7 नवंबर 2020 अमेरिकी लोकतांत्रिक इतिहास का वह दिन बना, जब चार दिनों से जारी मतगणना के बाद प्रमुख समाचार संस्थानों ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडेन को राष्ट्रपति चुनाव का विजेता घोषित करना शुरू किया। एसोसिएटेड प्रेस (AP) ने सुबह 11:25 बजे ईस्टर्न टाइम पर पेन्सिल्वेनिया राज्य बाइडेन के पक्ष में घोषित किया और एक मिनट बाद, 11:26 बजे, उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का विजेता बताया। इस घोषणा के साथ बाइडेन के अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बनने का रास्ता स्पष्ट हो गया।
यह मतदान का दिन नहीं था—मतदान 3 नवंबर 2020 को हुआ था। 7 नवंबर की तारीख इसलिए ऐतिहासिक बनी क्योंकि कई राज्यों में डाक मतपत्रों और अन्य मतों की गिनती जारी रहने के कारण परिणाम आने में समय लगा। पेन्सिल्वेनिया में बाइडेन की बढ़त ने चुनावी गणित बदल दिया और उन्हें इलेक्टोरल कॉलेज में जीत के लिए आवश्यक 270 मतों से आगे पहुंचा दिया।
3 नवंबर को मतदान, लेकिन नतीजे में देरी क्यों?
2020 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव कोविड-19 महामारी के बीच हुआ। महामारी के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं ने डाक या पहले से मतदान की सुविधा अपनाई। अलग-अलग राज्यों में डाक मतपत्रों को खोलने और गिनने के नियम अलग थे। कई जगह चुनाव-दिवस से पहले मतपत्रों की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति थी, जबकि कुछ राज्यों में गिनती मतदान के बाद ही शुरू हो सकती थी।
शुरुआती रुझानों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई राज्यों में आगे दिखाई दिए, क्योंकि कई स्थानों पर पहले व्यक्तिगत रूप से डाले गए मतों की गिनती हुई। बाद में डाक मतपत्रों की गिनती बढ़ने पर बाइडेन ने महत्वपूर्ण राज्यों में बढ़त हासिल की। इस बदलाव को मीडिया कवरेज में कभी-कभी ‘रेड मिराज’ और ‘ब्लू शिफ्ट’ कहा गया—अर्थात शुरुआती रुझानों में रिपब्लिकन उम्मीदवार की बढ़त और बाद में डाक मतपत्रों के जुड़ने से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार की स्थिति मजबूत होना। यह हर राज्य में एक जैसा नहीं था, बल्कि मतगणना के क्रम और राज्य-विशिष्ट नियमों से जुड़ा रुझान था।

पेन्सिल्वेनिया क्यों बना निर्णायक राज्य?
पेन्सिल्वेनिया के पास 20 इलेक्टोरल वोट थे। 2016 के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने यह राज्य जीता था, इसलिए 2020 में इसका पलटना विशेष महत्व रखता था। 7 नवंबर की सुबह तक बाइडेन ने वहां ऐसी बढ़त बना ली थी कि शेष बचे मतों से ट्रंप के उन्हें पीछे छोड़ने की संभावना नहीं रह गई थी। AP ने सुबह 11:25 बजे पेन्सिल्वेनिया में बाइडेन की जीत घोषित की। उस समय AP के अनुसार उनकी बढ़त लगभग 34,243 मतों की थी।
पेन्सिल्वेनिया के 20 इलेक्टोरल वोटों के साथ बाइडेन 270 के आवश्यक आंकड़े को पार कर गए। AP ने 11:26 बजे राष्ट्रपति पद के चुनाव में उनकी जीत घोषित की। इस घोषणा के बाद अन्य प्रमुख समाचार संस्थानों और टेलीविजन नेटवर्कों ने भी बाइडेन को विजेता/प्रेसिडेंट-इलेक्ट घोषित किया।
मीडिया की घोषणा और आधिकारिक प्रमाणन में अंतर
इस घटना को समझने के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है कि समाचार संस्थानों द्वारा विजेता घोषित करना और राज्य द्वारा चुनाव परिणामों का आधिकारिक प्रमाणन एक ही प्रक्रिया नहीं है। AP और अन्य मीडिया संस्थान उपलब्ध मतगणना, शेष मतों और चुनावी गणित का विश्लेषण करके यह तय करते हैं कि किसी उम्मीदवार की जीत निश्चित है। यह पत्रकारिता-आधारित चुनावी घोषणा होती है, न कि सरकारी प्रमाणपत्र।
पेन्सिल्वेनिया ने 24 नवंबर 2020 को सभी 67 काउंटियों के प्रमाणित परिणामों के आधार पर राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आधिकारिक रूप से प्रमाणित किए। प्रमाणित आंकड़ों के अनुसार बाइडेन को 34,58,229 और ट्रंप को 33,77,674 मत मिले। बाइडेन की अंतिम बढ़त 80,555 मतों की रही। इसलिए 7 नवंबर को मीडिया की घोषणा को चुनावी जीत की निर्णायक सार्वजनिक पहचान के रूप में देखना चाहिए, जबकि राज्य का औपचारिक प्रमाणन बाद में हुआ।

जो बाइडेन: अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति
जोसेफ रॉबिनेट बाइडेन जूनियर का जन्म 20 नवंबर 1942 को पेनसिल्वेनिया के स्क्रैंटन में हुआ था। वह डेलावेयर से लंबे समय तक अमेरिकी सीनेटर रहे और 2009 से 2017 तक राष्ट्रपति बराक ओबामा के उपराष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। 2020 में उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती दी।
बाइडेन की जीत ने उन्हें अमेरिका का 46वां राष्ट्रपति बनाया। उन्होंने 20 जनवरी 2021 को शपथ ली। आधिकारिक इलेक्टोरल कॉलेज परिणाम में बाइडेन को 306 और ट्रंप को 232 वोट मिले। राष्ट्रीय लोकप्रिय मतों में भी बाइडेन आगे रहे।
कमला हैरिस: पहली महिला उपराष्ट्रपति
बाइडेन के साथ उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिस थीं। 7 नवंबर की जीत की घोषणा के साथ हैरिस के अमेरिका की पहली महिला, पहली अश्वेत और पहली दक्षिण एशियाई मूल की उपराष्ट्रपति बनने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ। उन्होंने 20 जनवरी 2021 को उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली। उनकी उपलब्धि अमेरिकी राजनीति में प्रतिनिधित्व और विविधता के लिहाज से ऐतिहासिक मानी गई।
ट्रंप की प्रतिक्रिया और चुनाव के बाद की चुनौतियां
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 नवंबर को हार स्वीकार नहीं की। उनके अभियान ने कई राज्यों में कानूनी चुनौतियां दायर कीं और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हालांकि अदालतों में दायर मुकदमों और पुनर्गणना प्रक्रियाओं से परिणाम बदलने लायक कोई प्रमाण सामने नहीं आया। पेन्सिल्वेनिया के अधिकारियों ने 24 नवंबर को परिणाम प्रमाणित किए।

14 दिसंबर 2020 को इलेक्टोरल कॉलेज के निर्वाचकों ने औपचारिक रूप से मतदान किया। बाइडेन को 306 और ट्रंप को 232 इलेक्टोरल वोट मिले। 6 जनवरी 2021 को कांग्रेस के संयुक्त सत्र में मतों की गणना और पुष्टि की प्रक्रिया हुई। कैपिटल में हिंसा के कारण कार्यवाही बाधित हुई, लेकिन कांग्रेस ने 7 जनवरी की सुबह परिणाम की पुष्टि पूरी की। 20 जनवरी 2021 को बाइडेन और हैरिस ने पद की शपथ ली।
7 नवंबर 2020 का ऐतिहासिक महत्व
7 नवंबर 2020 अमेरिकी चुनावी इतिहास में कई कारणों से याद किया जाता है। इस दिन महामारी के बीच हुए चुनाव की लंबी मतगणना के बाद पेन्सिल्वेनिया का परिणाम सामने आया और बाइडेन की जीत की मीडिया घोषणा हुई। इसने सत्ता परिवर्तन की दिशा स्पष्ट की और कमला हैरिस के रूप में अमेरिका को पहली महिला उपराष्ट्रपति मिलने की संभावना पक्की की।
इस घटना ने यह भी रेखांकित किया कि लोकतांत्रिक चुनाव केवल मतदान तक सीमित नहीं होते। मतों की पारदर्शी गिनती, राज्यों द्वारा प्रमाणन, इलेक्टोरल कॉलेज की प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका मिलकर अंतिम परिणाम तय करती हैं। इसलिए 7 नवंबर की मीडिया घोषणा एक निर्णायक क्षण थी, लेकिन औपचारिक चुनावी प्रक्रिया उसके बाद भी जारी रही।
ऐतिहासिक तथ्य एक नजर में
- मतदान की तारीख: 3 नवंबर 2020
- पेन्सिल्वेनिया में AP की जीत घोषणा: 7 नवंबर 2020, सुबह 11:25 बजे (ईस्टर्न टाइम)
- AP द्वारा राष्ट्रपति चुनाव में बाइडेन की जीत की घोषणा: 7 नवंबर 2020, सुबह 11:26 बजे (ईस्टर्न टाइम)
- पेन्सिल्वेनिया के इलेक्टोरल वोट: 20
- पेन्सिल्वेनिया का प्रमाणित परिणाम: बाइडेन 34,58,229; ट्रंप 33,77,674
- पेन्सिल्वेनिया में अंतिम जीत का अंतर: 80,555 मत
- इलेक्टोरल कॉलेज परिणाम: बाइडेन 306, ट्रंप 232
- शपथ ग्रहण: 20 जनवरी 2021
