Bihar School Librarian Eligibility Test 2026: बिहार में पुस्तकालय विज्ञान की पढ़ाई कर सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने विद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा, 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
पात्र अभ्यर्थी 1 अक्टूबर 2026 से 21 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT मोड में होगी। खास बात यह है कि परीक्षा में 150 बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे और इसमें निगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं रखा गया है।
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने परीक्षा से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए आवेदन, परीक्षा पैटर्न, योग्यता और न्यूनतम उत्तीर्णांक समेत महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट किया है। लंबे समय से पुस्तकालयाध्यक्ष की बहाली का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए पात्रता परीक्षा का आयोजन रोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
1 अक्टूबर से शुरू होगा आवेदन, 21 अक्टूबर अंतिम तारीख
विद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 1 अक्टूबर से शुरू होकर 21 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। अभ्यर्थियों को निर्धारित वेबसाइट के माध्यम से आवेदन करना होगा। परीक्षा की तारीख और अन्य विस्तृत कार्यक्रम बोर्ड की ओर से आगे जारी किया जाएगा।
बोर्ड की ओर से पात्रता परीक्षा की पूरी रूपरेखा पहले ही स्पष्ट कर दी गई है, जिससे अभ्यर्थियों को तैयारी की दिशा तय करने में सुविधा होगी। परीक्षा को लेकर आवेदन की तारीख पहले से घोषित होने से पुस्तकालय विज्ञान के विद्यार्थियों को तैयारी के लिए भी पर्याप्त समय मिलेगा।
150 अंकों की होगी परीक्षा, पुस्तकालय विज्ञान पर सबसे ज्यादा फोकस
विद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा में कुल 150 अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे। इसमें 100 अंक पुस्तकालय विज्ञान से संबंधित होंगे, जबकि 50 अंक सामान्य ज्ञान पर आधारित होंगे।
इस तरह परीक्षा में पुस्तकालय विज्ञान के विषय को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। यह व्यवस्था इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि विद्यालय में पुस्तकालयाध्यक्ष की जिम्मेदारी केवल किताबों को व्यवस्थित करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने, पुस्तकालय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और पढ़ने की आदत विकसित करने में भी उनकी भूमिका होती है।
परीक्षा का पाठ्यक्रम राज्य के मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय विज्ञान की स्नातक डिग्री के लिए लागू पाठ्यक्रम के अनुरूप रखा गया है। इससे संबंधित डिग्रीधारी अभ्यर्थियों को अपने स्नातक स्तर के विषयों की व्यवस्थित तैयारी करने का अवसर मिलेगा।
ढाई घंटे में पूरी होगी परीक्षा, नहीं होगी निगेटिव मार्किंग
परीक्षा CBT यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट के माध्यम से आयोजित की जाएगी। परीक्षा की अवधि 150 मिनट यानी ढाई घंटे होगी। सभी प्रश्न बहुविकल्पीय होंगे और प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा।
अभ्यर्थियों के लिए राहत की बात यह है कि परीक्षा में Negative Marking नहीं होगी। यानी गलत उत्तर देने पर अंक नहीं काटे जाएंगे। इससे अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र हल करने के दौरान अधिक स्वतंत्रता मिलेगी और अनावश्यक नकारात्मक अंक के डर के बिना वे सभी प्रश्नों का प्रयास कर सकेंगे।
बिहार के निवासी ही कर सकेंगे आवेदन
पात्रता परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदक का बिहार का निवासी होना अनिवार्य है। शैक्षणिक योग्यता के तौर पर निर्धारित अंकों के साथ स्नातक की डिग्री के अलावा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक की डिग्री जरूरी बताई गई है।
सामान्य अभ्यर्थियों के लिए स्नातक में न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं। निर्धारित आरक्षित श्रेणियों में पांच प्रतिशत तक की छूट का प्रावधान है। इसके अलावा पात्रता परीक्षा और नियुक्ति के प्रथम समव्यवहार में अधिकतम आयु सीमा में 10 वर्ष की छूट का प्रावधान पहले जारी नियमावली में किया गया था।
न्यूनतम उत्तीर्णांक भी तय
पात्रता परीक्षा में अलग-अलग श्रेणियों के लिए न्यूनतम उत्तीर्णांक निर्धारित किए गए हैं।
- सामान्य वर्ग – 50 प्रतिशत
- पिछड़ा वर्ग – 45.5 प्रतिशत
- अत्यंत पिछड़ा वर्ग – 42.5 प्रतिशत
- अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति – 40 प्रतिशत
- दिव्यांग अभ्यर्थी – 40 प्रतिशत
- महिला अभ्यर्थी – 40 प्रतिशत
इस व्यवस्था से अलग-अलग सामाजिक श्रेणियों के अभ्यर्थियों को निर्धारित मानकों के अनुसार पात्रता हासिल करने का अवसर मिलेगा।
बेरोजगारी के दौर में क्यों महत्वपूर्ण है यह परीक्षा?
बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं जिन्होंने पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में पढ़ाई की है, लेकिन सरकारी विद्यालयों में नियमित अवसर सीमित रहने के कारण लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार करते रहे हैं। ऐसे में पात्रता परीक्षा का आयोजन सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि पुस्तकालय विज्ञान के डिग्रीधारी युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाओं को आगे बढ़ाने वाली प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
2025 में राज्य सरकार की ओर से माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में लगभग 6,500 पुस्तकालयाध्यक्ष पदों पर नियुक्ति की योजना सामने आई थी। कैबिनेट स्तर पर नियमावली को मंजूरी के बाद नियुक्ति का रास्ता तैयार हुआ और पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए पात्रता परीक्षा को आवश्यक योग्यता बनाया गया।
इस लिहाज से 2026 की पात्रता परीक्षा उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है जो लंबे समय से पुस्तकालयाध्यक्ष की नौकरी की तैयारी कर रहे हैं।
वर्षों से खाली पड़े पदों को भरना क्यों जरूरी?
विद्यालयों में पुस्तकालय केवल किताबों का कमरा नहीं है। विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, संदर्भ सामग्री तक पहुंच और अतिरिक्त ज्ञान विकसित करने में पुस्तकालय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन पुस्तकालयाध्यक्ष का पद लंबे समय तक खाली रहने से उपलब्ध संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं हो पाता।
बिहार में पुस्तकालयाध्यक्षों की नियमित बहाली को लेकर वर्षों से अभ्यर्थियों की मांग रही है। उपलब्ध रिपोर्टों में बहाली के अंतिम वर्ष को लेकर अलग-अलग विवरण मिलते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार सरकारी स्कूलों में अंतिम नियमित बहाली 2008 के आसपास हुई थी, जिसके बाद करीब 18 वर्षों का अंतराल रहा। वहीं 2025 की रिपोर्टों में माध्यमिक विद्यालयों में इससे पहले की नियुक्ति 2011-12 में होने का उल्लेख मिलता है।
इसलिए इसे सीधे एक ही वर्ष से जोड़ने के बजाय यह कहना अधिक उचित है कि बिहार में पुस्तकालयाध्यक्षों की नियमित/नई बहाली लंबे समय से लंबित रही है और कई वर्षों के अंतराल के बाद अब नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
नई नियमावली के बाद प्रक्रिया को मिला संस्थागत आधार
पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए बिहार सरकार ने 2025 में अलग नियमावली लागू की थी। इसके तहत माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया और पात्रता परीक्षा को नियुक्ति प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।
यही वजह है कि BSEB की ओर से विद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी होना अभ्यर्थियों के लिए अहम माना जा रहा है। पात्रता परीक्षा में सफलता के बाद नियुक्ति की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एस.एम. की भूमिका से अभ्यर्थियों को मिली स्पष्टता
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एस.एम. की ओर से परीक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी को स्पष्ट रूप से सामने रखा जाना अभ्यर्थियों के लिए उपयोगी है। आवेदन की तारीख, परीक्षा का पैटर्न, विषयवार अंक, समय सीमा, निगेटिव मार्किंग, योग्यता और न्यूनतम उत्तीर्णांक जैसे बिंदुओं की जानकारी मिलने से अभ्यर्थियों के बीच परीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता कम होगी।
खासकर लंबे समय से इस क्षेत्र में अवसर की प्रतीक्षा कर रहे युवाओं के लिए परीक्षा की स्पष्ट रूपरेखा तैयारी को व्यवस्थित करने में मदद करेगी। बोर्ड स्तर पर परीक्षा की प्रक्रिया को स्पष्ट और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है।
युवाओं के लिए सिर्फ परीक्षा नहीं, रोजगार की उम्मीद
बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच प्रत्येक नए भर्ती अवसर का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि एक पद के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रतिस्पर्धा करते हैं। पुस्तकालय विज्ञान के डिग्रीधारी युवाओं के लिए यह अवसर इसलिए अलग है क्योंकि यह उनके विषय से सीधे जुड़ा हुआ है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि पात्रता परीक्षा के बाद पुस्तकालयाध्यक्ष के रिक्त पदों पर नियुक्ति की अगली प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है। अभ्यर्थियों की अपेक्षा होगी कि परीक्षा के बाद नियुक्ति प्रक्रिया भी अनावश्यक विलंब के बिना पूरी हो और लंबे समय से खाली पड़े विद्यालयों के पुस्तकालयों को नियमित पुस्तकालयाध्यक्ष मिल सकें।
कुल मिलाकर, विद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा 2026 बिहार के उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर है, जिन्होंने पुस्तकालय विज्ञान को करियर के रूप में चुना है। 1 अक्टूबर से आवेदन शुरू होने के साथ ही अब हजारों अभ्यर्थियों की तैयारी परीक्षा पर केंद्रित होगी। असली सफलता तब मानी जाएगी जब पात्रता परीक्षा के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया भी निर्धारित समयसीमा में आगे बढ़े और विद्यालयों को लंबे इंतजार के बाद पुस्तकालयाध्यक्ष मिलें।