2 नवंबर 1833 को बंगाल के पैकपाड़ा (वर्तमान हावड़ा क्षेत्र) में डॉ. महेन्द्रलाल सरकार का जन्म हुआ था। वे उन्नीसवीं सदी के उन भारतीय चिकित्सकों, विचारकों और संस्थान-निर्माताओं में शामिल थे जिन्होंने आधुनिक विज्ञान की शिक्षा और अनुसंधान को भारत में मजबूत आधार देने का सपना देखा। चिकित्सा के क्षेत्र में वे होम्योपैथी के प्रमुख प्रचारकों में गिने गए, जबकि उनकी सबसे स्थायी राष्ट्रीय विरासत इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस (IACS) की स्थापना रही।
साधारण परिवेश से चिकित्सा शिक्षा तक
महेन्द्रलाल सरकार का जन्म 2 नवंबर 1833 को पैकपाड़ा, हावड़ा में हुआ था। कम उम्र में माता-पिता को खो देने के बाद उनका पालन-पोषण कलकत्ता में उनके मामा-परिवार ने किया। शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने डेविड हेयर के स्कूल और हिंदू कॉलेज में अध्ययन किया। विज्ञान के प्रयोगात्मक अध्ययन की सीमित उपलब्धता से असंतुष्ट होकर उन्होंने चिकित्सा की पढ़ाई का रास्ता चुना और 1850 के दशक में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया।
उन्होंने 1860 में चिकित्सा, शल्य-चिकित्सा और प्रसूति-विज्ञान से जुड़ी LMS योग्यता प्राप्त की तथा 1863 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से MD की उपाधि हासिल की। उस दौर में किसी भारतीय के लिए यह उल्लेखनीय शैक्षणिक उपलब्धि थी। चिकित्सा-व्यवसाय के साथ-साथ वे सार्वजनिक बहस, लेखन और विज्ञान शिक्षा के प्रश्नों में भी सक्रिय रहे।
होम्योपैथी की ओर उनका रुख
सरकार ने अपनी चिकित्सा शिक्षा प्रचलित पश्चिमी/एलोपैथिक पद्धति में प्राप्त की थी। शुरुआती दौर में वे होम्योपैथी के आलोचक थे, लेकिन बाद में उसके सिद्धांतों और उपचार-पद्धति का अध्ययन करने के बाद स्वयं होम्योपैथी के समर्थक और चिकित्सक बने। 1867 में उनके इस बदलाव ने शिक्षित बंगाली समाज में व्यापक चर्चा पैदा की। उन्होंने होम्योपैथी के विचारों के प्रसार के लिए लेखन और चिकित्सा-सेवा का सहारा लिया।

जनवरी 1868 में उन्होंने The Calcutta Journal of Medicine का प्रकाशन शुरू किया। इस पत्रिका के माध्यम से चिकित्सा-विचारों और होम्योपैथी पर विमर्श को मंच मिला। उनके योगदान का ऐतिहासिक उल्लेख करते समय यह अंतर समझना जरूरी है कि होम्योपैथी का प्रचार करना और किसी उपचार-पद्धति का आधुनिक वैज्ञानिक परीक्षणों से प्रभावी सिद्ध होना दो अलग बातें हैं। आज चिकित्सा-निर्णय प्रमाण-आधारित अनुसंधान और स्थापित नैदानिक दिशानिर्देशों के अनुसार किए जाते हैं।
IACS: भारत में विज्ञान अनुसंधान की स्वदेशी पहल
महेन्द्रलाल सरकार का सबसे दूरगामी योगदान भारत में विज्ञान के स्वतंत्र अध्ययन और अनुसंधान के लिए संस्थागत मंच तैयार करना था। उनका मानना था कि भारतीयों को केवल विदेशों में विकसित ज्ञान का उपभोग नहीं करना चाहिए, बल्कि अपने देश में भी प्रयोग, अनुसंधान और वैज्ञानिक खोज की क्षमता विकसित करनी चाहिए। इसी सोच से उन्होंने 29 जुलाई 1876 को कलकत्ता में इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस (IACS) की स्थापना की।
IACS को भारतीयों द्वारा संचालित विज्ञान-अनुसंधान के शुरुआती प्रमुख संस्थानों में गिना जाता है। इसकी स्थापना के पीछे सरकार का उद्देश्य विज्ञान को विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर आम शिक्षित समाज, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए व्याख्यान, प्रयोगशाला और अनुसंधान के अवसर उपलब्ध कराना था। उन्होंने सार्वजनिक चंदे, सहयोग और अपने निजी संसाधनों से इस संस्था को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।
समय के साथ IACS भारतीय विज्ञान के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बना। बाद के वर्षों में इसी संस्थान में सी. वी. रमन ने प्रकाश के प्रकीर्णन पर वे प्रयोग किए जिनसे रमन प्रभाव की खोज का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह उपलब्धि 1930 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से जुड़ी। इस तरह सरकार द्वारा बोया गया संस्थागत बीज आने वाली पीढ़ियों के वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए उपयोगी आधार बना।

समाज सुधार, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन
सरकार केवल चिकित्सक नहीं थे। वे विज्ञान शिक्षा के प्रसार, भारतीयों में बौद्धिक आत्मनिर्भरता और सार्वजनिक संस्थाओं के निर्माण के पक्षधर थे। उन्होंने व्याख्यानों, लेखों और संगठनों के माध्यम से यह विचार रखा कि आधुनिक विज्ञान का अध्ययन भारतीय समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है। वे उस बंगाल नवजागरण के व्यापक बौद्धिक वातावरण का हिस्सा थे जिसमें शिक्षा, सामाजिक सुधार, चिकित्सा और वैज्ञानिक चिंतन पर नई बहसें आकार ले रही थीं।
उनका दृष्टिकोण इस मायने में उल्लेखनीय था कि उन्होंने विज्ञान को केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या पेशेवर उन्नति का साधन नहीं माना। वे चाहते थे कि भारतीय समाज में वैज्ञानिक जिज्ञासा, प्रयोगशीलता और संस्थागत अनुसंधान की संस्कृति विकसित हो।
निधन और विरासत
महेन्द्रलाल सरकार का निधन 23 फरवरी 1904 को हुआ। उनके जीवन की विरासत दो अलग लेकिन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दिखाई देती है—एक ओर उन्नीसवीं सदी के भारत में होम्योपैथी के प्रसार में उनकी भूमिका, और दूसरी ओर विज्ञान अनुसंधान को भारतीय समाज में संस्थागत आधार देने का उनका प्रयास। उनके द्वारा स्थापित IACS ने आगे चलकर भारतीय विज्ञान के इतिहास में उल्लेखनीय स्थान बनाया।
2 नवंबर को उनकी जयंती केवल एक चिकित्सक को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उस विचार को भी समझने का दिन है कि किसी देश की वैज्ञानिक प्रगति के लिए प्रतिभा के साथ-साथ संस्थान, शिक्षा, प्रयोगशालाएं और सार्वजनिक सहयोग भी जरूरी होते हैं। महेन्द्रलाल सरकार का जीवन इसी संस्थागत दृष्टि का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

संक्षिप्त तथ्य
- जन्म: 2 नवंबर 1833, पैकपाड़ा, हावड़ा, बंगाल
- शिक्षा: कलकत्ता मेडिकल कॉलेज; MD, 1863
- चिकित्सा क्षेत्र: होम्योपैथी के प्रमुख भारतीय प्रचारकों में शामिल
- पत्रिका: The Calcutta Journal of Medicine, 1868 से
- संस्था: इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस की स्थापना, 29 जुलाई 1876
- निधन: 23 फरवरी 1904
महेन्द्रलाल सरकार की सबसे बड़ी ऐतिहासिक सीख यह है कि वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता केवल विचारों से नहीं, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान और मजबूत संस्थानों के निर्माण से हासिल होती है।
