पटना, 2 अक्टूबर 2026: बिहार में जन्मजात शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को समय पर इलाज और सर्जरी उपलब्ध कराने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत कटे होंठ, कटे तालु और टंग टाई यानी जीभ की गति में बाधा पैदा करने वाली स्थिति से पीड़ित बच्चों के लिए राज्यव्यापी विशेष सर्जरी अभियान की शुरुआत की गई है। अभियान का शुभारंभ पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में हुआ, जहां पहले ही दिन 5 बच्चों की सफल सर्जरी की गई। राज्य के कुल 12 चिकित्सा संस्थानों को इस विशेष अभियान से जोड़ा गया है।
अभियान के पहले दिन पीएमसीएच में जिन पांच बच्चों की सर्जरी की गई, उनमें दो बच्चे कटे तालु, दो बच्चे कटे होंठ और एक बच्चा टंग टाई से पीड़ित था। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने इन बच्चों की सफल सर्जरी की। इस पहल को महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि ऐसी स्थितियां केवल बच्चे की शारीरिक बनावट को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि कई मामलों में उसके खाने, बोलने, भाषा के विकास और सामाजिक आत्मविश्वास पर भी असर डाल सकती हैं।
जन्मजात समस्या के इलाज को अभियान से जोड़ना अहम कदम
कटे होंठ और कटे तालु को चिकित्सकीय रूप से Cleft Lip और Cleft Palate कहा जाता है। यह जन्मजात स्थिति है, जिसमें बच्चे के होंठ या मुंह के ऊपरी हिस्से का विकास पूरी तरह नहीं हो पाता। कुछ बच्चों में यह समस्या केवल होंठ तक सीमित रहती है, जबकि कुछ मामलों में तालु भी प्रभावित होता है।
ऐसे बच्चों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा और आवश्यक सर्जरी मिलने से उनकी शारीरिक समस्या को ठीक करने में मदद मिल सकती है। वहीं, टंग टाई की स्थिति में जीभ के नीचे मौजूद ऊतक की वजह से जीभ की सामान्य गति सीमित हो सकती है। कुछ मामलों में इससे बोलने या खाने जैसी गतिविधियों में परेशानी हो सकती है।
यही वजह है कि इन समस्याओं के लिए विशेष सर्जरी अभियान को केवल एक चिकित्सा कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका व्यापक उद्देश्य बच्चों को समय पर पहचान, विशेषज्ञ परामर्श और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराकर उनके सामान्य विकास की राह आसान करना है।
पीएमसीएच में पहले दिन पांच बच्चों की सफल सर्जरी
विशेष अभियान की शुरुआत पीएमसीएच में पांच बच्चों की सर्जरी के साथ हुई। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार गुप्ता के नेतृत्व में डॉ. पुरुषोत्तम कुमार और डॉ. विकास कुमार ने सर्जरी की।
इस पूरी प्रक्रिया में अलग-अलग चिकित्सा विभागों के बीच समन्वय भी देखने को मिला। एनेस्थीसिया इकाई के प्रभारी डॉ. अशोक कुमार, डॉ. शबकत तथा कान, नाक एवं गला यानी ईएनटी विभाग की अध्यक्ष डॉ. प्रीति शर्मा ने सहयोग किया।
बच्चों की सर्जरी में केवल ऑपरेशन करने वाले विशेषज्ञ की भूमिका नहीं होती, बल्कि एनेस्थीसिया, ईएनटी, शिशु रोग और अन्य संबंधित विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होता है। पीएमसीएच में पहले दिन अभियान के दौरान विभिन्न विभागों की संयुक्त भागीदारी इसी समन्वित चिकित्सा व्यवस्था को दर्शाती है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की भूमिका से बच्चों तक पहुंचेगा इलाज
इस अभियान को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत संचालित किया जा रहा है। RBSK का उद्देश्य बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान और समय पर उपचार की व्यवस्था को मजबूत करना है।
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में कई बार परिवारों को यह जानकारी नहीं होती कि जन्मजात शारीरिक समस्या का उपचार संभव है या इसके लिए कहां संपर्क किया जाए। आर्थिक और भौगोलिक कारण भी इलाज में बाधा बन सकते हैं। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से बच्चों की पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ संस्थानों तक पहुंचाना अभियान की उपयोगिता को बढ़ाता है।
12 चिकित्सा संस्थानों में चलेगा विशेष अभियान
स्वास्थ्य विभाग ने इस विशेष अभियान में राज्य के 12 चिकित्सा संस्थानों को शामिल किया है। इसका अर्थ है कि अभियान का दायरा केवल राजधानी के एक अस्पताल तक सीमित नहीं रखा गया है। अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों को जोड़ने से राज्य के विभिन्न हिस्सों से आने वाले बच्चों को उपचार उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ सकती है।
इस तरह के अभियान की सफलता केवल ऑपरेशन की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से भी जुड़ी होगी कि जरूरतमंद बच्चों की पहचान कितनी प्रभावी तरीके से होती है और उन्हें कितनी जल्दी विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाया जाता है।
शिशु रोग विभाग की भी अहम भूमिका
अभियान के संचालन में शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. हेमंत कुमार, इकाई प्रभारी डॉ. मनोज कुमार सिंह तथा इकाई प्रभारी एवं RBSK के सह-नोडल अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र कुमार सिंह ने सहयोग किया।
बच्चों के मामले में ऑपरेशन से पहले उनकी सामान्य स्वास्थ्य स्थिति, पोषण, उम्र और अन्य चिकित्सकीय पहलुओं का आकलन महत्वपूर्ण होता है। इसलिए शिशु रोग विभाग की भागीदारी इस तरह के अभियान में विशेष महत्व रखती है।
बच्चों के भविष्य से जुड़ा है यह अभियान
इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका सीधा संबंध बच्चों के भविष्य से है। कटे होंठ या तालु के कारण बच्चे को शुरुआती उम्र में शारीरिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। समय पर इलाज मिलने से इन चुनौतियों को कम करने की दिशा में मदद मिल सकती है।
कई परिवारों के लिए बच्चे की सर्जरी केवल चिकित्सा उपचार नहीं, बल्कि उसके सामान्य जीवन की ओर लौटने की उम्मीद भी होती है। खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से विशेषज्ञ उपचार की उपलब्धता बड़ी राहत दे सकती है।
पीएमसीएच में विशेषज्ञ टीम की मौजूदगी
अभियान के शुभारंभ के दौरान पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार, RBSK के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. राजीव कुमार, RBSK के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रवि प्रकाश तथा इकाई प्रभारी डॉ. सेतु बंधु तिवारी भी मौजूद रहे।
संपादकीय दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल ?
इस अभियान को केवल पांच सफल ऑपरेशन के आंकड़े के रूप में देखना इसकी वास्तविक उपयोगिता को सीमित कर देगा। इसकी बड़ी अहमियत इस बात में है कि बच्चों में जन्मजात स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और उनके उपचार को एक संगठित अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण पैमाना यह भी है कि व्यवस्था उन बच्चों तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचती है, जिन्हें जन्म से ही विशेष चिकित्सा सहायता की जरूरत है। कटे होंठ, कटे तालु और टंग टाई जैसी समस्याओं के लिए विशेषज्ञ सर्जरी उपलब्ध कराना इसी दिशा में एक कदम है।
इस पहल का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष बहु-विभागीय चिकित्सा सहयोग है। पीएमसीएच में प्लास्टिक सर्जरी, एनेस्थीसिया, ईएनटी और शिशु रोग विभाग के बीच समन्वय से स्पष्ट होता है कि बच्चों की सर्जरी के लिए टीम आधारित चिकित्सा व्यवस्था जरूरी है।
अब इस अभियान की अगली बड़ी जिम्मेदारी जरूरतमंद बच्चों की पहचान को अधिक व्यापक बनाने की होगी। यदि RBSK के माध्यम से चिन्हित बच्चों को समय पर विशेषज्ञ संस्थानों तक पहुंचाया जाता है और सर्जरी के बाद उनकी आवश्यक फॉलो-अप देखभाल भी सुनिश्चित होती है, तो यह पहल बिहार में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकती है।
फिलहाल, पीएमसीएच में पहले दिन पांच बच्चों की सफल सर्जरी के साथ शुरू हुआ यह अभियान उन परिवारों के लिए उम्मीद लेकर आया है, जिनके बच्चे कटे होंठ, कटे तालु या टंग टाई जैसी जन्मजात समस्याओं से जूझ रहे हैं। राज्य के 12 चिकित्सा संस्थानों की भागीदारी से शुरू हुआ यह अभियान आने वाले समय में कितने जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचता है, यही इसकी वास्तविक सफलता का महत्वपूर्ण पैमाना होगा।