पटना, 2 अक्टूबर 2026: बिहार में गैर-संचारी रोगों यानी NCD (Non-Communicable Diseases) की समय पर पहचान और इलाज को लेकर चलाए जा रहे विशेष स्वास्थ्य अभियान में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। 2 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक राज्य में 1 करोड़ 73 लाख 96 हजार 717 लोगों की NCD स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इस अभियान के तहत 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय संबंधी समस्याओं, COPD, फैटी लीवर तथा मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक पहचान की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने कहा है कि सरकार का लक्ष्य हर घर तक पहुंचकर पात्र लोगों की स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करना है।
यह अभियान केवल जांच तक सीमित नहीं है। स्क्रीनिंग के दौरान किसी व्यक्ति में बीमारी या संभावित जोखिम की पहचान होने पर उसे परामर्श, दवा, उपचार और जरूरत पड़ने पर उच्चतर स्वास्थ्य संस्थान तक रेफर करने की व्यवस्था भी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में ‘जांच एवं उपचार–चिकित्सा आपके द्वार’ विशेष अभियान 2 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक चलाया जा रहा है।
1.73 करोड़ से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग, अलग-अलग बीमारियों पर फोकस
NCD ऐसी बीमारियां हैं जो लंबे समय तक बनी रह सकती हैं और इनमें हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह तथा पुरानी सांस संबंधी बीमारियां प्रमुख हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार NCD की रोकथाम के साथ-साथ समय पर पहचान, स्क्रीनिंग और उपचार स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण रणनीतियां हैं। शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने से समय पर उपचार शुरू करने और गंभीर जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
बिहार के इस अभियान में इसी सोच को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 30 सितंबर तक राज्य में कुल 1,73,96,717 लोगों की NCD स्क्रीनिंग की गई है।
7.05 लाख लोगों में हाई ब्लड प्रेशर की पहचान
अभियान के दौरान उच्च रक्तचाप यानी हाइपरटेंशन की जांच पर विशेष जोर दिया गया। विभाग के अनुसार कुल 1,71,10,853 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 7,05,214 लोगों में उच्च रक्तचाप की पहचान हुई।
इनमें से 5,84,697 लोगों को निःशुल्क दवा देकर उपचार किया जा रहा है, जबकि 1,20,517 लोगों को जीवनशैली में सुधार के लिए परामर्श दिया गया है।
हाई ब्लड प्रेशर की खास चुनौती यह है कि कई लोगों में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। WHO के अनुसार ब्लड प्रेशर की जांच ही उच्च रक्तचाप की पहचान का महत्वपूर्ण माध्यम है और इसका समय पर पता लगना उपचार एवं जोखिम प्रबंधन के लिए जरूरी है।
6 लाख से ज्यादा लोगों में मधुमेह की पहचान
मधुमेह की स्क्रीनिंग में भी बड़ी संख्या में लोगों की जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 1,67,95,236 लोगों की जांच हुई। इनमें 6,01,319 लोगों में मधुमेह की पहचान हुई।
इनमें 4,94,713 लोगों को निःशुल्क दवा उपलब्ध कराकर उपचार दिया जा रहा है, जबकि 1,06,606 लोगों को जीवनशैली में सुधार के लिए परामर्श दिया गया है।
मधुमेह की शुरुआती पहचान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर यह आंखों, किडनी, नसों और हृदय समेत शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। WHO भी मधुमेह में शुरुआती निदान और नियमित फॉलो-अप को महत्वपूर्ण मानता है।
COPD की जांच में 80 लाख से ज्यादा लोग शामिल
सांस और फेफड़ों से संबंधित बीमारी COPD की पहचान के लिए भी बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग की गई। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 80,31,104 लोगों की जांच हुई और इनमें 11,165 लोगों में COPD की पहचान हुई।
इनमें 7,561 लोगों को निःशुल्क दवा दी जा रही है, जबकि 3,604 लोगों को तंबाकू सेवन से बचने और योग से संबंधित परामर्श दिया गया है।
यह पहल खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तंबाकू सेवन और अन्य जोखिम कारक कई गैर-संचारी रोगों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। WHO के अनुसार तंबाकू, अस्वास्थ्यकर खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता और वायु प्रदूषण जैसे कारक NCD के जोखिम से जुड़े हैं।
फैटी लीवर की भी हो रही जांच
फैटी लीवर यानी NAFLD की स्क्रीनिंग के तहत 78,75,415 लोगों की जांच की गई। इनमें 10,935 लोगों में NAFLD की पहचान हुई।
इनमें 7,070 लोगों को निःशुल्क दवा उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि 3,865 लोगों को खान-पान में सुधार से संबंधित परामर्श दिया गया है।
इसका उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान करना है, जिनमें बीमारी या स्वास्थ्य जोखिम शुरुआती स्तर पर मौजूद हो सकते हैं और जिन्हें समय रहते चिकित्सकीय सलाह एवं आवश्यक उपचार से जोड़ा जा सके।
ECG जांच से सामने आए हृदय संबंधी जोखिम
हृदय संबंधी समस्याओं की पहचान के लिए अभियान के दौरान 1,14,373 लोगों की ECG जांच की गई। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इनमें 89,044 रिपोर्ट सामान्य, 24,334 रिपोर्ट Non-STEMI (Abnormal) और 995 रिपोर्ट STEMI श्रेणी में दर्ज की गईं।
STEMI श्रेणी में आने वाले मरीजों को बेहतर और आवश्यक उपचार के लिए उच्चतर स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया है। इस व्यवस्था का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि हृदय संबंधी गंभीर स्थितियों में समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन और उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है।
मुंह के कैंसर की 1.33 करोड़ से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग
मुंह के कैंसर की प्रारंभिक पहचान के लिए 1,33,18,635 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 308 लोगों में मुंह के कैंसर की पहचान दर्ज की गई है। विभाग के अनुसार 201 लोगों को निःशुल्क औषधि उपलब्ध कराई गई है।
कैंसर में शुरुआती पहचान का महत्व चिकित्सा विज्ञान में अच्छी तरह स्थापित है। WHO के अनुसार कैंसर का समय पर निदान होने पर उपचार के सफल होने की संभावना बढ़ती है और उपचार में देरी से होने वाली जटिलताओं को कम करने में मदद मिलती है। भारत के संदर्भ में IARC ने भी स्तन, गर्भाशय ग्रीवा और मुंह के कैंसर में शुरुआती पहचान और स्क्रीनिंग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है।
महिलाओं के लिए स्तन और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग
अभियान में महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। स्तन कैंसर की जांच के लिए 42,30,913 महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 53 महिलाओं में संदिग्ध लक्षण पाए गए। आगे की जांच और बायोप्सी के बाद 42 महिलाओं में स्तन कैंसर की पुष्टि हुई और उन्हें उपचार से जोड़ा जा रहा है।
इसी तरह गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए 30,51,110 महिलाओं की स्क्रीनिंग हुई। इनमें 45 महिलाओं में संदिग्ध लक्षण मिले, जिन्हें आवश्यक चिकित्सकीय जांच और उपचार से जोड़ा गया।
WHO के अनुसार सर्वाइकल कैंसर की नियमित स्क्रीनिंग और समय पर उपचार से बीमारी को रोकने और शुरुआती स्तर पर इलाज करने में मदद मिलती है।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने बताया लक्ष्य
स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने अभियान की उपलब्धि पर कहा कि हर घर तक पहुंचकर पात्र लोगों की स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने अधिकारियों के साथ मैदानी स्तर पर काम कर रहीं आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम के प्रयासों की सराहना की तथा अभियान को इसी गति से जारी रखने का निर्देश दिया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बीमारी की समय पर पहचान होने से मरीज को आवश्यक उपचार से जोड़ना आसान होता है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को शुरुआती स्तर पर नियंत्रित करने की संभावना बढ़ती है।
‘चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान से क्या बदलेगा ?
इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लोगों को केवल अस्पताल तक आने की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वास्थ्य जांच को घर और समुदाय के करीब ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। 2 सितंबर से 30 नवंबर तक चलने वाले अभियान में घर-घर जाकर तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में स्क्रीनिंग की जा रही है।
इसके अतिरिक्त उच्चतर स्वास्थ्य संस्थानों में ECG, CBC, LFT, KFT, लिपिड प्रोफाइल और TSH जैसी जांचें भी की जा रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए ऐसे अभियान की अहमियत केवल जांच की संख्या में नहीं है। वास्तविक लाभ तब सामने आता है, जब स्क्रीनिंग के बाद संदिग्ध या बीमारी से प्रभावित लोगों को समय पर पुष्टि वाली जांच, दवा, परामर्श, रेफरल और फॉलो-अप मिलता है। WHO भी NCD नियंत्रण में शुरुआती पहचान और समय पर उपचार को प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।
क्यों जरूरी है 30 वर्ष के बाद नियमित जांच?
NCD कई बार लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के भी रह सकते हैं। ऐसे में व्यक्ति खुद को स्वस्थ समझता रहता है, जबकि शरीर में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम मौजूद हो सकता है। नियमित स्क्रीनिंग ऐसे मामलों की शुरुआती पहचान का अवसर देती है।
यही कारण है कि बिहार स्वास्थ्य विभाग ने 30 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों से नियमित स्वास्थ्य जांच और NCD स्क्रीनिंग कराने की अपील की है। खासकर जिन लोगों में तंबाकू सेवन, शारीरिक निष्क्रियता, असंतुलित खान-पान या अन्य जोखिम कारक मौजूद हैं, उनके लिए चिकित्सकीय सलाह और नियमित जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
कुल मिलाकर, बिहार का यह NCD स्क्रीनिंग अभियान केवल करोड़ों लोगों की जांच का आंकड़ा नहीं है, बल्कि बीमारी की पहचान को उसके गंभीर होने से पहले स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास है। 30 नवंबर तक चलने वाले अभियान में यदि स्क्रीनिंग के साथ उपचार और फॉलो-अप की कड़ी मजबूत रहती है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ उन लोगों को मिल सकता है जिन्हें अपनी बीमारी या स्वास्थ्य जोखिम की जानकारी पहले नहीं थी।