करीब पांच हजार श्रद्धालु और हिंदू समाज के लोग हुए शामिल; रानी लक्ष्मीबाई के स्वरूप में घोड़ों और बुलेट पर सवार महिलाओं ने दिया शौर्य व आत्मरक्षा का संदेश
गया: बिहार के गया शहर में शनिवार को मां जगदंबा की भव्य सशस्त्र शोभायात्रा निकाली गई। परशुराम गुरुकुल ट्रस्ट, गयाजी के तत्वावधान में आयोजित इस यात्रा में बड़ी संख्या में माताओं, बहनों और हिंदू समाज के लोगों ने हिस्सा लिया। आयोजकों के अनुसार, करीब पांच हजार लोग शोभायात्रा में शामिल हुए।
शोभायात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा। इसके माध्यम से शौर्य, साहस, आत्मविश्वास और धर्मरक्षा का संदेश देने के साथ महिलाओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया गया।
गोलपत्थर मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा
परशुराम गुरुकुल ट्रस्ट के अध्यक्ष नीरज त्रिपाठी के अनुसार, शोभायात्रा की शुरुआत गोलपत्थर मंदिर से हुई। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा शक्ति और साहस की प्रतीक हैं और उनकी पूजा के साथ उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारना भी जरूरी है।

उन्होंने बताया कि आयोजन का एक प्रमुख उद्देश्य मातृशक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाना तथा महिलाओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करना है। उनका कहना था कि आवश्यकता पड़ने पर महिलाएं अपनी सुरक्षा के साथ-साथ परिवार और समाज के लिए भी प्रभावी भूमिका निभा सकें, यही आयोजन का संदेश है।
घोड़ों पर सवार वीरांगनाएं बनीं मुख्य आकर्षण
शोभायात्रा में अलग-अलग स्वरूपों ने लोगों का ध्यान खींचा। तीन खुली जीपों पर मां दुर्गा के छोटी, मंझली और बड़ी दुर्गा स्वरूपों की झांकियां सजाई गई थीं।
वहीं, 11 घोड़ों पर रानी लक्ष्मीबाई के स्वरूप में महिलाएं सवार थीं। इसके अलावा 11 बुलेट मोटरसाइकिलों पर भी महिलाओं ने वीरांगना लक्ष्मीबाई के रूप में हिस्सा लिया। इस प्रस्तुति ने शोभायात्रा को अलग पहचान दी और लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी।
शोभायात्रा में परशुराम गुरुकुल के प्रशिक्षित योद्धाओं ने भी अपनी युद्धकला का प्रदर्शन किया। कलारीपयट्टू, उरुमी, लाठी और मार्शल आर्ट के प्रदर्शन के जरिए आत्मरक्षा और शारीरिक प्रशिक्षण की झलक प्रस्तुत की गई।

युद्धकला प्रदर्शन के जरिए युवाओं को संदेश
आयोजकों के मुताबिक, गुरुकुल के प्रशिक्षित योद्धाओं का प्रदर्शन विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं को अनुशासन, शारीरिक प्रशिक्षण, साहस और आत्मविश्वास के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से किया गया।
ट्रस्ट की ओर से शस्त्र, शास्त्र और संस्कार के समन्वय के जरिए समाज को सशक्त बनाने का संदेश दिया गया। आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ आत्मरक्षा और सामाजिक जागरूकता को भी प्रमुखता दी गई।
शोभायात्रा के दौरान गोलपत्थर पीठाधीश्वर महंत राजीव रंजन दास महाराज रथ पर विराजमान रहे। यात्रा के दौरान विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए श्रद्धालु और सहभागी आगे बढ़े।
इन रास्तों से होकर आजाद पार्क पहुंची यात्रा
गोलपत्थर मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा जीबी रोड, नई गोदाम, महारानी रोड, रामधनपुर, बैरागी, स्टेशन रोड, तेलबिगहा, पिपरपाती और राज वीडियो हाल होते हुए दवा मंडी पहुंची।

इसके बाद यात्रा का समापन आजाद पार्क में किया गया। समापन के बाद श्रद्धालुओं और कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया।
आयोजकों ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ समाज में साहस, आत्मविश्वास, अनुशासन और आत्मरक्षा की भावना को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। महिलाओं की भागीदारी और युद्धकला के प्रदर्शन ने शोभायात्रा को विशेष स्वरूप दिया।
