Dinman Times
  • ट्रेंडिंग
  • फोटो
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
Reading: ‘हनुमान अंश’: जब एक संत की कहानी ने बॉक्स ऑफिस से आगे जाकर दिलों को छुआ
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
Follow US
© 2024. All Rights Reserved.

Home - मनोरंजन - ‘हनुमान अंश’: जब एक संत की कहानी ने बॉक्स ऑफिस से आगे जाकर दिलों को छुआ

‘हनुमान अंश’: जब एक संत की कहानी ने बॉक्स ऑफिस से आगे जाकर दिलों को छुआ

आभा शुक्ला
Last updated: सितम्बर 30, 2026 10:44 पूर्वाह्न
By : आभा शुक्ला
Published on : 18 घंटे पहले
हनुमान अंश ने ₹404 करोड़ से अधिक की वैश्विक कमाई
हनुमान अंश ने ₹404 करोड़ से अधिक की वैश्विक कमाई
साझा करें

करीब ₹2 करोड़ में बनी फिल्म ने दुनिया भर में ₹404 करोड़ का आंकड़ा पार किया; 21 साल की को-प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर का सफर भी कहानी से कम दिलचस्प नहीं, वहीं फिल्म ने नीम करोली बाबा के जीवन के उस हिस्से को पर्दे पर उतारा, जिसे पूरी तरह समेट पाना शायद किसी एक फिल्म के बस की बात नहीं।

कुछ फिल्में महज मनोरंजन तक सीमित रह जाती हैं, “जबकि कुछ फिल्में हमारे भीतर की दशा बदलकर जीवन को नई दिशा दे जाती हैं।”

‘हनुमान अंश’ दूसरी तरह की फिल्म लगती है।

नीम करोली बाबा यानी महाराज जी के जीवन और आध्यात्मिक यात्रा पर बनी विशाल चतुर्वेदी की यह फिल्म पहले दिन महज करीब 10 लाख रुपए की कमाई से शुरू हुई थी। लेकिन धीरे-धीरे दर्शकों की जुबान इसकी सबसे बड़ी प्रचारक बन गई।

फिल्म ने सिनेमाघरों में लंबी पारी खेलते हुए 53वें दिन तक दुनिया भर में करीब ₹404.25 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया। यानी करीब ₹2 करोड़ के बताए गए बजट वाली इस फिल्म ने कमाई के पैमाने पर असाधारण छलांग लगाई।

ये भी पढ़े

Lock Upp में फिर लगेगा ताला! Farah Khan और Riteish Deshmukh की जोड़ी लौटेगी, Netflix ने किया नए सीजन का ऐलान
Paris Fashion Week 2026: ऐश्वर्या राय ने Eiffel Tower के सामने बिखेरा जलवा, Kendall-Simone संग थिरकीं, Celine Dion को लगाया गले
राष्ट्रीय पुरस्कार के बाद गुजरात पहुंचे ममूटी, तिलक लगाने पर सोशल मीडिया पर छिड़ा विवाद; फिल्ममेकर बोले— ‘आलोचक कुएं के मेंढक हैं’
लता मंगेशकर : जिनके स्वर में जैसे सरस्वती उतर आती थीं

लेकिन ‘हनुमान अंश’ की कहानी सिर्फ 404 करोड़ की नहीं है। इसकी असली कहानी उस संत की है, जिसकी पूरी जिंदगी को ढाई घंटे की फिल्म में समेटने की कोशिश की गई है।

पहले यह समझिए—क्या ‘हनुमान अंश’ पहला भाग है?

हां। ‘हनुमान अंश’ नीम करोली बाबा की जीवनगाथा का पहला सिनेमाई अध्याय है। फिल्म के अंत में भी कहानी के आगे जारी रहने का संकेत मिलता है और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने दूसरे भाग की पुष्टि की है।

निर्माता नम्रता सिंह के मुताबिक मेकर्स ने इसे शुरू से ही तीन हिस्सों की कहानी के रूप में सोचा था—पहले भाग में महाराज जी के शुरुआती जीवन से लेकर कैंची धाम तक का सफर, दूसरे में कैंची धाम और तीसरे में उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और प्रभाव की कहानी को विस्तार देने की योजना है।

यानी यह पूरी जीवनी नहीं है। यह उस विराट जीवन का पहला हिस्सा है।

कौन थे नीम करोली बाबा?

नीम करोली बाबा का मूल नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है। उनका जन्म करीब 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में हुआ था। कम उम्र में उनका विवाह रामबेटी शर्मा से हुआ। आध्यात्मिक झुकाव के कारण उन्होंने घर छोड़ा और साधु जीवन की ओर चले गए।

बाद में पिता के आग्रह पर वे वापस लौटे और गृहस्थ जीवन अपनाया। उनके दो पुत्र और एक पुत्री हुए। आगे चलकर उन्होंने फिर वैराग्य और आध्यात्मिक साधना का रास्ता पकड़ा।

यही वह मोड़ है, जो ‘हनुमान अंश’ को केवल किसी संत की चमत्कार-कथा नहीं रहने देता।

क्योंकि यहां एक ऐसा मनुष्य दिखाई देता है, जिसने संसार से भागकर नहीं, बल्कि संसार को समझते हुए अपनी आध्यात्मिक यात्रा को चुना।

उनका जीवन बाद में कैंची धाम और हनुमान भक्ति से गहराई से जुड़ा। 1964 में कैंची धाम में हनुमान मंदिर की स्थापना उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं में मानी जाती है। 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में उनका निधन हुआ।

फिल्म किसने बनाई और कौन-कौन है इसमें?

‘हनुमान अंश’ के लेखक और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी हैं। फिल्म में शोभिनव सत्य ने नीम करोली बाबा की मुख्य भूमिका निभाई है। विहान शेडगे ने बाबा के किशोर रूप को निभाया है, जबकि पूर्णिमा तिवारी ने उनकी पत्नी रामबेटी शर्मा का किरदार निभाया है।

चंदन आनंद डॉ. राम नंदन भोसले की भूमिका में हैं और अनिल रस्तोगी महंत जी के किरदार में दिखाई देते हैं। गुलशन पांडे, निखिल दुबे, नेहा परांजपे और अन्य कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं।

एक दिलचस्प बात यह भी है कि फिल्म में वृद्ध नीम करोली बाबा की भूमिका रिटायर्ड कर्नल हनी बख्शी ने निभाई है।

फिल्म का निर्माण विशाल चतुर्वेदी के साथ रागिनी सोना, अनुप्रिया नागर और नम्रता जी सिंह समेत निर्माताओं की टीम ने किया है।

21 साल की अनुप्रिया नागर और ₹404 करोड़ की कहानी

कौन हैं अनुप्रिया नागर?

महज 21 साल की अनुप्रिया नागर ‘हनुमान अंश’ की सबसे कम उम्र की को-प्रोड्यूसर हैं और उन्हें लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भारत की सबसे कम उम्र की फिल्म प्रोड्यूसर के तौर पर दर्ज किए जाने का दावा किया गया है। मुंबई में जन्मी अनुप्रिया ने ब्रिटेन की University of Bath से Economics में ग्रेजुएशन किया।

पढ़ाई के दौरान Steve Jobs पर रिसर्च करते हुए उन्हें नीम करोली बाबा के बारे में पता चला और यहीं से उनके जीवन व आध्यात्मिक यात्रा पर फिल्म बनाने का विचार आया।

कला में भी उनकी रुचि रही है—उन्होंने 12 साल की उम्र से अपनी कला प्रदर्शित करनी शुरू की थी। बाद में यूके में तीन साल की पार्ट-टाइम नौकरी से जुटाई अपनी बचत का करीब एक-तिहाई हिस्सा उन्होंने ‘हनुमान अंश’ के निर्माण में लगाया।

फिल्म से जुड़ते समय उनके पास कोई फिल्म निर्माण का अनुभव नहीं था, फिर भी 21 साल की उम्र में वह अपनी पहली फीचर फिल्म की को-प्रोड्यूसर बनीं।

और जब फिल्म ने करोड़ों की कमाई शुरू की तो दूरदर्शन से बातचीत में अनुप्रिया ने कहा—

“I am just 21, I don’t even know what I will do with so much money.”

बाद में उन्होंने कहा कि उनके लिए मुनाफा शुरुआत से लक्ष्य नहीं था और वह इस पैसे का इस्तेमाल जरूरतमंद बच्चों की मदद और चैरिटी में करना चाहती हैं।

सिर्फ बॉक्स ऑफिस नहीं, दर्शकों का जुड़ाव भी

फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यही है कि उसने एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व की कहानी को दर्शकों के बीच फिर से चर्चा का विषय बना दिया। समीक्षा-संकलनों में फिल्म की ईमानदारी, आध्यात्मिक वातावरण और शोभिनव सत्य के संयमित अभिनय की प्रशंसा हुई है। वहीं कुछ समीक्षकों ने इसकी धीमी गति और कुछ हिस्सों के अधिक प्रसंगात्मक हो जाने की ओर भी इशारा किया।

दर्शकों की प्रतिक्रिया फिल्म की सबसे बड़ी कहानी बन गई।

बुकमायशो पर ‘हनुमान अंश’ को इस समय 9.6/10 की रेटिंग और 2.49 लाख से ज्यादा वोट मिले हुए हैं।

रॉटन टोमेटोज पर फिल्म का 97% क्रिटिक्स स्कोर और 100% का verified audience score दिख रहा है, हालांकि वहां आलोचकों की संख्या अभी केवल दो है, इसलिए इसे व्यापक आलोचनात्मक सर्वसम्मति मानना उचित नहीं होगा।

छह समीक्षाओं के एक संकलन में फिल्म का औसत क्रिटिक्स स्कोर 73/100 रहा और पांच समीक्षाएं सकारात्मक तथा एक मिश्रित बताई गई। आलोचकों ने खास तौर पर शोभिनव सत्य के संयमित अभिनय, फिल्म की ईमानदारी और आध्यात्मिक वातावरण की तारीफ की, जबकि कुछ ने इसकी धीमी गति और एपिसोडिक ढांचे को कमजोरी माना।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे 3.5/5 देते हुए इसकी शांति और आध्यात्मिक दृष्टिकोण को सराहा, लेकिन यह भी कहा कि धीमी गति और episodic structure इसे पूरी तरह immersive biopic बनने से रोकते हैं।

यानी फिल्म की तारीफ में भी एक दिलचस्प बात है—लोग इसे मसाला या भव्यता के लिए नहीं, भाव, भक्ति और सरलता के लिए पसंद कर रहे हैं।

बड़े नामों ने भी की तारीफ

फिल्म को सिर्फ आम दर्शकों से प्रतिक्रिया नहीं मिली। कंगना रनौत ने इसे सामान्य फिल्म से ज्यादा ‘सत्संग’ जैसा अनुभव बताया। फिल्ममेकर मधुर भंडारकर ने भी दर्शकों की प्रतिक्रिया और शोभिनव सत्य के अभिनय की तारीफ की।

वहीं अभिनेता आयुष्मान खुराना ने छोटे बजट की फिल्मों के संदर्भ में ‘हनुमान अंश’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी फिल्में कम बजट में दर्शकों से जुड़ सकती हैं।

लेकिन मुझे फिल्म में सबसे ज्यादा क्या अच्छा लगा?

मेरे लिए ‘हनुमान अंश’ की सबसे खूबसूरत बात उसके चमत्कार नहीं, हनुमान अंश’ की खूबसूरती मुझे वहां सबसे अधिक दिखाई देती है, जहां बाबा के आध्यात्मिक जीवन के साथ उनके मानवीय पक्ष को समझने की कोशिश की गई है।

फिल्म का वह हिस्सा बहुत भीतर तक जाता है, जहां एक ओर मनुष्य का अध्यात्म की तरफ बढ़ता मन है और दूसरी ओर उसकी पत्नी का प्रेम, अधिकार और अपनी जगह को लेकर स्वाभाविक भाव।

मुझे खास तौर पर यह बात छूती है कि उन्होंने पिता की आज्ञा को मानकर संन्यास छोड़कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया। लेकिन गृहस्थ बनने का अर्थ यह नहीं था कि उनके भीतर का आध्यात्मिक मन खत्म हो गया।

उनकी पत्नी के साथ उनके संवादों में एक बहुत मानवीय कोमलता दिखाई देती है। यहां प्रेम सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं है। प्रेम उस व्यक्ति की आंतरिक यात्रा को समझने का नाम भी है, जिसे आप अपना जीवनसाथी कहते हैं।

दाढ़ी वाले रूप को लेकर पत्नी की पसंद हो या उनके मन में उठने वाली आशंकाएं—फिल्म इन छोटी बातों के जरिए यह दिखाती है कि अध्यात्म की राह चुनने वाला व्यक्ति भी रिश्तों की भावनाओं से परे कोई पत्थर नहीं होता।

और सबसे सुंदर बात यह है कि वह अपनी पत्नी को यह भरोसा दिलाते हैं कि उनमें कोई कमी नहीं है, उनके प्रेम में कोई दूसरा नहीं है; उनका मन बस ईश्वर की ओर चला गया है।

यह संवाद मुझे इसलिए महत्वपूर्ण लगा क्योंकि यहां त्याग का अर्थ प्रेम को ठुकराना नहीं बनता। बल्कि प्रेम को इतना सम्मान देना बनता है कि सामने वाले को असुरक्षा में छोड़कर आगे न बढ़ा जाए।

उनकी पत्नी का उनके रास्ते को समझना भी उतना ही बड़ा भाव है।

वह उनके अध्यात्म को रोकती नहींं। वह उनके मन को समझती हैं।

और शायद यही वह जगह है, जहां फिल्म सबसे ज्यादा मानवीय हो जाती है।

मेरी नजर में असली कमी यही है—और यही फिल्म की खूबसूरती भी

नीम करोली बाबा का जीवन किसी एक कथा का जीवन नहीं था। वह इतना विराट था कि उसे एक फिल्म में समेटने की कोशिश अपने आप में ‘गागर में सागर’ जैसी है। फिल्म ने उनके जीवन के कुछ महत्वपूर्ण पड़ावों को बहुत आत्मीयता से छुआ है, लेकिन कई जगह मन में यह सवाल भी उठता है कि क्या इतने विशाल व्यक्तित्व को ढाई घंटे में वास्तव में जाना जा सकता है?

और खासकर उनके गृहस्थ जीवन और आध्यात्मिक यात्रा के बीच का संबंध—जहाँ पत्नी केवल उनके जीवन से पीछे छूट जाने वाली स्त्री नहीं, बल्कि उनके निर्णय को समझने और स्वीकार करने वाली जीवनसंगिनी के रूप में सामने आती हैं—यह पहलू और अधिक गहराई मांगता था। यही वह जगह है जहाँ फिल्म और ठहर सकती थी।

लेकिन मेरी शिकायत भी दरअसल फिल्म की प्रशंसा ही है—क्योंकि अगर फिल्म ने बाबा के जीवन की इतनी बड़ी जिज्ञासा भीतर जगा दी कि फिल्म खत्म होने के बाद भी हम उनके जीवन के बाकी हिस्से को जानना चाहें, तो शायद उसने अपना सबसे बड़ा काम कर दिया।

देखिए, भीतर कुछ ऐसा है जिसे जानना अभी बाकी है।

और शायद यही इस फिल्म की सबसे खूबसूरत उपलब्धि है।

क्योंकि कुछ फिल्में जवाब देकर खत्म होती हैं।

‘हनुमान अंश’ सवाल छोड़कर खत्म होती है—महाराज जी की वह पूरी यात्रा आखिर कैसी रही होगी, जिसे हम ढाई घंटे में सिर्फ छू पाए हैं?

और उस सवाल के बाद शायद अगली फिल्म का इंतजार शुरू होता है।

‘हनुमान अंश’ को केवल एक बायोपिक की तरह देखना शायद उसके साथ न्याय नहीं होगा। यह एक ऐसे मनुष्य की यात्रा को समझने का प्रयास है, जो दुख से अध्यात्म की ओर गया और फिर प्रेम, सेवा और करुणा को अपनी साधना का माध्यम बनाया। यही बात समीक्षाओं में भी फिल्म के केंद्रीय भाव के रूप में सामने आई है।

कुछ फिल्में कहानी नहीं, हमारे भीतर के उस अनजाने कोने तक पहुंचती हैं, जहाँ शायद हम स्वयं भी कभी नहीं पहुंचे होते—और वहीं हमारी मुलाकात उस स्वयं से होती है, जिसकी खोज में मनुष्य युगों से भटक रहा है।

ऐसी फिल्में पर्दे पर खत्म होकर भी भीतर जीवित रहती हैं और अपने पीछे ऐसी अमिट छाप छोड़ जाती हैं, जो शायद मरणोपरांत तक बनी रहती है।

और शायद इस फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि ₹404 करोड़ नहीं है।

सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि फिल्म खत्म होने के बाद भी नीम करोली बाबा खत्म नहीं होते।

वह एक प्रश्न बनकर भीतर रह जाते हैं—

हम जिस शांति को बाहर खोजते फिरते हैं, क्या उसका रास्ता कभी हमारे अपने भीतर से होकर भी जाता है?

यहीं आकर ‘हनुमान अंश’ एक फिल्म से कहीं बढ़ के हो जाती है।

वह महज़ पर्दे की कहानी बन कर नहीं रह जाती,भीतर शुरू हुई एक यात्रा बन जाती है।

TAGGED:Hanuman Anshनीम करोली बाबाहनुमान अंश
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
abha
Byआभा शुक्ला
आभा शुक्ला पत्रकारिता, जनसंपर्क और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन के क्षेत्र में 5+ वर्षों के अनुभव वाली पत्रकार एवं कम्युनिकेशन प्रोफेशनल हैं। पटना से जुड़ीं आभा को समाचार शोध, रिपोर्टिंग, कंटेंट डेवलपमेंट, मीडिया आउटरीच और जनसंपर्क अभियानों का अनुभव है। उन्होंने Zee News में ट्रेनी जर्नलिस्ट के रूप में समाचार शोध, रिपोर्टिंग और कंटेंट डेवलपमेंट का अनुभव हासिल किया। इसके बाद UNE Consultant में PR Executive के तौर पर मीडिया आउटरीच, PR कैंपेन और कॉर्पोरेट इवेंट्स पर काम किया। TCS में Associate के रूप में उन्होंने डेटा मैनेजमेंट, रिसर्च और सूचना प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। आभा शुक्ला तथ्यपरक, शोध-आधारित और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक एवं समसामयिक मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाने में रुचि रखती हैं।
पिछली ख़बर गोपालगंज में सारण तटबंध टूटा गोपालगंज में सारण तटबंध टूटा, निचले इलाकों में तेजी से घुसा नदी का पानी
अगली ख़बर Lock Upp New Season में Farah Khan और Riteish Deshmukh की वापसी Lock Upp में फिर लगेगा ताला! Farah Khan और Riteish Deshmukh की जोड़ी लौटेगी, Netflix ने किया नए सीजन का ऐलान

ये भी पढ़ें

Christa Pike Tennessee execution death row case

18 साल की उम्र में किया था कत्ल, 30 साल बाद होने वाली थी फांसी; आखिरी घंटे में कोर्ट ने रोक दी सजा

Rohtas के पूर्व SP रौशन कुमार पर कोर्ट की कार्रवाई

रोहतास के पूर्व SP रौशन कुमार पर कोर्ट ने लगाया 1 रुपये का जुर्माना, आदेश की अनदेखी पर सख्त टिप्पणी

हीमोफीलिया मरीजों के लिए बिहार सरकार का बड़ा फैसला, Emicizumab दवा की खरीद को 26.33 करोड़ की मंजू

हीमोफीलिया मरीजों के लिए बिहार सरकार का बड़ा फैसला, Emicizumab दवा की खरीद को 26.33 करोड़ की मंजूरी

Indian Army TGC 145 Recruitment 2026 में 30 पदों पर भर्ती

Indian Army TGC 145 Recruitment 2026: इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए सेना में अधिकारी बनने का मौका, 30 पदों पर भर्ती शुरू

14 हजार फीट नीचे आया विमान, भारतीय कैप्टन ने बचाई 180 लोगों की जान

14 हजार फीट नीचे जा रहा था विमान, कॉकपिट में चाकू से हमला… भारतीय कैप्टन ने जान पर खेलकर बचाई 180 लोगों की जान

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • करियर
  • खेल
  • उत्तर प्रदेश

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?