यूरोप: 2026 की गर्मियों में यूरोप के शहरों में भीषण गर्मी से जुड़े अनुमानित 50,391 अतिरिक्त मौतें हुईं। वैज्ञानिकों के नए अध्ययन के अनुसार, इनमें से लगभग 32,619 मौतें—करीब 65 प्रतिशत—मानवजनित जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ी गर्मी से जुड़ी थीं। शोधकर्ताओं ने चेताया है कि ये आंकड़े पूरे महाद्वीप की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाते, क्योंकि विश्लेषण सीमित शहरी क्षेत्रों पर आधारित है और मई की एक घातक गर्म लहर को इसमें शामिल नहीं किया गया।
854 शहरों के आंकड़ों पर आधारित अध्ययन
इम्पीरियल कॉलेज लंदन और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने यूरोप के 30 देशों के 854 शहरी क्षेत्रों में जून से अगस्त 2026 के तापमान और मृत्यु-दर का विश्लेषण किया। इन क्षेत्रों में शामिल आबादी संबंधित देशों की कुल आबादी का लगभग 40 प्रतिशत है। अध्ययन के निष्कर्ष 23 अक्टूबर को सामने आए और शोध Nature Health जर्नल में प्रकाशित शोधकार्य पर आधारित है।
यह संख्या मृत्यु प्रमाणपत्रों में दर्ज हर मौत की सीधी गिनती नहीं है। शोधकर्ताओं ने तापमान और मृत्यु-दर के बीच स्थापित संबंधों, मौसम के अवलोकनों तथा जलवायु मॉडलों की मदद से गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया। इसलिए 50,391 को मॉडल-आधारित अनुमान के रूप में समझना चाहिए, न कि प्रत्येक मामले में गर्मी को प्रमाणित एकमात्र कारण मानना चाहिए।
2022 के रिकॉर्ड से भी अधिक घातक गर्मी
अध्ययन के मुताबिक, 2026 की गर्मियों में अनुमानित गर्मी-संबंधी मौतों की संख्या 2022 के लगभग 29,480 के आंकड़े से करीब 71 प्रतिशत अधिक रही। जून, जुलाई और अगस्त के दौरान कई बार तापमान के रिकॉर्ड टूटे। 17 जून से 1 जुलाई के बीच की तीव्र गर्म लहर के दौरान क्षेत्र का औसत दैनिक तापमान 1991–2020 के औसत से लगभग 5.3 डिग्री सेल्सियस अधिक था। शोधकर्ताओं के अनुसार, गर्मियों की कुल अनुमानित मौतों में लगभग एक-तिहाई इसी अवधि में हुईं।

गर्मी का असर केवल दक्षिणी यूरोप तक सीमित नहीं रहा। पश्चिमी और उत्तरी यूरोप के कुछ हिस्सों में भी तापमान ऐतिहासिक औसत से बहुत ऊपर गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन क्षेत्रों की इमारतें, स्वास्थ्य सेवाएं और शहरी ढांचा लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी के लिए तैयार नहीं हैं, वहां जोखिम तेजी से बढ़ सकता है।
जलवायु परिवर्तन से जुड़ी करीब दो-तिहाई मौतें
शोधकर्ताओं ने मौजूदा गर्म होती जलवायु की तुलना ऐसे काल्पनिक परिदृश्य से की जिसमें मानव गतिविधियों के कारण होने वाली वैश्विक गर्मी नहीं होती। दोनों स्थितियों के तापमान और मृत्यु-दर के अनुमानों की तुलना करके उन्होंने जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अतिरिक्त मौतों का आकलन किया। इस पद्धति के अनुसार, अनुमानित 50,391 मौतों में से 32,619 मौतें मानवजनित जलवायु परिवर्तन से बढ़ी गर्मी के कारण हुईं।
कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों के जलने से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसें वैश्विक तापमान बढ़ाती हैं और अत्यधिक गर्मी की घटनाओं को अधिक तीव्र बना सकती हैं। अध्ययन का निष्कर्ष है कि जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी से होने वाली मृत्यु का बोझ बढ़ रहा है। हालांकि, यह अनुमान सांख्यिकीय मॉडल पर आधारित है और व्यक्तिगत मौतों के कारण का चिकित्सकीय निर्धारण नहीं है।
सबसे अधिक प्रभावित देश और बुजुर्ग
अध्ययन में इटली, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी में गर्मी से जुड़ी मौतों की अनुमानित संख्या सबसे अधिक रही। माल्टा, इटली और हंगरी में आबादी के अनुपात में गर्मी से मृत्यु-दर विशेष रूप से ऊंची बताई गई। 85 वर्ष से अधिक आयु के लोग सबसे अधिक प्रभावित समूहों में रहे। इसके बावजूद, शोधकर्ताओं ने 65 वर्ष से कम आयु के लोगों में भी हजारों मौतों का अनुमान लगाया—यह संकेत है कि अत्यधिक गर्मी केवल बुजुर्गों के लिए खतरा नहीं है।

गर्मी शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता पर दबाव डालती है और हृदय तथा श्वसन संबंधी बीमारियों को बिगाड़ सकती है। लंबे समय तक गर्म रातें रहने से शरीर को दिन की गर्मी से उबरने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। अकेले रहने वाले बुजुर्ग, पहले से बीमार लोग, खुले में काम करने वाले श्रमिक और ठंडक की सुविधाओं से वंचित परिवार विशेष जोखिम में हो सकते हैं।
वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि अनुमान में मई 2026 की घातक गर्म लहर शामिल नहीं है। इसके अलावा, विश्लेषण केवल 854 शहरों और शहरी क्षेत्रों तक सीमित था, जो संबंधित देशों की कुल आबादी का लगभग 40 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए अध्ययन के आंकड़े यूरोप में गर्मी से होने वाले कुल स्वास्थ्य नुकसान का पूरा आकलन नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों और विश्लेषण से बाहर के शहरों की स्थिति अलग हो सकती है।
गर्मी से होने वाली मौतें कई बार आधिकारिक रिकॉर्ड में सीधे गर्मी के नाम से दर्ज नहीं होतीं। अत्यधिक तापमान दिल का दौरा, स्ट्रोक और अन्य गंभीर स्थितियों को बढ़ा सकता है; ऐसे मामलों में मृत्यु प्रमाणपत्र पर मूल बीमारी दर्ज हो सकती है। इसी वजह से वैज्ञानिक मॉडल और अतिरिक्त मृत्यु-दर का विश्लेषण व्यापक प्रभाव समझने में उपयोगी होता है।
शहरों और स्वास्थ्य सेवाओं को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों ने गर्मी के खतरे से निपटने के लिए समय रहते चेतावनी प्रणाली, सार्वजनिक ठंडक केंद्र, अस्पतालों की तैयारी और कमजोर लोगों तक सक्रिय पहुंच मजबूत करने की जरूरत बताई है। पेड़-पौधों और हरित क्षेत्रों का विस्तार, छायादार सार्वजनिक स्थान, बेहतर भवन डिजाइन और कम आय वाले परिवारों के लिए किफायती शीतलन व्यवस्था भी मददगार हो सकती है। गर्मी की लहरों के दौरान बुजुर्गों और अकेले रहने वाले लोगों की नियमित जांच तथा खुले में काम करने वालों के लिए विश्राम और पानी की उपलब्धता जरूरी है।

तात्कालिक अनुकूलन के साथ जीवाश्म ईंधनों से होने वाले उत्सर्जन में तेजी से कमी लाना भी महत्वपूर्ण है। 2026 के आंकड़े यह रेखांकित करते हैं कि चरम गर्मी अब केवल मौसम का असुविधाजनक दौर नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहरी योजना की गंभीर चुनौती है।
