15 सितंबर से 31 अक्टूबर तक मिशन मोड में चलेगा विशेष अभियान, रिकॉर्ड और जमीन की वास्तविक स्थिति का होगा मिलान, लापरवाही पर तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही
पटना, 16 सितंबर 2026। बिहार में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत जमाबंदी में दर्ज जमीन के विवरण और मूल अभिलेखों के बीच किसी तरह का अंतर मिलने पर नियमानुसार सुधार किया जाएगा। खास बात यह है कि यदि रिकॉर्ड के सत्यापन के दौरान जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्थल पर मापी की जरूरत पड़ती है, तो रैयत को इसके लिए अलग से आवेदन करने या मापी शुल्क देने की जरूरत नहीं होगी। विभाग विशेष सर्वेक्षण अमीनों की सहायता से आवश्यकतानुसार निःशुल्क मापी कराएगा।
15 सितंबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस जमाबंदी अद्यतीकरण एवं नामांतरण उत्तराधिकार विशेष अभियान का उद्देश्य जमीन के रिकॉर्ड को अधिक शुद्ध, अद्यतन और पारदर्शी बनाना है। अभियान के दौरान डिजिटाइज्ड जमाबंदी का रजिस्टर-2 की स्कैन प्रति से मिलान किया जाएगा। नाम, पिता के नाम, खाता, खेसरा, रकबा, लगान और अन्य विवरणों में अंतर पाए जाने पर नियम के अनुसार सुधार की कार्रवाई की जाएगी।
रैयतों को अतिरिक्त प्रक्रिया से राहत
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने अधिकारियों को अभियान को पूरी गंभीरता के साथ मिशन मोड में चलाने का निर्देश दिया है। मंत्री ने कहा है कि जमीन के रिकॉर्ड में सुधार के लिए आम रैयत को अतिरिक्त प्रक्रिया और शुल्क के बोझ में नहीं डाला जाएगा। विभाग का लक्ष्य केवल जमाबंदी में बदलाव करना नहीं, बल्कि रिकॉर्ड को ऐसा बनाने का है, जो मूल अभिलेख और जमीन की वास्तविक स्थिति से मेल खाए।
इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मापी की आवश्यकता होने पर रैयत को अलग से मापी के लिए आवेदन करने की बाध्यता नहीं होगी। अभिलेखों के सत्यापन के दौरान यदि अधिकारियों को लगता है कि स्थल की स्थिति स्पष्ट करने के लिए मापी जरूरी है, तो विभागीय स्तर पर इसकी कार्रवाई की जाएगी।
रिकॉर्ड और जमीन की स्थिति में अंतर की होगी पड़ताल
जमाबंदी सुधार अभियान को केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड में संशोधन तक सीमित नहीं रखा गया है। डिजिटाइज्ड रिकॉर्ड की मूल दस्तावेजों से जांच के साथ जरूरत पड़ने पर जमीन की स्थल स्थिति भी देखी जाएगी। इससे रिकॉर्ड में दर्ज रकबा, खाता-खेसरा अथवा अन्य विवरण और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर की पहचान करने में मदद मिलेगी।
अभियान के दौरान शून्य रकबा, शून्य लगान और मिसिंग सूचनाओं को भी चिह्नित कर नियमानुसार दुरुस्त किया जाएगा। इसका सीधा संबंध जमीन के रिकॉर्ड की शुद्धता से है, क्योंकि अधूरे अथवा गलत विवरण भविष्य में नामांतरण, उत्तराधिकार और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में परेशानी का कारण बन सकते हैं।
मृत जमाबंदीदारों के उत्तराधिकारियों का भी होगा नामांतरण
विशेष अभियान में ऐसे मामलों को भी शामिल किया गया है, जिनमें जमाबंदीदार की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन रिकॉर्ड में अब तक उनके उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज नहीं हुए हैं। राजस्व कर्मचारी अपने हलका क्षेत्र में ऐसे मृत जमाबंदीदारों की पहचान करेंगे।
वैध उत्तराधिकारियों से आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर उन्हें अंचल अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद उत्तराधिकार नामांतरण की प्रक्रिया शुरू होगी। निर्विवाद मामलों में 14 दिनों की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद आदेश पारित किया जाएगा। इसके बाद करेक्शन स्लिप जारी करने के साथ जमाबंदी और लगान मांग को भी अद्यतन किया जाएगा।
हर मामले में नहीं होगा स्वतः नामांतरण
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभियान का मतलब यह नहीं है कि हर मामले में बिना जांच के नामांतरण कर दिया जाएगा। सरकारी या सार्वजनिक भूमि, जल-निकाय, सीलिंग जमाबंदी, न्यायालय में लंबित विवाद तथा ऐसे मामले, जहां मूल अभिलेख और स्थल की स्थिति में गंभीर विरोधाभास है, उनमें समुचित जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
इस प्रावधान का उद्देश्य रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया में जल्दबाजी के कारण गलत नामांतरण या विवादित जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव की संभावना को रोकना है। यानी अभियान में तेजी के साथ रिकॉर्ड की व