पटना/नई दिल्ली: मेडिकल की पढ़ाई से शुरू हुआ सफर पहले पुलिस सेवा और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा तक पहुंचा। बिहार में नालंदा, दरभंगा, गया और पटना जैसे महत्वपूर्ण जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालने वाले 2011 बैच के IAS अधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम को अब केंद्र सरकार में नई जिम्मेदारी मिली है। केंद्र सरकार ने उन्हें नई दिल्ली स्थित सहकारिता मंत्रालय में निदेशक नियुक्त किया है। यह नियुक्ति उनके प्रशासनिक करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है। खास बात यह है कि जिस अधिकारी ने अपने करियर की शुरुआत डॉक्टर के रूप में की, उन्होंने बाद में IPS और IAS दोनों सेवाओं में जगह बनाई और अब केंद्रीय मंत्रालय में काम करने का अवसर मिला है।
पांच साल के लिए केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय में नियुक्ति
डॉ. त्यागराजन एसएम बिहार कैडर के 2011 बैच के IAS अधिकारी हैं। उनकी नियुक्ति केंद्र सरकार की सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत सहकारिता मंत्रालय में निदेशक के पद पर की गई है। उपलब्ध नियुक्ति संबंधी जानकारी के अनुसार, उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से पांच साल या अगले आदेश तक रहेगा, इनमें जो पहले लागू होगा, वही मान्य होगा। नियुक्ति आदेश के बाद अधिकारी को निर्धारित समयसीमा में नई जिम्मेदारी संभालनी होगी।
केंद्रीय मंत्रालय में निदेशक का पद नीतियों और प्रशासनिक कार्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस स्तर पर अधिकारियों को विभागीय योजनाओं, प्रशासनिक समन्वय और सरकारी निर्णयों के क्रियान्वयन से जुड़े काम करने होते हैं।
सहकारिता मंत्रालय का कार्यक्षेत्र सहकारी संस्थाओं और सहकारिता आधारित गतिविधियों से जुड़ा है। ऐसे में डॉ. त्यागराजन के सामने अब राज्य स्तर पर प्राप्त प्रशासनिक अनुभव को केंद्रीय स्तर के कामकाज में इस्तेमाल करने का अवसर होगा। हालांकि, उनकी नियुक्ति के बाद किसी विशिष्ट योजना या परियोजना की जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

कोयंबटूर में MBBS, फिर चुनी सिविल सेवा की राह
डॉ. त्यागराजन एसएम की शैक्षणिक और पेशेवर यात्रा उन्हें कई अलग-अलग क्षेत्रों से होकर इस मुकाम तक लाई है। उनका जन्म 20 दिसंबर 1984 को तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुआ था। उन्होंने कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई पूरी की। मेडिकल शिक्षा के बाद उन्होंने अपने करियर को चिकित्सा तक सीमित रखने के बजाय सिविल सेवा की दिशा में आगे बढ़ाया।
यह बदलाव उनके करियर का पहला बड़ा मोड़ था। चिकित्सा शिक्षा में हासिल ज्ञान के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की और भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए। वर्ष 2010 में उनका चयन IPS के लिए हुआ। इसके बाद उन्होंने ओडिशा में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में काम किया।
पुलिस सेवा में अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने दोबारा UPSC सिविल सेवा परीक्षा दी। वर्ष 2011 में उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में हुआ और उन्हें बिहार कैडर मिला। इस तरह उनका सफर डॉक्टर से IPS और फिर IAS अधिकारी बनने तक पहुंचा।
नालंदा, दरभंगा और गया में संभाली प्रशासनिक जिम्मेदारी
बिहार में डॉ. त्यागराजन ने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह नालंदा, दरभंगा और गया जैसे जिलों में जिलाधिकारी (DM) रह चुके हैं। इन पदों पर जिले की प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं।

जिला प्रशासन में जिलाधिकारी की भूमिका केवल सरकारी आदेशों को लागू कराने तक सीमित नहीं रहती। उन्हें जनसमस्याओं के समाधान, विकास योजनाओं की निगरानी, राजस्व प्रशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में भी विभिन्न एजेंसियों के साथ तालमेल करना पड़ता है।
गया में उनके कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं से जुड़े कुछ प्रयास भी चर्चा में रहे। उपलब्ध रिपोर्टों में वंडर ऐप और श्रवण श्रुति जैसी पहलों का उल्लेख मिलता है। हालांकि, इन योजनाओं के परिणाम और उनके प्रभाव का विस्तृत आकलन करने के लिए अलग से आधिकारिक आंकड़ों की जरूरत होगी।
पटना DM से बिहार बोर्ड अध्यक्ष तक का सफर
डॉ. त्यागराजन को 1 जून 2025 को पटना का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया था। बाद में बिहार सरकार के प्रशासनिक फेरबदल के दौरान जून 2026 में उन्हें बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने 18 जून 2026 से इस पद की जिम्मेदारी संभाली। इस पद पर उनका काम बिहार बोर्ड की परीक्षा और शैक्षणिक दस्तावेजों से संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा रहा है।
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति राज्य में मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं के संचालन, परिणामों की घोषणा तथा प्रमाणपत्रों से जुड़े कामों के लिए महत्वपूर्ण संस्था है। ऐसे संस्थान के प्रमुख के रूप में प्रशासनिक समन्वय, समयबद्ध प्रक्रिया और विद्यार्थियों से जुड़ी सेवाओं का महत्व बढ़ जाता है।

सितंबर 2026 में बिहार बोर्ड के 2026 के मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा संबंधी शैक्षणिक दस्तावेजों को डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराने की पहल भी सामने आई। इससे विद्यार्थियों को अपने दस्तावेज डिजिटल माध्यम से प्राप्त करने की सुविधा मिली।
अब केंद्र में नई नियुक्ति के साथ उनके करियर का अगला चरण शुरू होने जा रहा है। बिहार बोर्ड के अध्यक्ष पद से केंद्रीय मंत्रालय में जाने की प्रक्रिया में राज्य सरकार की ओर से कार्यमुक्त किए जाने और नई जिम्मेदारी संभालने की औपचारिकताएं महत्वपूर्ण होंगी।
केंद्रीय मंत्रालय में बिहार के अनुभव का होगा नया इस्तेमाल
डॉ. त्यागराजन एसएम की नियुक्ति ऐसे समय में सामने आई है, जब सहकारिता क्षेत्र में संस्थागत व्यवस्था और सहकारी गतिविधियों को मजबूत करने से जुड़े विषय केंद्र सरकार के लिए महत्वपूर्ण हैं। मंत्रालय में निदेशक के रूप में उनकी भूमिका विभागीय जिम्मेदारियों और उन्हें सौंपे गए कार्यों के अनुरूप होगी।
उनके करियर की खास बात अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने का अनुभव है। मेडिकल शिक्षा, पुलिस सेवा, जिला प्रशासन और शिक्षा बोर्ड जैसे संस्थान की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब उन्हें केंद्रीय मंत्रालय में काम करने का अवसर मिला है।

हालांकि, किसी अधिकारी की नियुक्ति को केवल पद में बदलाव के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। नई जिम्मेदारी में उनके काम का वास्तविक आकलन इस बात से होगा कि वे अपने निर्धारित दायित्वों को किस तरह निभाते हैं और विभागीय लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में क्या योगदान देते हैं।
डॉ. त्यागराजन एसएम का सफर उन युवाओं के लिए दिलचस्प उदाहरण है, जो अपने करियर में अलग-अलग रास्ते तलाशते हैं। MBBS के बाद IPS और फिर IAS बनने की उनकी यात्रा अब केंद्रीय प्रतिनियुक्ति तक पहुंची है। बिहार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम करने के बाद सहकारिता मंत्रालय में उनकी नई भूमिका उनके प्रशासनिक अनुभव का एक नया अध्याय है।
