स्कूल की उम्र में दुनिया के शतरंज रिकॉर्ड पर कब्जा; समरकंद ओलंपियाड में इंग्लैंड के लिए टॉप बोर्ड पर खेलीं, 11 बाजियों में बनाए 8 अंक
लंदन/समरकंद। शतरंज की बिसात पर जब ज्यादातर बच्चे अभी खेल की शुरुआती चालें सीख रहे होते हैं, उसी उम्र में ब्रिटेन की बोधना सिवानंदन ने इतिहास रच दिया है। महज 11 साल की बोधना दुनिया की सबसे कम उम्र की Woman Grandmaster (WGM) बन गई हैं। उन्होंने यह उपलब्धि उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुए 46वें Chess Olympiad के दौरान हासिल की।
बोधना ने इस अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में इंग्लैंड की महिला टीम का प्रतिनिधित्व किया। खास बात यह रही कि उन्होंने टीम के पहले बोर्ड यानी Board 1 पर खेलते हुए सभी 11 राउंड में हिस्सा लिया। टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन इतना मजबूत रहा कि उन्होंने कुल 8 अंक हासिल किए और अपने तीसरे तथा अंतिम WGM norm की जरूरी शर्त पूरी कर ली। FIDE ने भी उनकी इस उपलब्धि की पुष्टि की है।
क्या होता है WGM?
WGM यानी Woman Grandmaster शतरंज में महिलाओं के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च महिला-विशेष खिताब है। इसे पाने के लिए खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित प्रदर्शन मानकों यानी norms को पूरा करना होता है।
बोधना ने समरकंद में अपना तीसरा और अंतिम WGM norm हासिल किया। इसके साथ ही वह इस खिताब की पात्रता पूरी करने वाली शतरंज इतिहास की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गईं।
11 बाजियां, 8 अंक और सबसे बड़ी उपलब्धि
46वां Chess Olympiad 27 सितंबर को समाप्त हुआ। टूर्नामेंट में बोधना ने इंग्लैंड की महिला टीम के लिए लगातार 11 राउंड खेले। उन्होंने 8/11 का स्कोर बनाया। उनका खेल सिर्फ उम्र के लिहाज से ही खास नहीं रहा, बल्कि वह इंग्लैंड की टीम के सबसे महत्वपूर्ण बोर्ड पर खेल रही थीं।
Chess-Results के रिकॉर्ड में भी बोधना को इंग्लैंड की महिला टीम के Board 1 पर दर्ज किया गया है। टूर्नामेंट में उनकी शुरुआती बाजियों में ही उनकी मजबूत फॉर्म दिखाई दी थी।
पिछला रिकॉर्ड भी बोधना ने पीछे छोड़ा
बोधना से पहले सबसे कम उम्र में Woman Grandmaster बनने का रिकॉर्ड कटेरिना लाग्नो और होउ यीफान के नाम रहा था, जिन्होंने 12 साल की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी। अब 11 साल की बोधना ने यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।
यानी बोधना ने इस रिकॉर्ड को सिर्फ कुछ महीनों से नहीं, बल्कि पूरे एक साल के अंतर से तोड़ा है। उनकी उम्र और उपलब्धि का यह अंतर शतरंज की दुनिया में खास तौर पर चर्चा का विषय बना है।
ब्रिटेन की सबसे कम उम्र की महिला चैंपियन भी
यह बोधना का पहला बड़ा रिकॉर्ड नहीं है। अगस्त 2026 में वह Britain की सबसे कम उम्र की Women’s Chess Champion भी बनी थीं। ब्रिटिश Chess Championships में उन्होंने 11 साल की उम्र में महिला वर्ग का खिताब जीता था।
अब कुछ ही हफ्तों के भीतर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नया इतिहास बना दिया है।
‘यहां रुकना नहीं चाहती’
इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद बोधना का कहना है कि वह इसे अपनी मंजिल नहीं मानतीं। FIDE के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि वह आगे भी “history” बनाते रहना चाहती हैं।
ओलंपियाड में इतने बड़े मंच पर खेलने के दबाव को लेकर जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें खास दबाव महसूस नहीं हुआ। उनका ध्यान खेल का आनंद लेने पर था। उन्होंने बताया कि यह उनका दूसरा Chess Olympiad था और इस बार फर्क सिर्फ इतना था कि वह अलग बोर्ड पर खेल रही थीं।
लॉकडाउन के दौरान शुरू हुआ था शतरंज का सफर
बोधना ने कम उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया और कोरोना महामारी के दौरान यह उनकी रुचि से आगे बढ़कर गंभीर खेल करियर में बदल गया। इसके बाद उन्होंने लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई और एक के बाद एक रिकॉर्ड अपने नाम किए।
अब 11 साल की उम्र में उनके नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज हो चुका है, जिसे शतरंज की दुनिया लंबे समय तक याद रखेगी। बोधना के लिए अगला लक्ष्य हालांकि साफ है—एक रिकॉर्ड के बाद रुकना नहीं, बल्कि शतरंज की बिसात पर नई ऊंचाइयां हासिल करते रहना।