जम्मू-कश्मीर के कठुआ में Sewa-III हाइड्रो प्रोजेक्ट पर मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे घटना; मृतकों में असिस्टेंट कमांडेंट और सब-इंस्पेक्टर भी शामिल, आरोपी हेड कॉन्स्टेबल को साथियों ने काबू कर पुलिस के हवाले किया
जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में मंगलवार शाम सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक बेहद गंभीर घटनाक्रम में CISF के चार जवानों की मौत हो गई। घटना जिले के बसोहली इलाके के मशका गांव स्थित Sewa-III हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट में हुई।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, CISF के ही एक हेड कॉन्स्टेबल ने अपने साथियों पर सर्विस राइफल से गोलियां चला दीं। गोलीबारी से चार जवान गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मौत हो गई। आरोपी को मौके पर ही उसके साथियों ने काबू कर लिया और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया गया।
मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे अचानक हुई फायरिंग
घटना 29 सितंबर 2026, मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे की बताई जा रही है। अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, Sewa-III पावर प्रोजेक्ट में तैनात CISF कर्मियों के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई थी।
इसी दौरान स्थिति बिगड़ी और एक हेड कॉन्स्टेबल ने कथित तौर पर अपनी सर्विस राइफल से साथियों पर फायरिंग कर दी।
शुरुआती रिपोर्टों में आरोपी की पहचान हेड कॉन्स्टेबल अभिदेश कुमार के रूप में बताई गई है। हालांकि, गोलीबारी से पहले ऐसा क्या हुआ था और विवाद किस मुद्दे पर शुरू हुआ, इसकी आधिकारिक वजह अभी सामने नहीं आई है। पुलिस और CISF दोनों स्तर पर घटना की जांच चल रही है।
मरने वालों में अधिकारी भी शामिल
फायरिंग में जान गंवाने वालों में CISF के असिस्टेंट कमांडेंट और कंपनी कमांडर अंकित कुमार पांडेय, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह और दो कॉन्स्टेबल शामिल हैं। ताजा रिपोर्टों में दो कॉन्स्टेबल के नाम संजय/संदीप कुमार और मोहम्मद रफीक के रूप में अलग-अलग प्रकाशित हुए हैं;
इसलिए आधिकारिक पहचान की पुष्टि होने तक इन नामों की spelling में सावधानी जरूरी है। Indian Express ने दो मृतकों के नाम संजिव कुमार और मोहम्मद रफीक बताए हैं, जबकि Times of India ने संदीप कुमार और रफीक अहमद लिखा है।
चारों को गोली लगने के बाद नजदीकी NHPC अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। घटना के बाद वरिष्ठ CISF और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। आरोपी को काबू करने के बाद उसकी सर्विस राइफल भी जांच के लिए जब्त की गई है।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
शुरुआती जानकारी को जोड़ें तो घटनाक्रम कुछ इस तरह सामने आता है—
पहला चरण: Sewa-III प्रोजेक्ट में CISF कर्मी ड्यूटी पर तैनात थे।
दूसरा चरण: किसी मुद्दे को लेकर जवानों के बीच कहासुनी या बहस हुई।
तीसरा चरण: इसी विवाद के दौरान हेड कॉन्स्टेबल ने कथित तौर पर अपनी सर्विस राइफल से साथियों पर गोलियां चला दीं।
चौथा चरण: चार CISF कर्मी गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुए।
पांचवां चरण: साथी जवानों ने आरोपी को काबू किया और पुलिस को सौंप दिया।
छठा चरण: घायल जवानों को अस्पताल ले जाया गया, जहां चारों की मौत हो गई। इसके बाद CISF और पुलिस ने घटना की जांच शुरू की।
क्यों हुई फायरिंग? अभी सबसे बड़ा सवाल यही
इस घटना में सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर जवानों के बीच ऐसा क्या हुआ कि बात गोलीबारी तक पहुंच गई।
अभी तक सामने आई जानकारी में बहस की वजह स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों ने कहा है कि विवाद किस मुद्दे पर शुरू हुआ और किस परिस्थिति में आरोपी ने हथियार उठाया, यह जांच का हिस्सा है। इसलिए फिलहाल किसी व्यक्तिगत विवाद, ड्यूटी संबंधी तनाव या किसी अन्य कारण को घटना की वजह बताना जल्दबाजी होगी।
CISF और पुलिस दोनों स्तर पर जांच
घटना के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। वहीं CISF की ओर से भी मामले की आंतरिक जांच की जा रही है। इस तरह की घटना को सुरक्षा बलों के संदर्भ में fratricide कहा जाता है। इसका सामान्य अर्थ है—एक ही सैन्य या सुरक्षा संगठन के सदस्यों के बीच हुई घातक फायरिंग।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि गोलीबारी से पहले क्या हुआ, बहस किस बात पर हुई, हथियार किस परिस्थिति में इस्तेमाल हुआ और क्या कोई ऐसी घटना थी जिसने विवाद को अचानक हिंसक बना दिया।
Sewa-III प्रोजेक्ट कहां है?
घटना जिस Sewa-III Hydroelectric Project में हुई, वह मशका गांव, बसोहली तहसील, कठुआ जिले में स्थित है। सरकारी आंकड़ों में Sewa-III को कठुआ जिले का 9 मेगावाट क्षमता वाला पावर हाउस दर्ज किया गया है। यह Sewa River/Ravi नदी क्षेत्र से जुड़ा हाइड्रो प्रोजेक्ट है।
यहां एक जरूरी तथ्य यह है कि Sewa-III और Sewa-II अलग परियोजनाएं हैं। NHPC के रिकॉर्ड में Sewa-II Power Station भी कठुआ जिले में दर्ज है, जबकि Sewa-III 9 MW का अलग प्रोजेक्ट है। इसलिए घटना की लोकेशन को Sewa-II लिखना सही नहीं होगा।
बॉक्स | घटना पर एक नजर
कहां: Sewa-III Hydroelectric Project, मशका, बसोहली, कठुआ
कब: 29 सितंबर 2026, मंगलवार
समय: करीब 7:30 बजे शाम
मौतें: 4 CISF कर्मी
आरोपी: CISF हेड कॉन्स्टेबल अभिदेश कुमार, शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक
हथियार: सर्विस राइफल
घटना से पहले: जवानों के बीच बहस की जानकारी
मृतकों में: असिस्टेंट कमांडेंट/कंपनी कमांडर और सब-इंस्पेक्टर भी शामिल
आरोपी का क्या हुआ: साथियों ने काबू किया, बाद में पुलिस को सौंपा
जांच: पुलिस जांच के साथ CISF की आंतरिक जांच
फायरिंग की वजह: अभी स्पष्ट नहीं
घटना को ‘फ्रैट्रिसाइड’ क्यों कहा जा रहा है?
‘Fratricide’ का इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी सुरक्षा या सैन्य बल के सदस्य की मौत उसी बल के दूसरे सदस्य की कार्रवाई में होती है। कठुआ की इस घटना में भी शुरुआती रिपोर्टों के आधार पर इसी शब्द का इस्तेमाल किया गया है।
हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियां और गोलीबारी के पीछे की वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।