Dinman Times
  • ट्रेंडिंग
  • फोटो
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Reading: AI और इन्फ्लुएंसर्स की नई कहानी: कमाई बढ़ी, लेकिन फॉलोअर्स का भरोसा दांव पर
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Follow US
© 2026. All Rights Reserved.

Home - टेक्नोलॉजी - AI और इन्फ्लुएंसर्स की नई कहानी: कमाई बढ़ी, लेकिन फॉलोअर्स का भरोसा दांव पर

AI और इन्फ्लुएंसर्स की नई कहानी: कमाई बढ़ी, लेकिन फॉलोअर्स का भरोसा दांव पर

आभा शुक्ला
Last updated: अक्टूबर 3, 2026 5:02 अपराह्न
By : आभा शुक्ला
Published on : 2 घंटे पहले
AI और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के बीच कंटेंट क्रिएटर और सोशल मीडिया का बदलता दौर
AI और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के बीच कंटेंट क्रिएटर और सोशल मीडिया का बदलता दौर
साझा करें

AI ने क्रिएटर्स के लिए कंटेंट बनाना आसान किया तो कंपनियों ने भी इन्फ्लुएंसर्स को मार्केटिंग का नया हथियार बना लिया। अब चुनौती सिर्फ कमाई की नहीं, बल्कि यह बताने की है कि कंटेंट में AI की भूमिका कितनी है।

सोशल मीडिया की दुनिया में किसी इन्फ्लुएंसर की असली ताकत उसके लाखों फॉलोअर्स नहीं, बल्कि उनका भरोसा होता है। यही भरोसा अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक नई परीक्षा से गुजर रहा है।

AI ने जहां क्रिएटर्स के लिए आइडिया, स्क्रिप्ट, वीडियो, फोटो और एडिटिंग जैसे काम आसान कर दिए हैं, वहीं AI कंपनियों के लिए इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का एक बड़ा जरिया बन गया है।

इस बदलाव ने क्रिएटर इकोनॉमी में कमाई के नए रास्ते खोले हैं। लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हुआ है—अगर किसी क्रिएटर को AI कंपनी से मोटी रकम मिल रही है, तो क्या उसके फॉलोअर्स उसकी सलाह को पहले की तरह भरोसेमंद मानेंगे?

AI कंपनियां क्रिएटर्स पर लगा रहीं बड़ा दांव

AI कंपनियां अब सिर्फ टेक्नोलॉजी से जुड़े क्रिएटर्स तक सीमित नहीं हैं। ChatGPT जैसे AI टूल्स को प्रमोट करने के लिए लाइफस्टाइल, फिटनेस, ट्रैवल, पैरेंटिंग और फाइनेंस जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के इन्फ्लुएंसर्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।

ये भी पढ़े

Power Bank Safety Tips: पावर बैंक क्यों फटते हैं? इन 7 गलतियों से रहें सावधान, वरना हो सकता है बड़ा हादसा
दिल्ली में अब AI संभालेगा ट्रैफिक! ₹1,789 करोड़ का सिस्टम मंजूर, सिग्नल खुद समझेंगे कहां है ज्यादा जाम
ChatGPT को 2 महीने बनाया अपना Money Coach, तब समझ आया पैसा कम नहीं पड़ता, प्लानिंग पड़ जाती है
OpenAI के AI एजेंट ने तोड़ी ‘इंटरनेट-फ्री’ दीवार, DNS के रास्ते बाहरी चैटबॉट तक पहुंचा; भेजे 20 सवाल

इसकी वजह साफ है। किसी कंपनी के लिए सीधे विज्ञापन देने की तुलना में ऐसा क्रिएटर ज्यादा प्रभावी हो सकता है, जिसे उसकी ऑडियंस पहले से जानती और सुनती है। क्रिएटर अपने रोजमर्रा के काम में AI टूल का इस्तेमाल दिखाकर यह समझा सकता है कि तकनीक वास्तव में किस तरह काम आ सकती है।

AI कंपनियों के लिए यह सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि संभावित ग्राहकों को तकनीक समझाने का तरीका भी बन गया है।

मोटी कमाई ने बढ़ाया आकर्षण

AI से जुड़ी कंपनियों के साथ काम करने वाले कुछ टैलेंट मैनेजर्स के अनुसार, बड़े क्रिएटर्स को AI कंपनियों की ओर से लाखों डॉलर तक के प्रमोशनल ऑफर मिल रहे हैं। यानी जिन इन्फ्लुएंसर्स के पास मजबूत ऑडियंस है, उनके लिए AI का बढ़ता कारोबार कमाई का बड़ा अवसर बन चुका है।

लेकिन हर डील सिर्फ पैसे का मामला नहीं है।

कई क्रिएटर्स के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी ऑडियंस AI को किस नजर से देखती है। कुछ लोग इसे काम आसान करने वाली तकनीक मानते हैं, जबकि कुछ लोग नौकरियों, कॉपीराइट, डेटा, पर्यावरणीय प्रभाव और इंसानी रचनात्मकता को लेकर सवाल उठाते हैं।

ऐसे में AI कंपनी का प्रमोशन करने वाला क्रिएटर अपनी ऑडियंस के एक हिस्से की नाराजगी का सामना कर सकता है।

क्रिएटर के सामने दोहरी चुनौती

इन्फ्लुएंसर के लिए स्थिति कुछ ऐसी है कि एक तरफ आकर्षक ब्रांड डील है और दूसरी तरफ वर्षों में बनाया गया व्यक्तिगत भरोसा। अगर क्रिएटर यह छिपाता है कि किसी कंटेंट में AI का इस्तेमाल हुआ है या उसे किसी AI कंपनी से पैसे मिले हैं, तो सवाल उठ सकते हैं।

दूसरी ओर, अगर वह शुरुआत से साफ-साफ बताता है कि AI का इस्तेमाल कहां हुआ और किस उद्देश्य से किया गया, तो ऑडियंस के पास पूरी जानकारी रहती है।

यही वजह है कि अब कई क्रिएटर्स अपने फॉलोअर्स को AI के इस्तेमाल के बारे में ज्यादा जानकारी देने लगे हैं। कुछ क्रिएटर्स यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि वे AI का इस्तेमाल केवल ऐसे कामों में करते हैं जहां इससे पहुंच और सुविधा बेहतर होती है, जबकि अंतिम रचनात्मक फैसला खुद लेते हैं।

भारत में भी तेजी से बढ़ रहा AI का इस्तेमाल

भारत में भी क्रिएटर इकोनॉमी पर AI का असर तेजी से दिखाई दे रहा है। Adobe की 2026 की क्रिएटर रिपोर्ट के मुताबिक, AI इस्तेमाल करने वाले 96% भारतीय क्रिएटर्स ने माना कि इससे उनके बिजनेस या ऑडियंस की ग्रोथ में मदद मिली। वहीं 85% ने AI को अपने वर्कफ्लो का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि क्रिएटर्स पूरी तरह मशीन पर निर्भर होना चाहते हैं। रिपोर्ट में बड़ी संख्या में क्रिएटर्स ने माना कि अंतिम रचनात्मक नियंत्रण इंसान के पास रहना चाहिए।

यानी AI को लेकर क्रिएटर इकोनॉमी का रुख पूरी तरह ‘इंसान बनाम मशीन’ वाला नहीं है। ज्यादातर मामलों में AI को एक सहायक टूल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

अब छिपाना मुश्किल होगा कि कंटेंट AI से बना है

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी AI से तैयार या बदले गए कंटेंट को लेकर पारदर्शिता बढ़ा रहे हैं। YouTube जैसे प्लेटफॉर्म वास्तविक दिखने वाले AI-generated या significantly altered कंटेंट के लिए खुलासा और लेबलिंग की व्यवस्था लागू कर चुके हैं। दूसरे प्लेटफॉर्म भी AI कंटेंट की पहचान और लेबलिंग पर काम कर रहे हैं।

इसका सीधा असर क्रिएटर्स पर पड़ता है। आने वाले समय में सिर्फ अच्छा कंटेंट बनाना काफी नहीं होगा। यह बताना भी महत्वपूर्ण होगा कि उसमें तकनीक की कितनी भूमिका रही है।

भरोसा ही सबसे बड़ी पूंजी

AI क्रिएटर्स के लिए समय बचा सकता है, नए प्रयोगों के रास्ते खोल सकता है और कमाई के नए अवसर दे सकता है। कंपनियों के लिए यह लाखों संभावित ग्राहकों तक पहुंचने का रास्ता बन सकता है।

लेकिन इन्फ्लुएंसर की सबसे बड़ी संपत्ति आखिरकार उसकी ऑडियंस का भरोसा ही है। पैसा मिलने के बाद भी अगर फॉलोअर्स को लगे कि क्रिएटर की राय सिर्फ ब्रांड डील की वजह से बदली है, तो लंबे समय में उसकी विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

इसलिए AI और इन्फ्लुएंसर्स के बीच बन रहा यह रिश्ता सिर्फ टेक्नोलॉजी और पैसे की कहानी नहीं है। यह कमाई, रचनात्मकता और भरोसे के बीच संतुलन की कहानी भी है। आने वाले दौर में शायद यह सवाल कम महत्वपूर्ण होगा कि कोई क्रिएटर AI इस्तेमाल करता है या नहीं। ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि वह अपनी ऑडियंस को इसके बारे में कितना साफ बताता है।

TAGGED:AI InfluencersCreator EconomyInfluencer Marketing
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
abha
Byआभा शुक्ला
आभा शुक्ला पत्रकारिता, जनसंपर्क और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन के क्षेत्र में 5+ वर्षों के अनुभव वाली पत्रकार एवं कम्युनिकेशन प्रोफेशनल हैं। पटना से जुड़ीं आभा को समाचार शोध, रिपोर्टिंग, कंटेंट डेवलपमेंट, मीडिया आउटरीच और जनसंपर्क अभियानों का अनुभव है। उन्होंने Zee News में ट्रेनी जर्नलिस्ट के रूप में समाचार शोध, रिपोर्टिंग और कंटेंट डेवलपमेंट का अनुभव हासिल किया। इसके बाद UNE Consultant में PR Executive के तौर पर मीडिया आउटरीच, PR कैंपेन और कॉर्पोरेट इवेंट्स पर काम किया। TCS में Associate के रूप में उन्होंने डेटा मैनेजमेंट, रिसर्च और सूचना प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। आभा शुक्ला तथ्यपरक, शोध-आधारित और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक एवं समसामयिक मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाने में रुचि रखती हैं।
पिछली ख़बर Vienna Travel के दौरान पर्यटक और शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल वियना घूमने पहुंची, लेकिन 4 गलतियों ने बिगाड़ दिया पूरा ट्रिप: पैसे भी ज्यादा खर्च हुए, वक्त और ऊर्जा भी गई
अगली ख़बर Sophia Lee की दुनिया के देशों की यात्रा और विश्व रिकॉर्ड की कोशिश 13 साल की उम्र में अकेले निकलीं, अब दुनिया के हर देश की यात्रा के करीब पहुंचीं Sophia Lee
Google prefered

गूगल पर फेवरेट बनाएँ

ये भी पढ़ें

Nalanda में गोदाम से 1.5 किलो गांजा बरामद

गोदाम में छिपाकर रखा था 1.5 किलो गांजा, पुलिस ने छापेमारी कर आरोपी को दबोचा

Nalanda- शेरपुर सीमेंट चोरी मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार

शेरपुर से ट्रक समेत चोरी हुआ था 300 बोरी सीमेंट, पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोचा

रहुई में दुर्गा पूजा को लेकर शांति समिति की बैठक

दुर्गा पूजा को लेकर रहुई प्रशासन सख्त, शांति समिति की बैठक में जारी हुए कई निर्देश

Vaishali: कदम घाट के पास गंडक नदी किनारे धंसा बेड बार और तिरहुत तटबंध

गंडक का पानी घटा, लेकिन तिरहुत तटबंध की चिंता बढ़ी; कदम घाट पर धंसा 10 मीटर बेड बार

Rohtas में युवा इतिहासकार राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते उच्च शिक्षा मंत्री

रोहतास: युवा इतिहासकार विश्वविद्यालयों में स्थानीय इतिहास लेखन की शोध परंपरा विकसित करें- उच्च शिक्षा मंत्री

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • करियर
  • खेल
  • उत्तर प्रदेश

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?