गोपालगंज। गंडक नदी का बढ़ता जलस्तर अब सिर्फ नदी के किनारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांवों की चौखट तक पहुंच गया है। सोमवार की सुबह जब लोगों की नींद खुली तो कई इलाकों में खेतों और रास्तों पर पानी पसरा था। देखते ही देखते गंडक का पानी सदर, कुचायकोट, मांझा और बरौली प्रखंड के करीब 36 गांवों के निचले हिस्सों में प्रवेश कर गया। पानी बढ़ने के साथ ही ग्रामीणों के चेहरों पर चिंता की लकीरें गहरी होने लगीं और लोग अपने घर-गृहस्थी का जरूरी सामान समेटकर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर निकलने लगे।
किसी ने ट्रैक्टर-ट्राली पर अनाज और बिस्तर लादा तो किसी ने बैलगाड़ी पर बच्चों और जरूरी सामान को बैठाया। जिन घरों में कल तक रोजमर्रा की जिंदगी की चहल-पहल थी, वहां आज सामान बांधने और सुरक्षित ठिकाना तलाशने की बेचैनी दिखाई दे रही है। बाढ़ का पानी गांवों की ओर बढ़ा तो सिर्फ रास्ते नहीं डूबे, बल्कि लोगों के भीतर बसे अपने घर को छोड़ने का डर भी सतह पर आ गया।

पानी बढ़ा तो घर से पहले निकला जरूरी सामान
गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों ने संभावित खतरे को देखते हुए घरों से जरूरी सामान निकालना शुरू कर दिया है। सोमवार सुबह से कई गांवों में ग्रामीण अपने सामान को बैलगाड़ी और ट्रैक्टर-ट्राली पर लादकर ऊंचे स्थानों की ओर जाते नजर आए।
किसी के लिए घर सिर्फ चार दीवारें नहीं होता। उसमें वर्षों की मेहनत, अनाज की बोरियां, बच्चों की किताबें, बर्तन, कपड़े और छोटी-बड़ी यादें जमा होती हैं। बाढ़ जब इन्हीं घरों की ओर बढ़ती है तो सबसे पहले आदमी अपना जरूरी सामान बचाने की कोशिश करता है। गोपालगंज के प्रभावित गांवों में भी कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिल रहा है।
पानी के बढ़ते स्तर ने ग्रामीणों की चिंता इसलिए भी बढ़ा दी है क्योंकि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा तो वर्तमान में प्रभावित गांवों के अलावा आसपास के दूसरे निचले इलाकों में भी पानी फैलने की आशंका है।
चार प्रखंडों के गांवों में बढ़ी परेशानी
गंडक नदी के पानी से गोपालगंज सदर, कुचायकोट, मांझा और बरौली प्रखंड के निचले इलाकों में परेशानी बढ़ गई है। करीब तीन दर्जन गांवों में पानी पहुंचने के बाद लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आवागमन की है।
गांवों की पगडंडियां और संपर्क रास्ते पानी से प्रभावित होने लगे हैं। पानी बढ़ने की स्थिति में लोगों के लिए बाजार, अस्पताल और दूसरी जरूरी सेवाओं तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। ग्रामीणों को अब इस बात की चिंता सताने लगी है कि यदि जलस्तर में और वृद्धि हुई तो सामान्य जनजीवन कितने दिनों तक प्रभावित रहेगा।
बाढ़ का संकट सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहता। गांवों में रहने वाले परिवारों के लिए मवेशी भी उनकी आजीविका का अहम हिस्सा होते हैं। पानी बढ़ने के साथ पशुओं के लिए चारा जुटाना और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखना भी बड़ी चुनौती बन सकता है।
स्कूल परिसर में पहुंचा बाढ़ का पानी
गंडक नदी के बढ़ते पानी का असर सरकारी स्कूलों तक भी पहुंच गया है। सदर प्रखंड के रामनगर गांव स्थित सरकारी स्कूल परिसर में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। वहीं मांझा प्रखंड के निमुइया गांव स्थित सरकारी स्कूल में भी पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
स्कूल परिसर में पानी पहुंचने के बाद पठन-पाठन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल भवन और परिसर की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। यदि पानी का स्तर और बढ़ता है तो स्कूलों के संचालन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
बाढ़ के दिनों में बच्चों की किताबों से लेकर स्कूल तक पहुंचने के रास्ते तक प्रभावित होते हैं। ऐसे में ग्रामीण परिवारों के लिए यह संकट केवल वर्तमान की परेशानी नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा को लेकर भी चिंता का कारण बन जाता है।
घर पीछे छूटा, सामने अनिश्चित रास्ता
बाढ़ की सबसे बड़ी त्रासदी यही है कि यह आदमी को उसके घर से दूर कर देती है। जिस आंगन में सुबह की शुरुआत होती है, वही आंगन जब पानी में घिरने लगता है तो सुरक्षित ठिकाने की तलाश शुरू हो जाती है।
गोपालगंज के प्रभावित इलाकों में भी ग्रामीण इसी आशंका के बीच अपने जरूरी सामान के साथ ऊंचे स्थानों की ओर बढ़ रहे हैं। किसी की चिंता घर में रखे अनाज की है तो किसी की मवेशियों की। कोई बच्चों को लेकर परेशान है तो किसी को बुजुर्गों की चिंता सता रही है।
बाढ़ का पानी धीरे-धीरे फैलता है, लेकिन उसके साथ पैदा होने वाली चिंता तेजी से फैलती है। पानी की एक-एक इंच बढ़ती धार लोगों के सामने नए सवाल खड़े कर रही है।
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर ऊंचे एवं सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की जा रही है। प्रशासन प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर रख रहा है।
ग्रामीणों से अपील की जा रही है कि वे जलस्तर बढ़ने की स्थिति में जोखिम न लें और समय रहते सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
जलस्तर बढ़ा तो और गांवों में फैल सकता है पानी
ग्रामीणों की चिंता अब आने वाले घंटों को लेकर है। उनका कहना है कि यदि गंडक नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो आसपास के अन्य गांवों में भी पानी प्रवेश कर सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ पशुओं के लिए चारा और लोगों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की चुनौती बढ़ सकती है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन सबसे पहले प्रभावित होता है। इसके बाद बिजली, पेयजल, भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर समस्याएं सामने आने लगती हैं। इसलिए जलस्तर पर लगातार नजर रखना और समय रहते राहत एवं बचाव की तैयारी करना बेहद महत्वपूर्ण होगा।
गंडक के पानी में सिर्फ गांव नहीं, लोगों की उम्मीदें भी घिरीं
गोपालगंज में गंडक नदी का बढ़ता पानी फिलहाल करीब 36 गांवों के लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। खेत पानी में घिर रहे हैं, रास्ते प्रभावित हो रहे हैं और स्कूल परिसरों तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। ग्रामीण अपने घरों को पीछे छोड़कर ऊंचे स्थानों की ओर बढ़ रहे हैं।
बाढ़ हर वर्ष आती है, लेकिन हर बार किसी न किसी परिवार के लिए उसका अर्थ अलग होता है। किसी के लिए यह डूबती फसल है, किसी के लिए उजड़ता घर, किसी के लिए मवेशियों की चिंता और किसी के लिए बच्चों की पढ़ाई का रुक जाना। गंडक की धार इस समय गोपालगंज के गांवों में सिर्फ पानी नहीं ला रही, बल्कि उन परिवारों की परीक्षा भी ले रही है, जिनकी जिंदगी नदी के किनारे बसती है।
फिलहाल प्रशासन की नजर जलस्तर पर है और ग्रामीण सुरक्षित ठिकानों की ओर बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में नदी का जलस्तर और बढ़ता है या स्थिर होता है, इसी पर प्रभावित इलाकों की स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी।