विश्व पर्यटन दिवस 2026 पर पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने दोहराया संकल्प, डिजिटल तकनीक, एआई और सतत पर्यटन के सहारे बिहार को देश-दुनिया के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की तैयारी
पटना, 27 सितंबर 2026। बिहार अब केवल धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन के लिए पहचाने जाने वाले राज्य की छवि से आगे बढ़कर विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य बनने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। वर्ष 2025 में राज्य में 6.62 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया है।
पर्यटकों की इस बढ़ती संख्या को देखते हुए बिहार सरकार पर्यटन स्थलों पर आधुनिक सुविधाएं विकसित करने, होटल और आतिथ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने तथा धार्मिक, बौद्ध, रामायण, सूफी और इको-टूरिज्म सर्किट को विस्तार देने पर जोर दे रही है।

विश्व पर्यटन दिवस 2026 के अवसर पर पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने बिहार को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने का संकल्प दोहराया।
बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की ओर से पटना के सिख हेरिटेज गुरुनानक भवन में आयोजित सेमिनार में पर्यटन मंत्री ने कहा कि इस वर्ष विश्व पर्यटन दिवस की अंतरराष्ट्रीय थीम “डिजिटल एजेंडा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता: पर्यटन को नया रूप देने के लिए” है।
उन्होंने कहा कि यह दिशा बिहार पर्यटन नीति-2023 के उद्देश्यों के अनुरूप है। सरकार पर्यटन को केवल घूमने-फिरने तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे रोजगार, निवेश, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जोड़कर आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
6.62 करोड़ पर्यटकों का आगमन, बढ़ा पर्यटन पर फोकस
बिहार में पर्यटन की संभावनाओं का अंदाजा वर्ष 2025 के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। इस वर्ष राज्य में 6.62 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे। बड़ी संख्या में पर्यटकों का बिहार आना राज्य की धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाता है।

सरकार अब इस बढ़ते पर्यटन को बेहतर बुनियादी सुविधाओं, ठहरने की व्यवस्था, परिवहन, डिजिटल जानकारी और मनोरंजन सुविधाओं से जोड़ने की कोशिश कर रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में पर्यटन विकास से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है और इन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की दिशा में काम चल रहा है।
सीतामढ़ी से सोनपुर तक बदलेंगे प्रमुख पर्यटन स्थल
बिहार में आने वाले पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें सीतामढ़ी के पुनौराधाम में माता सीता की जन्मस्थली पर भव्य मंदिर का निर्माण प्रमुख है। इससे सीतामढ़ी को धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
इसी तरह सोनपुर में बाबा हरिहरनाथ मंदिर कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन के साथ पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
बोधगया में 165 करोड़ रुपये की लागत से बौद्ध ध्यान एवं अनुभव केंद्र विकसित किया जा रहा है। बौद्ध धर्म से जुड़े देश-विदेश के पर्यटकों के लिए बोधगया पहले से ही महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में यह परियोजना बौद्ध पर्यटन को और विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सहरसा की मत्स्यगंधा झील में ग्लास ब्रिज
बिहार पर्यटन में धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के साथ प्राकृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा देने की तैयारी है। सहरसा की मत्स्यगंधा झील में ग्लास ब्रिज और अन्य पर्यटन सुविधाओं के विकास की योजना है।
वहीं वाल्मीकिनगर में लव-कुश पार्क विकसित किया जा रहा है। वर्ष 2026-27 में मत्स्यगंधा झील और वाल्मीकि पार्क को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे उत्तर बिहार के प्राकृतिक पर्यटन को भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
पटना, वैशाली और राजगीर में फाइव स्टार होटल की योजना
बिहार में पर्यटकों के बढ़ते आवागमन को देखते हुए उच्चस्तरीय ठहरने की सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल के माध्यम से राजगीर में दो, वैशाली में एक और पटना में दो फाइव स्टार होटल विकसित करने की योजनाओं पर काम चल रहा है।
इसके अलावा पटना, वैशाली और राजगीर में इको-टूरिज्म सुविधाओं को भी विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे घरेलू और विदेशी पर्यटकों के लिए ठहरने तथा पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
रामायण, बौद्ध और सूफी सर्किट से जुड़ेगा बिहार
बिहार के पर्यटन विकास की एक बड़ी रणनीति राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को अलग-अलग पर्यटन सर्किट से जोड़ना है।
रामायण सर्किट में पुनौराधाम, कुशेश्वरस्थान और सिंहेश्वर को शामिल किया गया है।
बौद्ध सर्किट में बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली प्रमुख केंद्र हैं। ये स्थल बौद्ध धर्म और प्राचीन भारतीय इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण स्थान हैं।
इसी तरह सूफी सर्किट में फुलवारी और मनेर को शामिल कर पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है।
‘स्वदेश दर्शन 2.0’ के तहत सोनपुर के उन्नयन, अंबिका भवानी मंदिर में पर्यटक सुविधाओं के विकास और गया में बौद्ध ध्यान केंद्र की स्थापना पर भी कार्य किया जा रहा है।
2026-27 में बिहार पर्यटन के लिए क्या हैं बड़े लक्ष्य?
सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए पर्यटन क्षेत्र से जुड़े कई लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- मत्स्यगंधा झील और वाल्मीकि पार्क की परियोजनाओं को पूरा करना।
- गया में 1,000 बेड क्षमता वाले धर्मशाला परिसर का निर्माण।
- घरेलू पर्यटक आगमन के मामले में बिहार को देश के शीर्ष 10 राज्यों में शामिल करने की दिशा में काम करना।
- विदेशी पर्यटक आगमन के मामले में बिहार को देश के शीर्ष पांच राज्यों में लाने का प्रयास।
- सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन के योगदान को राष्ट्रीय स्तर के 6.8 प्रतिशत तक बढ़ाने की दिशा में काम करना।
इन लक्ष्यों के पीछे पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की रणनीति है।
पर्यटकों के लिए डिजिटल सुविधाओं पर जोर
बिहार पर्यटन अब डिजिटल तकनीक को भी अपनी विकास रणनीति का अहम हिस्सा बना रहा है। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नन्द किशोर ने डिजिटल तकनीक और सतत पर्यटन पर जोर दिया।
पर्यटकों की सुविधा के लिए एकीकृत वेबसाइट और मोबाइल ऐप, ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली, GPS आधारित सेवाएं और रियल-टाइम पर्यटन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इसका सीधा फायदा बिहार आने वाले पर्यटकों को मिल सकता है। भविष्य में पर्यटक पर्यटन स्थलों, ठहरने की सुविधाओं और अन्य पर्यटन सेवाओं की जानकारी डिजिटल माध्यम से अधिक आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।
इको-टूरिज्म और पर्यावरण संरक्षण पर भी फोकस
बिहार पर्यटन के विकास में पर्यावरण संरक्षण को भी शामिल किया गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार राज्य सरकार सतत और जिम्मेदार पर्यटन को प्राथमिकता दे रही है।
पर्यावरण अनुकूल पहलों के साथ ई-वाहनों और रोपवे जैसे गैर-मोटराइज्ड परिवहन साधनों को बढ़ावा देने की योजना है। इसका उद्देश्य पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार करते हुए पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है।
पर्यटन में निवेश करने वालों को मिलेगी सब्सिडी
बिहार सरकार पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन पैकेज भी दे रही है। विभाग के अनुसार 10 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं के लिए 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी का प्रावधान है।
वहीं 50 करोड़ रुपये और उससे अधिक की परियोजनाओं के लिए 25 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग और महिला उद्यमियों के लिए विशेष पैकेज भी रखे गए हैं।
इसके अतिरिक्त भूमि रूपांतरण शुल्क और स्टाम्प ड्यूटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रावधान भी किया गया है।
एक लाख लोगों को प्रशिक्षण, एक लाख से ज्यादा रोजगार का लक्ष्य
पर्यटन के विस्तार के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर भी सरकार का जोर है। पर्यटन नीति की अवधि में एक लाख लोगों को कौशल विकास और प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसके साथ ही पर्यटन क्षेत्र से एक लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य है। बोधगया और वैशाली स्थित होटल प्रबंधन संस्थान उन्नत प्रशिक्षण संस्थानों के रूप में काम कर रहे हैं।
इसका अर्थ है कि पर्यटन स्थलों के विकास का असर केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि होटल, परिवहन, गाइड, खान-पान, हस्तशिल्प, स्थानीय कला और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
पर्यटकों के लिए बिहार में क्या बदल सकता है?
बिहार आने वाले पर्यटकों के लिए आने वाले समय में पर्यटन अनुभव में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। धार्मिक पर्यटन के लिए पुनौराधाम, हरिहरनाथ मंदिर और अंबिका भवानी मंदिर, बौद्ध पर्यटन के लिए बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली, प्राकृतिक एवं इको-टूरिज्म के लिए वाल्मीकिनगर और मत्स्यगंधा झील, जबकि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अनुभव के लिए राज्य के विभिन्न विरासत स्थलों को विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है।
इसके अलावा पटना, वैशाली और राजगीर में उच्चस्तरीय होटल सुविधाओं का विस्तार होने से अलग-अलग श्रेणी के पर्यटकों के लिए ठहरने के विकल्प बढ़ाने की योजना है।
पर्यटन को विरासत और रोजगार दोनों से जोड़ने की कोशिश
विश्व पर्यटन दिवस 2026 पर बिहार की पर्यटन रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि राज्य अपनी पुरानी धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ मंदिर कॉरिडोर, बौद्ध केंद्र और रामायण सर्किट जैसे प्रोजेक्ट हैं, तो दूसरी तरफ ग्लास ब्रिज, फाइव स्टार होटल, डिजिटल प्लेटफॉर्म और इको-टूरिज्म जैसी आधुनिक सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है।
पर्यटन विभाग के मुताबिक इन परियोजनाओं से पर्यटन अवसंरचना मजबूत होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा होंगे। विश्व पर्यटन दिवस 2026 का संदेश भी इसी दिशा को रेखांकित करता है—डिजिटल नवाचार, सतत विकास और समृद्ध विरासत को साथ लेकर बिहार को सुरक्षित, समावेशी, पर्यावरण-अनुकूल और विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करना।
कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित परिचर्चा में ADTOI पटना चैप्टर के चेयरमैन प्रभात कुमार, योर हेरिटेज की निदेशक रचना प्रियदर्शिनी, BIA के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, IIT पटना के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सम्राट मंडल, NIT पटना के एसोसिएट प्रोफेसर ज्योति प्रकाश सिंह और पनाश ग्रुप ऑफ होटल के महाप्रबंधक गिरीश सिन्हा ने भाग लिया।
कार्यक्रम में पर्यटन विभाग के पदाधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में स्थानीय लोकगायकों ने बिहार की पारंपरिक लोकगायन शैली की प्रस्तुति दी।