पटना, 2 अक्टूबर 2026: महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर पटना जिले की 23 प्रखंडों की 304 ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। पंचायत सरकार भवन, पंचायत भवन, सामुदायिक भवन और अन्य उपयुक्त स्थलों पर हुई इन ग्राम सभाओं में ग्रामीणों ने सीधे भागीदारी करते हुए गांव की जरूरतों और प्राथमिक समस्याओं को सामने रखा। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए पंचायत विकास की प्राथमिकताएं तय करने, रोजगार एवं आजीविका से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा करने, स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करने तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
महात्मा गांधी के ‘ग्राम स्वराज’ के विचार को गांवों के विकास से जोड़ते हुए आयोजित इन विशेष ग्राम सभाओं का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों की भागीदारी के साथ विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार करना रहा। ग्राम सभा में ग्रामीणों से उनकी स्थानीय जरूरतों, समस्याओं और विकास संबंधी सुझावों को सुना गया। इसके बाद उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर विभिन्न कार्यों को प्राथमिकता देने पर चर्चा की गई।
‘सबकी योजना, सबका विकास’ के तहत पंचायत विकास योजना पर जोर
विशेष ग्राम सभाओं में ‘जन योजना अभियान 2026-27’ के तहत ‘सबकी योजना, सबका विकास’ की थीम को केंद्र में रखा गया। इसके तहत आगामी वित्तीय वर्ष के लिए पंचायत विकास योजना तैयार करने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया।
गांवों में किन क्षेत्रों में विकास कार्यों की सबसे अधिक जरूरत है, किन समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाना चाहिए और स्थानीय स्तर पर किन योजनाओं से अधिक लोगों को लाभ मिल सकता है, इस पर ग्रामीणों से सुझाव लिए गए। इस प्रक्रिया का उद्देश्य पंचायत स्तर पर योजनाओं का चयन स्थानीय जरूरतों और ग्रामीणों की प्राथमिकताओं के अनुरूप करना है।
रोजगार और आजीविका बढ़ाने वाली योजनाओं पर चर्चा
ग्राम सभाओं में ‘विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ और मनरेगा के तहत प्रस्तावित नए कार्यों पर भी चर्चा की गई। जरूरत के अनुसार कार्यों के चयन और स्वीकृति की प्रक्रिया पर विचार किया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधनों को मजबूत करने के लिए ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया, जिनका सीधा लाभ ग्रामीण परिवारों को मिल सके। पंचायत स्तर पर स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर कार्यों का चयन करने की बात कही गई।
स्वच्छता और पेयजल योजनाओं की हुई समीक्षा
विशेष ग्राम सभाओं में स्वच्छ भारत मिशन, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान और हर घर नल का जल योजना की स्थिति की भी समीक्षा की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ही लोगों को सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
गांवों को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के लिए चल रही योजनाओं की स्थिति पर चर्चा के साथ उनकी प्रभावी निगरानी और स्थानीय स्तर पर आवश्यक सुधारों पर भी विचार किया गया।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण का संकल्प
पर्यावरण संरक्षण और गांवों में हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने का संकल्प लिया गया। केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहते हुए उनके संरक्षण और नियमित देखभाल पर भी जोर दिया गया।
ग्राम सभा के दौरान ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने और पंचायत स्तर पर हरित आवरण बढ़ाने के लिए सामूहिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया गया।
जीविका दीदियों और महिलाओं की रही अहम भागीदारी
विशेष ग्राम सभाओं में जीविका दीदियों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। महिला सशक्तिकरण, आजीविका के अवसरों में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने तथा स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को और प्रभावी बनाने पर भी विचार किया गया।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज होंगे प्रस्ताव
ग्राम सभाओं में पारित प्रस्तावों और विकास योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उन्हें ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करने की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इससे पंचायत स्तर पर तैयार की गई योजनाओं और प्रस्तावों को डिजिटल माध्यम से दर्ज करने तथा उनकी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण रहे मौजूद
विशेष ग्राम सभाओं में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी, मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंच, पंचायत सचिव, कार्यपालक सहायक, ग्राम कचहरी सचिव, किसान सलाहकार, विकास मित्र, मनरेगा रोजगार सेवक, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिकों ने भी ग्राम सभाओं में भाग लिया।
इन विशेष ग्राम सभाओं के जरिए पंचायतों में विकास योजनाओं को स्थानीय जरूरतों से जोड़ने और ग्रामीणों की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश की गई। जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और ग्रामीण समुदाय के बीच समन्वय मजबूत करते हुए स्वच्छ, सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित गांव बनाने के लिए सामूहिक प्रयास का संकल्प लिया गया।