नालंदा। जिलाधिकारी उदिता सिंह ने शुक्रवार को बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त 14 मामलों की सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने परिवादियों की समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को मामलों का त्वरित, समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निवारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। नालंदा जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी उदिता सिंह को जिलाधिकारी के रूप में दर्ज किया गया है।
सुनवाई के दौरान अतिक्रमण हटाने, बाईपास की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने, मानदेय भुगतान, निर्माण कार्य पर लगी रोक हटाने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध कराने और गली के बीच लगे विद्युत पोल को हटाने से जुड़े मामलों में कार्रवाई करते हुए कई शिकायतों का त्वरित निष्पादन किया गया।
कई शिकायतों का मौके पर हुआ समाधान
सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों ने शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जानकारी जिलाधिकारी को दी। जिन मामलों में आवश्यक कार्रवाई पूरी हो चुकी थी, उनका निपटारा किया गया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आम लोगों की शिकायतों को केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित न रखा जाए, बल्कि नियमानुसार प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए।
हाल की आधिकारिक जिला सूचना में भी लोक शिकायतों के मामलों में समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निवारण सुनिश्चित करने तथा संबंधित लोक प्राधिकारों से कार्रवाई की समीक्षा किए जाने की जानकारी दी गई है।
कुछ मामलों में अगली सुनवाई की तारीख तय
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र पद के चयन में कथित अनियमितता और धांधली, रात में दूसरे गांव के लोगों के अनावश्यक आवागमन से ग्रामीणों में चोरी एवं अन्य अवैध गतिविधियों की आशंका, ऑनलाइन रसीद निर्गत करने तथा अतिक्रमण मुक्त कराने से जुड़े मामलों में तत्काल अंतिम निष्पादन नहीं हो सका।
इन मामलों में आवश्यक कार्रवाई के लिए अगली सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई और संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच एवं आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए।
संवेदनशीलता और पारदर्शिता पर जोर
जिलाधिकारी उदिता सिंह ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि लोक शिकायतों के निवारण के दौरान संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि आमजन की शिकायतों का प्रभावी समाधान प्रशासन की प्राथमिकता है।
उन्होंने अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि शिकायतों के निवारण में अनावश्यक देरी न हो और परिवादियों को नियमानुसार समय पर राहत उपलब्ध कराई जाए। हाल की जिला प्रशासन की लोक शिकायत सुनवाई में भी इसी तरह समय-सीमा के भीतर शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निष्पादन पर जोर दिया गया है।