नई पीठ बनाने का फैसला केवल मांग के आधार पर नहीं होगा। इसके लिए मुकदमों की संख्या, लोगों की जरूरत, उपलब्ध जगह, जरूरी सुविधाओं और दूसरे संबंधित पहलुओं का आकलन किया जाना है।

दशहरा के बाद आसपास के जिलों से मांगा जाएगा सहयोग
रविवार को तटीय कर्नाटक में हाई कोर्ट की पीठ स्थापित करने के मुद्दे पर हुई बैठक में खादर ने कहा कि दशहरा के बाद आसपास के जिलों के बीच सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसमें चिक्कमगलुरु, कोडगु, उत्तर कन्नड़ और शिवमोग्गा जैसे जिलों को शामिल करने की योजना है।
इस संबंध में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और जिलों के प्रभारी मंत्रियों की बैठक बुलाने की बात भी कही गई है। उद्देश्य यह है कि पीठ की मांग को केवल मंगलुरु या दक्षिण कन्नड़ जिले तक सीमित न रखकर पूरे तटीय और आसपास के क्षेत्र की जरूरत के रूप में सामने रखा जाए।
खादर के मुताबिक, हाई कोर्ट की पीठ स्थापित होने से दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों के समग्र विकास को भी लाभ मिल सकता है।
मुकदमों का बोझ और न्याय मिलने में देरी बड़ी चिंता
बैठक में पीठ की जरूरत के समर्थन में लंबित मामलों और न्याय तक पहुंच की समस्या का मुद्दा उठाया गया। विधान परिषद सदस्य इवान डिसूजा ने कहा कि भूमि सुधार कानून, कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (केआईएडीबी) के भूमि अधिग्रहण और मूलगेनी अधिकारों से जुड़े कई मामले हाई कोर्ट में वर्षों से लंबित हैं। इसके कारण लोगों को फैसले के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

बैठक में यह दावा भी किया गया कि दक्षिण कन्नड़ और आसपास के जिलों से जुड़े लगभग 40 प्रतिशत मामले हाई कोर्ट में लंबित हैं। इस आंकड़े का विस्तृत आधार सामने आना जरूरी है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर मुकदमों के बोझ और सुनवाई में देरी को लेकर चिंता स्पष्ट है।
बैठक में अधिवक्ता समुदाय की ओर से यह तर्क भी दिया गया कि यदि हर साल करीब 2,000 नए मामले जुड़ते हैं, तो लंबित मामलों का बोझ बढ़ता रहेगा। इस संदर्भ में यह सवाल उठाया गया कि जब धारवाड़ और कलबुर्गी में हाई कोर्ट की पीठ काम कर रही हैं, तो तटीय कर्नाटक में भी ऐसी सुविधा क्यों नहीं हो सकती।
हाई कोर्ट ने तीन सदस्यीय समिति बनाई
कर्नाटक हाई कोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को मंगलुरु समेत कई क्षेत्रों में सर्किट या स्थायी पीठ स्थापित करने की व्यवहार्यता जांचने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। इसमें न्यायमूर्ति अनु सिवारमन, न्यायमूर्ति एसजी पंडित और न्यायमूर्ति मोहम्मद नवाज शामिल हैं।
समिति को संबंधित पक्षों से परामर्श करने और प्रस्तावित पीठों की व्यवहार्यता पर हाई कोर्ट को रिपोर्ट देने का काम सौंपा गया है। मंगलुरु के अलावा उडुपी, शिवमोग्गा, चिक्कमगलुरु, कोडगु के मडिकेरी, हासन, दावणगेरे और उत्तर कन्नड़ जैसे क्षेत्रों में भी पीठ की संभावना जांचने का विषय शामिल है।

इससे पहले राज्य सरकार ने मंगलुरु में पुराने उपायुक्त कार्यालय की इमारत को संभावित स्थान के रूप में पहचानने की बात कही थी। हालांकि, नई पीठ कहां बनेगी और उसे स्थापित करने के लिए कितनी सुविधाओं की जरूरत होगी, यह अंतिम निर्णय और आकलन पर निर्भर करेगा।
विश्वविद्यालय से लेकर विधायकों तक ने उठाई आवाज
बैठक में मंगलुरु विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पीएल धर्म ने कहा कि विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों को हाई कोर्ट की पीठ की जरूरत समझाने के लिए एक परिपत्र जारी किया जाएगा। विद्यार्थियों को इस मांग की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए पोस्टकार्ड अभियान में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
विधायक राजेश नाइक और वेदव्यास कामथ ने कहा कि यह मांग केवल वकीलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों से जुड़ी है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से एकजुट होकर हाई कोर्ट की समिति के सामने मजबूत पक्ष रखने की अपील की।
कामथ ने यह भी कहा कि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को वित्त विभाग की मंजूरी के साथ आधिकारिक आदेश जारी करना होगा। इसके अलावा तटीय कर्नाटक में हाई कोर्ट की पीठ की जरूरत बताते हुए केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपने की आवश्यकता भी उठाई गई।

अंतिम फैसला जांच और सरकारी प्रक्रिया के बाद
मंगलुरु में हाई कोर्ट की पीठ स्थापित करने की मांग के पीछे मुख्य उद्देश्य लोगों को न्याय तक आसान पहुंच दिलाना और दूर की अदालतों तक आने-जाने में लगने वाले समय तथा खर्च को कम करना है। हालांकि, पीठ स्थापित करने की घोषणा अभी नहीं हुई है। पहले प्रशासन को सुविधाओं का आकलन करना होगा, हाई कोर्ट की समिति को व्यवहार्यता जांचनी होगी और संबंधित पक्षों के बीच सहमति बनानी होगी।
इसलिए आने वाले समय में अधिकारियों की सूची, समिति की रिपोर्ट और राज्य सरकार की आगे की कार्रवाई यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि तटीय कर्नाटक को हाई कोर्ट की नई पीठ मिल पाएगी या नहीं।
