गोपालगंज में गंडक नदी की बाढ़ के बीच मिले एक असामान्य कछुए ने स्थानीय लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
कछुए के खोल पर उभरे पीले रंग के प्राकृतिक निशान इतने अलग दिखाई दे रहे हैं कि उन्हें देखकर पहली नजर में अंग्रेजी के ‘A, B, C और D’ अक्षरों जैसा आभास होता है। कछुए को देखने के लिए आसपास के लोग मौके पर पहुंचने लगे और कई लोगों ने उसका वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर साझा किया।
कछुए की अनोखी बनावट सामने आने के बाद इलाके में उसकी पहचान को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों के बीच इसे दुर्लभ प्रजाति का कछुआ बताए जाने की बातें सामने आ रही हैं।
हालांकि, अभी तक किसी वन्यजीव विशेषज्ञ या संबंधित विभाग की ओर से इसकी प्रजाति को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को फिलहाल दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।
खोल पर बने निशानों ने खींचा लोगों का ध्यान
इस कछुए की सबसे खास बात उसके खोल पर दिखाई देने वाला पीला पैटर्न है। प्राकृतिक रूप से बने ये निशान अलग-अलग आकृतियों में नजर आ रहे हैं। इन्हीं आकृतियों की वजह से लोगों को इसमें अंग्रेजी के अक्षर दिखाई दे रहे हैं। तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद कछुए की असामान्य बनावट चर्चा का विषय बन गई है।
तस्वीरों को देखकर कुछ लोगों ने इसे इंडियन फ्लैपशेल टर्टल से जोड़कर देखा है। हालांकि, किसी वन्यजीव की केवल तस्वीर देखकर प्रजाति की सटीक पहचान करना उचित नहीं माना जा सकता।
इसके लिए उसके आकार, खोल की बनावट, शारीरिक संरचना और अन्य जैविक विशेषताओं का विशेषज्ञ परीक्षण जरूरी होगा।
विशेषज्ञ जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविक पहचान
वन्यजीव विशेषज्ञों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह कछुआ किस प्रजाति का है और उसके खोल पर दिखाई देने वाले पीले निशान वास्तव में किस प्रकार का प्राकृतिक पैटर्न हैं। फिलहाल उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर इसे दुर्लभ बताना वैज्ञानिक रूप से पुष्ट नहीं है।
बाढ़ के बहाव के साथ पहुंचने का लगाया जा रहा अनुमान
गंडक नदी में बाढ़ की स्थिति के बीच कछुए के मिलने से यह संभावना जताई जा रही है कि वह पानी के बहाव के साथ नदी के आसपास के मैदानी इलाके में पहुंचा होगा। हालांकि, कछुआ वास्तव में कहां से आया और किस तरह यहां तक पहुंचा, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है।
फिलहाल इस अनोखे कछुए की तस्वीरें और वीडियो लोगों के बीच कौतूहल पैदा कर रहे हैं। इसकी वास्तविक प्रजाति और विशिष्ट शारीरिक बनावट को लेकर स्थिति वन्यजीव विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।