द्वितीय विश्व युद्ध के शुरुआती महीनों में अमेरिका के सामने एक कठिन सवाल था: यूरोप में फैल रहे युद्ध से सीधे दूर रहते हुए ब्रिटेन और फ्रांस जैसे मित्र देशों को किस तरह सहायता दी जाए? इसी बहस के बीच राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने अमेरिकी तटस्थता कानूनों में बदलाव की मांग की। “कैश एंड कैरी” नीति ने मित्र देशों को अमेरिकी सामान खरीदने का रास्ता दिया, लेकिन भुगतान और परिवहन की जिम्मेदारी खरीदार देशों पर रखी।
इस विषय में तारीख को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य-सुधार जरूरी है। रूजवेल्ट ने कांग्रेस के विशेष संयुक्त सत्र में तटस्थता कानूनों में बदलाव की अपील 21 सितंबर 1939 को की थी। संशोधित न्यूट्रैलिटी एक्ट, जिसने हथियारों की बिक्री पर लगा प्रतिबंध हटाकर उन्हें “कैश एंड कैरी” शर्तों के तहत बेचने की अनुमति दी, 4 नवंबर 1939 को कानून बना। इसलिए 17 अक्टूबर 1939 को कानून पारित होने या रूजवेल्ट की पहली अपील की तारीख कहना सही नहीं है।
यूरोप में युद्ध और अमेरिका की तटस्थता
1 सितंबर 1939 को नाजी जर्मनी ने पोलैंड पर हमला किया। इसके बाद ब्रिटेन और फ्रांस ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी और यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध फैल गया। अमेरिका में प्रथम विश्व युद्ध के अनुभव और युद्ध में फंसने की आशंका के कारण तटस्थता के पक्ष में मजबूत जनमत था। कांग्रेस ने पहले ऐसे कानून बनाए थे जो युद्धरत देशों को हथियार बेचने और उनसे व्यापार करने पर प्रतिबंध या कड़े नियंत्रण लगाते थे।
रूजवेल्ट का मानना था कि हथियारों पर व्यापक प्रतिबंध से सभी युद्धरत पक्षों पर समान असर नहीं पड़ता। ब्रिटेन और फ्रांस को जर्मनी के विरुद्ध रक्षा सामग्री की जरूरत थी, जबकि अमेरिकी सरकार युद्ध में सीधे शामिल होने से बचना चाहती थी। राष्ट्रपति ने कांग्रेस से कानून बदलने की अपील की, लेकिन इस प्रस्ताव पर अमेरिकी राजनीति में तीखी बहस हुई।

कैश एंड कैरी नीति का अर्थ क्या था?
“Cash and Carry” का शाब्दिक अर्थ है—नकद भुगतान करो और खरीदा हुआ सामान स्वयं ले जाओ। इस व्यवस्था के तहत युद्धरत देश अमेरिका से अनुमत सामान खरीद सकते थे, लेकिन उन्हें भुगतान तत्काल करना पड़ता था और सामान अपने या गैर-अमेरिकी जहाजों से ले जाने की जिम्मेदारी भी उनकी होती थी। अमेरिकी जहाजों को युद्धक्षेत्र तक माल पहुंचाने के जोखिम से बचाना इस नीति का एक अहम उद्देश्य था।
यह विचार पूरी तरह नया नहीं था। 1937 के न्यूट्रैलिटी एक्ट में गैर-सैन्य सामान के लिए सीमित “कैश एंड कैरी” व्यवस्था पहले से मौजूद थी। 1939 के संशोधन का बड़ा बदलाव यह था कि हथियारों और युद्ध-सामग्री पर लगा निर्यात प्रतिबंध हटाया गया और उनकी बिक्री भी नकद भुगतान तथा खरीदार द्वारा परिवहन की शर्तों के अधीन की जा सकती थी।
4 नवंबर 1939 का न्यूट्रैलिटी एक्ट
कांग्रेस में बहस और मतदान के बाद 4 नवंबर 1939 को संशोधित न्यूट्रैलिटी एक्ट पर हस्ताक्षर हुए। इस कानून ने अमेरिकी सरकार को युद्धरत देशों को हथियार बेचने की अनुमति दी, लेकिन उन्हें अमेरिकी जहाजों से युद्धरत बंदरगाहों तक पहुंचाने पर रोक और अन्य शर्तें भी लागू थीं। इस तरह अमेरिका ने औपचारिक रूप से युद्ध में प्रवेश किए बिना मित्र देशों को सैन्य सामग्री खरीदने का अवसर दिया।
नीति व्यवहार में ब्रिटेन और फ्रांस के लिए अपेक्षाकृत अधिक उपयोगी थी, क्योंकि उनके पास भुगतान करने के लिए विदेशी मुद्रा और समुद्री परिवहन की क्षमता थी। इस कारण कानून की भाषा भले ही युद्धरत देशों पर समान रूप से लागू होती थी, उसका व्यावहारिक लाभ सभी पक्षों को बराबर नहीं मिला।

क्या इससे अमेरिका युद्ध में शामिल हो गया?
नहीं। कैश एंड कैरी नीति ने अमेरिका को तत्काल युद्धरत पक्ष नहीं बनाया। यह तटस्थता बनाए रखने और साथ ही अमेरिकी सुरक्षा हितों के अनुरूप व्यापार की गुंजाइश बनाने का राजनीतिक समझौता था। फिर भी, जर्मनी के विरोधियों को हथियार खरीदने की अनुमति देने से अमेरिकी नीति मित्र देशों के लिए अधिक सहायक हुई। इसने तटस्थता और वास्तविक रणनीतिक समर्थन के बीच की सीमा को लेकर बहस को और तेज किया।
आगे चलकर अमेरिका ने मित्र देशों की मदद के लिए और कदम उठाए। 1941 में लेंड-लीज कार्यक्रम के माध्यम से ब्रिटेन, सोवियत संघ और अन्य सहयोगियों को व्यापक सहायता दी गई। दिसंबर 1941 में पर्ल हार्बर पर जापानी हमले और उसके बाद जर्मनी तथा इटली के खिलाफ युद्ध की स्थिति बनने पर अमेरिका स्वयं द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हो गया। कैश एंड कैरी इस व्यापक बदलाव के शुरुआती चरणों में से एक था, लेकिन इसे अमेरिका के युद्ध में प्रवेश के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
इस नीति का ऐतिहासिक महत्व
कैश एंड कैरी नीति ने दिखाया कि कोई देश औपचारिक युद्ध में शामिल हुए बिना भी व्यापार, हथियारों की बिक्री और परिवहन के नियमों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष को प्रभावित कर सकता है। यह अमेरिकी घरेलू राजनीति, अलगाववाद की भावना, राष्ट्रीय सुरक्षा और मित्र देशों की सहायता के बीच हुए समझौते का उदाहरण थी।
17 अक्टूबर 1939 को इस नीति से जुड़ी बहस जारी थी, लेकिन सही ऐतिहासिक क्रम यह है: रूजवेल्ट की कांग्रेस से प्रमुख अपील 21 सितंबर को हुई और संशोधित कानून 4 नवंबर 1939 को पारित हुआ। इन तारीखों का अंतर समझने से द्वितीय विश्व युद्ध के शुरुआती दौर में अमेरिकी विदेश नीति की दिशा अधिक स्पष्ट होती है।

