चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र का अंतिम रिएक्टर 27 अक्टूबर 1995 को नहीं, बल्कि 15 दिसंबर 2000 को स्थायी रूप से बंद किया गया था। वर्ष 1995 में यूक्रेन और जी-7 देशों तथा यूरोपीय समुदाय के बीच संयंत्र को बंद करने की दिशा में समझौता हुआ था। इसलिए इस प्रसंग का ऐतिहासिक महत्व 1995 में बनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता और उसके बाद 2000 में पूरी हुई अंतिम बंदी से जुड़ा है।
1986 की दुर्घटना और संयंत्र का आगे संचालन
26 अप्रैल 1986 को चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र की यूनिट 4 में हुए विस्फोट और आग ने गंभीर रेडियोधर्मी प्रदूषण फैलाया। दुर्घटना के बाद भी संयंत्र की अन्य इकाइयाँ कुछ समय तक बिजली उत्पादन करती रहीं। यूनिट 2 को 1991 में आग से क्षति पहुँचने के बाद बंद कर दिया गया, जबकि यूनिट 1 ने 1996 में उत्पादन बंद किया। यूनिट 3 दुर्घटना के बाद भी चलती रही और अंततः पूरे संयंत्र की अंतिम परिचालन इकाई बनी।
1995 का अंतरराष्ट्रीय समझौता
दिसंबर 1995 में यूक्रेन, जी-7 देशों और यूरोपीय समुदाय के बीच चेरनोबिल संयंत्र को बंद करने से संबंधित समझौता हुआ। इसके तहत यूक्रेन ने संयंत्र को यथाशीघ्र बंद करने और उसके बाद निष्क्रियकरण की दिशा में कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई। समझौते के साथ ऊर्जा आपूर्ति, प्रभावित कर्मचारियों और स्थानीय समुदायों से जुड़ी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को संभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रश्न भी जुड़ा था।
अंतिम रिएक्टर कब बंद हुआ?
यूक्रेन की सरकार ने मार्च 2000 में यूनिट 3 को समय से पहले बंद करने और चेरनोबिल संयंत्र का परिचालन समाप्त करने का निर्णय लिया। 15 दिसंबर 2000 को स्थानीय समयानुसार दोपहर 1 बजकर 17 मिनट पर यूनिट 3 का रिएक्टर स्थायी रूप से बंद कर दिया गया। इसी के साथ चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र में बिजली उत्पादन समाप्त हो गया।

बंदी के बाद भी जारी रहा सुरक्षा का काम
रिएक्टर बंद होने का अर्थ यह नहीं था कि स्थल के सभी जोखिम समाप्त हो गए। इस्तेमाल किए गए परमाणु ईंधन का प्रबंधन, रेडियोधर्मी कचरे का सुरक्षित निपटान, क्षतिग्रस्त यूनिट 4 के ऊपर बने संरचनात्मक आवरण की निगरानी और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा लंबे समय तक चलने वाले कार्य हैं। संयंत्र को निष्क्रिय करना एक जटिल तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें कर्मचारियों की सुरक्षा और पर्यावरणीय निगरानी महत्वपूर्ण बनी रहती है।
ऐतिहासिक महत्व
चेरनोबिल का अंतिम बंद होना परमाणु सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और दुर्घटना के दीर्घकालिक परिणामों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। 1995 का समझौता बंदी की दिशा में राजनीतिक प्रतिबद्धता था, जबकि 15 दिसंबर 2000 वह तारीख थी जब अंतिम परिचालन रिएक्टर बंद हुआ। इन दोनों घटनाओं में अंतर करना इतिहास को सही संदर्भ में समझने के लिए जरूरी है।
