औरंगाबाद/बारुण: पितृपक्ष के अवसर पर बिहार के औरंगाबाद जिले के बारुण प्रखंड स्थित पुनपुन नदी घाट पर श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान और तर्पण करने के लिए यहां पहुंच रहे हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों से श्रद्धालुओं के आने के कारण नदी क्षेत्र में भीड़ बढ़ गई है।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से यातायात व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। नदी के ऊपर से गुजरने वाले नेशनल हाईवे के किनारे बड़ी संख्या में वाहन खड़े किए जा रहे हैं। ऐसे में सड़क पर वाहनों की कतार लगने से जाम की स्थिति बनने के साथ दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है।
पार्किंग स्थल नहीं होने से हाईवे पर खड़े हो रहे वाहन
पुनपुन नदी में पिंडदान और तर्पण के लिए आने वाले श्रद्धालु अपने निजी वाहनों से घाट तक पहुंच रहे हैं। नदी क्षेत्र के पास व्यवस्थित पार्किंग स्थल उपलब्ध नहीं होने के कारण कई लोगों को मजबूरी में अपने वाहन हाईवे पर ही खड़े करने पड़ रहे हैं। इससे सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती है। ऐसे में यदि वाहनों को व्यवस्थित तरीके से खड़ा कराने की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में जाम की समस्या और गंभीर हो सकती है।
पिछले 15 वर्षों में बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
स्थानीय ग्रामीणों रामेश्वर सौंडिक, धनंजय सिंह यादव, मृत्युंजय शर्मा, पूर्व मुखिया रविंद्र भगत, शिवम मिश्रा, उमाशंकर विश्वकर्मा, कामेश्वर मेहता, रामप्रवेश सिंह और उमेश मेहता ने बताया कि पुनपुन नदी पर पितृपक्ष का मेला करीब 100 वर्षों से आयोजित होता आ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार पहले यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन पिछले करीब 15 वर्षों में पिंडदान के लिए पहुंचने वाले लोगों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के अनुरूप बुनियादी सुविधाओं का विस्तार नहीं हो सका है।
पार्किंग, आवास और पक्के घाट की मांग
स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभाग से पुनपुन नदी क्षेत्र में व्यवस्थित पार्किंग स्थल, श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए आवासीय सुविधा और सुरक्षित पक्के घाट विकसित करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो उन्हें पिंडदान और तर्पण के दौरान परेशानी नहीं होगी। साथ ही हाईवे पर वाहनों के बेतरतीब खड़े होने से पैदा होने वाली जाम और सड़क सुरक्षा से जुड़ी समस्या को भी कम किया जा सकेगा।
दो लेन में वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था
वहीं, नेशनल हाईवे के पदाधिकारी सुदीप ने बताया कि वरीय अधिकारियों के निर्देश के अनुसार वाहनों की व्यवस्था की जा रही है। पितृपक्ष मेले के दौरान दो लेन में श्रद्धालुओं के वाहन खड़े कराए जाएंगे, जबकि बाकी दो लेन से यातायात संचालित करने की व्यवस्था रहेगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के बावजूद नेशनल हाईवे पर यातायात पूरी तरह बाधित न हो और वाहनों का परिचालन जारी रखा जा सके।
पुनपुन नदी क्षेत्र में पितृपक्ष के दौरान बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए अब स्थायी पार्किंग और अन्य सुविधाओं की जरूरत पहले से अधिक महसूस की जा रही है।