20 अक्टूबर 1827 को भूमध्यसागर के पूर्वी हिस्से में स्थित नवारीनो खाड़ी—आज के ग्रीस के पाइलोस के पास—एक निर्णायक समुद्री युद्ध की गवाह बनी। ब्रिटेन, फ्रांस और रूस के संयुक्त बेड़े ने मिस्र और उस्मानी साम्राज्य की संयुक्त नौसैनिक शक्ति को भारी नुकसान पहुँचाया। इस संघर्ष को बैटल ऑफ नेवारिनो (Battle of Navarino) कहा जाता है। इसने यूनान के स्वतंत्रता संग्राम की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ग्रीस की स्वतंत्रता की पृष्ठभूमि
उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में यूनानी राष्ट्रवादी उस्मानी साम्राज्य के शासन से स्वतंत्रता हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। 1821 में शुरू हुआ विद्रोह कई वर्षों तक चला। संघर्ष में स्थानीय यूनानी सेनाओं के साथ-साथ यूरोप के उन लोगों और समूहों का समर्थन भी जुड़ा, जो यूनानी स्वतंत्रता को प्राचीन यूनानी विरासत और राष्ट्रीय आत्मनिर्णय के विचार से जोड़कर देखते थे।
युद्ध लंबा खिंचने के साथ हालात जटिल होते गए। उस्मानी सुल्तान ने मिस्र के शासक मुहम्मद अली की सैन्य सहायता ली। उनके पुत्र इब्राहिम पाशा के नेतृत्व में मिस्री सेना और बेड़े ने यूनानी विद्रोहियों के विरुद्ध अभियान चलाया। यूरोपीय शक्तियों को आशंका थी कि संघर्ष जारी रहने से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी और पूर्वी भूमध्यसागर में शक्ति-संतुलन प्रभावित होगा।
ब्रिटेन, फ्रांस और रूस क्यों एक साथ आए?
ब्रिटेन, फ्रांस और रूस के हित पूरी तरह समान नहीं थे, लेकिन तीनों शक्तियाँ यूनान के प्रश्न पर हस्तक्षेप के लिए सहमत हुईं। जुलाई 1827 की लंदन संधि का उद्देश्य लड़ाई रोकने और यूनान के लिए स्वायत्तता की व्यवस्था की दिशा में प्रयास करना था। इसके बाद तीनों देशों के संयुक्त बेड़े को संघर्षविराम लागू कराने और उस्मानी-मिस्री सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए भेजा गया।

संयुक्त बेड़े की कमान ब्रिटिश एडमिरल एडवर्ड कोडरिंगटन के हाथ में थी। फ्रांसीसी और रूसी नौसैनिक कमांडरों ने भी इस अभियान में हिस्सा लिया। बेड़े का उद्देश्य केवल एक समुद्री लड़ाई जीतना नहीं था; वह यूनान के भविष्य और यूरोपीय कूटनीति से जुड़े व्यापक प्रश्न का हिस्सा बन चुका था।
नवारीनो की खाड़ी में क्या हुआ?
20 अक्टूबर 1827 को मित्र देशों का बेड़ा नवारीनो की खाड़ी में दाखिल हुआ, जहाँ उस्मानी और मिस्री जहाज मौजूद थे। तनाव तेजी से बढ़ा और गोलीबारी शुरू हो गई। खाड़ी में जहाजों की सघन तैनाती के कारण युद्ध बेहद तीव्र हुआ। मित्र देशों के जहाजों की बेहतर समन्वित मारक क्षमता और प्रशिक्षण ने उन्हें निर्णायक बढ़त दी। दिन के अंत तक उस्मानी-मिस्री बेड़े का बड़ा हिस्सा डूब चुका था या लड़ने की स्थिति में नहीं रहा।
यह युद्ध नौसैनिक इतिहास में इसलिए भी उल्लेखनीय है कि पाल वाले युद्धपोतों के युग में यह प्रमुख बेड़ों के बीच लड़ी गई अंतिम बड़ी लड़ाइयों में से एक था। आधुनिक भाप-चालित नौसेनाओं का दौर अभी पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ था, लेकिन नवारीनो ने दिखाया कि समुद्री शक्ति, तोपखाने और बेड़े के समन्वय का परिणाम कितना निर्णायक हो सकता है।
क्या इस युद्ध ने तुरंत ग्रीस को स्वतंत्र कर दिया?
नवारीनो की जीत ने यूनानी स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत किया, लेकिन स्वतंत्रता उसी दिन औपचारिक रूप से प्राप्त नहीं हुई। युद्ध के बाद उस्मानी-मिस्री पक्ष की सैन्य क्षमता कमजोर हुई और यूरोपीय हस्तक्षेप ने यूनान के प्रश्न पर दबाव बढ़ाया। इसके बाद भी कूटनीतिक बातचीत, सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय शक्ति-संघर्ष जारी रहे। 1830 में प्रमुख यूरोपीय शक्तियों ने यूनान की स्वतंत्रता को मान्यता दी; 1832 की व्यवस्थाओं के बाद एक स्वतंत्र यूनानी राज्य की स्थापना का रास्ता और स्पष्ट हुआ।

इसलिए नवारीनो को स्वतंत्रता का अकेला कारण कहना इतिहास को सरल बना देना होगा। यूनानी लोगों का लंबा संघर्ष, राजनीतिक नेतृत्व, स्थानीय प्रतिरोध और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति—सभी ने परिणाम को आकार दिया। फिर भी 1827 की यह समुद्री जीत निर्णायक मोड़ थी, क्योंकि इसने उस्मानी-मिस्री सैन्य दबाव को कम किया और यूरोपीय शक्तियों की भूमिका को मजबूत बनाया।
यूरोपीय राजनीति पर प्रभाव
नवारीनो की लड़ाई ने पूर्वी भूमध्यसागर में शक्ति-संतुलन को प्रभावित किया और यह दिखाया कि यूरोपीय शक्तियाँ मानवीय, रणनीतिक और कूटनीतिक तर्कों के मिश्रण के आधार पर हस्तक्षेप कर सकती थीं। हालांकि तीनों देशों की नीतियाँ और दीर्घकालिक हित अलग थे, संयुक्त कार्रवाई ने यूनान के भविष्य पर अंतरराष्ट्रीय निर्णयों को गति दी। इस घटना को अक्सर उस दौर की यूरोपीय कूटनीति और राष्ट्रवाद के इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में पढ़ा जाता है।
इतिहास में बैटल ऑफ नेवारिनो का महत्व
20 अक्टूबर 1827 का युद्ध याद दिलाता है कि किसी राष्ट्र की स्वतंत्रता का मार्ग केवल एक लड़ाई से नहीं बनता। लंबे जन-संघर्ष, राजनीतिक उद्देश्य, सैन्य घटनाएँ और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियाँ एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं। नवारीनो की खाड़ी में हुई जीत ने यूनान के स्वतंत्रता संग्राम को निर्णायक सहायता दी और आधुनिक यूरोपीय इतिहास में ग्रीस के स्वतंत्र राज्य के उदय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
